मोबाइल फोन आज सिर्फ बात करने का जरिया नहीं है. इसमें बैंकिंग से लेकर जरूरी दस्तावेज, फोटो, कॉन्टैक्ट और निजी जानकारी तक होती है. ऐसे में फोन खो जाना या चोरी हो जाना बड़ी परेशानी बन जाता है. लेकिन अगर आपका फोन गुम हो गया है, तो उसे वापस पाने का एक सरकारी रास्ता भी है. इसका नाम है संचार साथी पोर्टल. ड‍िपार्टमेंट ऑफ कम्‍यून‍िकेशन इस प्लेटफॉर्म ने जुलाई 2026 में 77,692 खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कराने में मदद की. पहली बार एक महीने में बरामदगी का आंकड़ा 75 हजार के पार गया है. अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच हर महीने फोन म‍िलने के आंकड़े में यह 201 फीसदी की बढ़ोतरी है. सवाल है कि आखिर संचार साथी करता क्या है? फोन गुम होने के बाद यह उसे ढूंढता कैसे है? और आम आदमी इसका इस्तेमाल कैसे कर सकता है?

संचार साथी की पूरी व्यवस्था में आपके मोबाइल का IMEI नंबर सबसे अहम है. IMEI यानी International Mobile Equipment Identity. यह आपके फोन की एक तरह की यूनिक पहचान होती है. आमतौर पर फोन के बॉक्स, बिल या खरीद की रसीद पर IMEI नंबर लिखा होता है. कई फोन में इसे *#06# डायल करके भी देखा जा सकता है. लेकिन फोन खो जाने के बाद यह नंबर याद रखना जरूरी नहीं है. बॉक्स या बिल से भी इसे निकाला जा सकता है. यही IMEI नंबर सिस्टम को यह पहचानने में मदद करता है कि कौन सा मोबाइल गुम या चोरी हुआ है.

फोन खो गया तो सबसे पहले क्या करें?

फोन खोते ही घबराने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले अपनी SIM को बंद या ब्लॉक करवाना चाहिए. बैंकिंग ऐप, UPI और दूसरी जरूरी सेवाओं की सुरक्षा भी जांचनी चाहिए.

इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराना जरूरी है. इसके बाद संचार साथी के CEIR यानी Central Equipment Identity Register सिस्टम का इस्तेमाल किया जा सकता है.

यहीं से खोए हुए फोन को नेटवर्क पर ब्लॉक करने और बाद में ट्रैक करने की प्रक्रिया शुरू होती है.

CEIR क्या करता है?

CEIR को आसान भाषा में मोबाइल की पहचान वाला सरकारी सिस्टम समझिए. इसमें खोए और चोरी हुए मोबाइल की जानकारी दर्ज की जाती है.

जब आप अपने फोन को CEIR के जरिए रिपोर्ट करते हैं, तो उसके IMEI नंबर को भारतीय मोबाइल नेटवर्क पर ब्लॉक किया जा सकता है. इसका मतलब यह है कि फोन किसी दूसरी SIM के साथ मोबाइल नेटवर्क पर सामान्य तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा.

यानी चोर फोन में अपनी SIM डालकर उसे आसानी से इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. लेकिन यहां एक जरूरी बात है. फोन ब्लॉक होने का मतलब यह नहीं है कि फोन तुरंत मिल जाएगा. ब्लॉक करने से उसका नेटवर्क पर इस्तेमाल रोकने में मदद मिलती है. साथ ही सिस्टम को उसे आगे ट्रैक करने का मौका मिलता है.

फिर फोन ट्रैक कैसे होता है?

मान लीजिए आपका फोन चोरी हो गया. आपने उसका IMEI नंबर देकर शिकायत दर्ज की और फोन ब्लॉक हो गया. अब किसी दूसरे व्यक्ति ने उस फोन में नई SIM डाल दी.

नई SIM के साथ फोन जब मोबाइल नेटवर्क से जुड़ने की कोशिश करेगा, तो नेटवर्क उस डिवाइस की पहचान कर सकता है. क्योंकि SIM बदलने से मोबाइल का IMEI नंबर नहीं बदलता.

यहीं से सिस्टम को पता चल सकता है कि जिस IMEI वाले फोन को चोरी या गुम होने की शिकायत में ब्लॉक किया गया था, वह फिर से नेटवर्क पर इस्तेमाल हो रहा है. इसके बाद संबंधित जानकारी पुलिस और फोन के मालिक तक पहुंचाई जा सकती है.

SIM बदलने से भी फोन नहीं छिपता

इसे ऐसे समझ‍िए क‍ि मान लीजिए आपका फोन चोरी हो गया. चोर ने आपकी SIM निकालकर अपनी SIM डाल दी. आपको लग सकता है कि अब फोन का पता लगाना मुश्किल होगा. लेकिन मोबाइल नेटवर्क फोन और SIM दोनों की पहचान अलग-अलग तरीके से करता है. फोन की पहचान IMEI से होती है. इसलिए SIM बदलने के बावजूद डिवाइस की पहचान बनी रहती है. अगर वही चोरी हुआ फोन किसी नेटवर्क पर इस्तेमाल होता है, तो सिस्टम उसके इस्तेमाल की जानकारी पकड़ने में मदद कर सकता है.

