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Rampur Habshi Halwa Recipe: उत्तर प्रदेश सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन पहल के अंतर्गत हब्शी हलवा को रामपुर की पहचान के लिए चुना है. इस मिठाई का इतिहास नवाबों से जुड़ा है. सदियों पुरानी ये रेसिपी आज भी लोगों को अपना दीवाना बना देती है. यहां जानिए नवाबों के रसोई में इजात हुई हब्शी हलवा को कैसे बनाया जाता है.

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उत्तर प्रदेश का रामपुर जिला अपने कबाब, कोरमा और नवाबी खानपान के लिए मशहूर रहा है, लेकिन यहां की एक ऐसी मिठाई भी है जिसने दशकों से लोगों के दिलों में खास जगह बना रखी है. हम बात कर रहे हैं हब्शी हलवा के बारे में जिसे हाल ही में योगी सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन के तहत रामपुर के स्वाद के रूप में दुनिया भर में मशहूर करने के लिए चुना है. गहरे भूरे-काले रंग, सोंधी खुशबू और अनोखी बनावट वाला यह हलवा सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि रामपुर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है.

हब्शी हलवे का इतिहास नवाबी दौर से जुड़ा माना जाता है. कुछ सोर्स इसे लगभग 200 साल पुरानी परंपरा बताते हैं, जबकि कई स्थानीय जानकार इसकी शुरुआत 1930 के आसपास रामपुर के नवाब हामिद अली खान के समय से जोड़ते हैं. कहा जाता है कि नवाबों के लिए ऐसा पौष्टिक और स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किया गया था जो सर्दियों में ऊर्जा भी दे सके. समय के साथ यह शाही रसोई से निकलकर आम लोगों तक पहुंच गया और रामपुर की पहचान बन गया.

बनने में लगता है 6-8 घंटे
हब्शी हलवा बनाने की प्रक्रिया काफी लंबी और मेहनत भरी होती है. इसके लिए गेहूं को कई दिनों तक भिगोकर अंकुरित किया जाता है. फिर उसे सुखाकर पीसा जाता है. इसके बाद दूध, देसी घी, चीनी, मेवे और कुछ पारंपरिक मसालों या जड़ी-बूटियों के साथ इसे घंटों तक धीमी आंच पर पकाया जाता है. लगातार भूनने और चीनी के कैरमलाइज होने से इसका रंग गहरा भूरा या काला हो जाता है, जो इसकी सबसे बड़ी पहचान है. कई कारीगर इसे 6 से 8 घंटे तक पकाते हैं ताकि इसका खास स्वाद और बनावट विकसित हो सके.

जल्दी खराब नहीं होता
इस हलवे की सबसे बड़ी खासियत इसकी दानेदार और हल्की चबाने वाली बनावट है. आम हलवों की तरह यह बहुत नरम नहीं होता. साथ ही इसमें घी, मेवे और अंकुरित गेहूं का इस्तेमाल इसे समृद्ध स्वाद देता है. यही वजह है कि सर्दियों में इसकी मांग सबसे अधिक रहती है. रामपुर में हब्शी हलवा शादी-ब्याह और खास मौकों पर मेहमानों को भेंट करने की पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है. इसकी लंबी शेल्फ लाइफ भी इसे खास बनाती है. आज इसकी मांग केवल रामपुर या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, मुंबई, सऊदी अरब, ओमान, इंग्लैंड और अमेरिका तक पहुंच चुकी है.

हब्शी हलवा रेसिपी
सामाग्री
250 ग्राम समनक (गेहूं का अर्क)
5 लीटर दूध
500 ग्राम खोया
1 किलो चीनी
1 किलो घी
1 छोटा चम्मच केसर
1 छोटा चम्मच केवड़ा जल
1 जावित्री का ब्लेड
1 चुटकी जायफल
10 हरी इलायची

विधि
एक कढ़ाई में गेहूं का अर्क और दूध मिलाएं और धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं. जब दूध आधा रह जाए, तो उसमें मसला हुआ खोया डालें और लगातार चलाते हुए एक चिकना मिश्रण बना लें. फिर उसमें केवड़ा जल में घुला हुआ केसर और चीनी डालें और चलाते रहें. जब चीनी मिश्रण में अच्छी तरह मिल जाए और मिश्रण गाढ़ा होकर हिलाना मुश्किल हो जाए, तो किनारों से घी डालें और लगभग 20-30 मिनट तक अच्छी तरह हिलाते रहें. जब हलवा कढ़ाई से चिपकना बंद कर दे और एक ठोस लोई बन जाए, तो इसे तेल लगी हुई थाली में पलट दें. जावित्री, जायफल और इलायची को बारीक पीस लें और छानकर हलवे पर छिड़कें. फिर हीरे के आकार के टुकड़े काट लें और जमने पर परोसें. इसे ठंडी जगह पर एक महीने तक भी सुरक्षित रखा जा सकता है.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह एक अनुभवी लाइफस्टाइल पत्रकार हैं, जिनके पास डिजिटल मीडिया और कंटेंट लेखन के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से…

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