मंत्रालय के मुताबिक, चोरी या खोए हुए मोबाइल में किसी नए SIM कार्ड के इस्तेमाल की जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराई जाती है. कई मामलों में वैकल्पिक मोबाइल नंबर की जानकारी भी जांच एजेंसियों के साथ साझा की जाती है.

पुलिस को भी मिलती है जानकारी

सिर्फ मोबाइल मालिक को सूचना देना ही इस सिस्टम का काम नहीं है. ट्रेसिंग के बाद संबंधित पुलिस स्टेशन की जानकारी भी नागरिक को SMS, ईमेल और पोर्टल के जरिए दी जा सकती है. इससे सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि मोबाइल मालिक को यह पता चलता रहता है कि मामले में आगे क्या हुआ.

दूसरी तरफ पुलिस को भी जांच के लिए जरूरी डिजिटल जानकारी मिलती है. DoT की Digital Intelligence Unit और क्षेत्रीय कार्यालय स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर ऐसे मामलों में काम करते हैं. यानी पूरा सिस्टम अकेले संचार साथी नहीं चलाता. इसमें दूरसंचार विभाग, मोबाइल नेटवर्क कंपनियां और पुलिस मिलकर काम करते हैं.

फोन मिल जाए तो क्या करना है?

मान लीजिए आपका फोन ट्रैक हो गया और पुलिस की मदद से वापस भी मिल गया. तब संचार साथी के जरिए उसके ब्लॉक स्टेटस को हटाने की प्रक्रिया की जा सकती है. लेकिन फोन हाथ में आने के बाद एक और काम बेहद जरूरी है. मंत्रालय की सलाह है कि बरामद फोन को फैक्ट्री रीसेट किया जाए.

क्योंकि फोन आपके पास पहुंचने से पहले किसी दूसरे व्यक्ति के इस्तेमाल में रहा हो सकता है. उसमें कोई संदिग्ध ऐप, मैलवेयर या अनधिकृत सॉफ्टवेयर मौजूद हो सकता है. फैक्ट्री रीसेट से फोन को दोबारा सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने में मदद मिलती है.

शिकायत दर्ज करने के लिए क्या-क्या चाहिए?

फोन गुम होने के मामले में कुछ जानकारी पहले से तैयार रखना अच्छा है. सबसे जरूरी है फोन का IMEI नंबर. इसके अलावा फोन से जुड़ी जानकारी, खरीद का बिल या उपलब्ध दस्तावेज और पुलिस शिकायत से जुड़ी जानकारी काम आ सकती है.

संचार साथी के CEIR सिस्टम में जाकर खोए या चोरी हुए मोबाइल की रिपोर्ट की जा सकती है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद फोन का IMEI भारतीय दूरसंचार नेटवर्क पर ब्लॉक किया जा सकता है. इसके बाद अगर फोन दोबारा किसी मोबाइल नेटवर्क पर इस्तेमाल होता है, तो उसकी पहचान होने की संभावना बढ़ जाती है.

क्या फोन हमेशा वापस मिल जाएगा?

नहीं. यह समझना जरूरी है कि संचार साथी कोई ऐसा सिस्टम नहीं है जो हर खोए हुए फोन को तुरंत ढूंढकर आपके घर पहुंचा देगा. फोन की बरामदगी कई चीजों पर निर्भर करती है. जैसे फोन दोबारा नेटवर्क पर इस्तेमाल हुआ या नहीं, पुलिस जांच में क्या जानकारी मिली और डिवाइस कहां इस्तेमाल किया जा रहा है.अगर फोन कभी नेटवर्क पर दोबारा इस्तेमाल ही नहीं हुआ, तो उसे ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है.

फिर भी यह सिस्टम फोन मालिक के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच बनता है. इससे चोरी हुए फोन को नेटवर्क पर इस्तेमाल करना कठिन होता है और उसके दोबारा नेटवर्क से जुड़ने पर पुलिस जांच को डिजिटल सुराग मिल सकता है.

संचार साथी की असली ताकत क्या है?

इस पूरे सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह फोन की पहचान को SIM से अलग करके देखता है. SIM बदल सकती है. नंबर बदल सकता है. लेकिन मोबाइल का IMEI एक महत्वपूर्ण डिवाइस पहचान है. इसी पहचान के आधार पर नेटवर्क और सरकारी सिस्टम खोए या चोरी हुए फोन की गतिविधि को पकड़ने में मदद करते हैं. यही वजह है कि संचार साथी सिर्फ शिकायत दर्ज करने वाला पोर्टल नहीं है. यह दूरसंचार नेटवर्क, मोबाइल कंपनियों और पुलिस के बीच जानकारी जोड़ने वाली व्यवस्था भी है.

जुलाई 2026 में 77,692 मोबाइल की बरामदगी का आंकड़ा बताता है कि सिस्टम का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. अगर आपका फोन कभी गुम या चोरी हो जाए, तो सिर्फ थाने में शिकायत करके रुकने के बजाय संचार साथी के CEIR सिस्टम पर भी उसकी रिपोर्ट करना समझदारी होगी. जितनी जल्दी IMEI की जानकारी सिस्टम में जाएगी, उतनी जल्दी फोन को ब्लॉक करने और उसके दोबारा नेटवर्क पर इस्तेमाल होने की स्थिति में सुराग मिलने की संभावना बनती है.



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