Highlights

  • कैसे टकराए भारत पाकिस्तान के युद्धपोत
  • पाकिस्तान के युद्धपोत का क्या है नाम
  • समुद्री नेविगेशन के क्या हैं नियम

उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के युद्धपोत से टकराने वाले पाकिस्तानी नौसेना के जहाज का नाम PNS Hunain है। यह पाकिस्तान नौसेना का यारमूक-क्लास ऑफशोर पेट्रोल वेसल है, जो भारतीय युद्धपोत से टकरा गया। इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि PNS Hunain पाकिस्तान नौसेना की चल रही SEASPARK-2026 exercise में शामिल है। पाकिस्तान ने इस बड़े नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत दो सितंबर को कराची से की थी। अभ्यास में पांच दिन का Karachi port phase और उसके बाद North Arabian Sea में दो दिन का Sea phase शामिल था।

15 सितंबर की शाम इसी व्यापक maritime activity के दौरान उत्तर अरब सागर में PNS Hunain भारतीय नौसेना के एक frontline warship के बेहद करीब आ गया। भारतीय पक्ष के अनुसार पाकिस्तानी जहाज ने तेज गति से असुरक्षित और गैर-पेशेवर तरीके से चल रहा था, जिसके बाद दोनों जहाजों में टक्कर हो गई। घटना अरब सागर में हुई और कहा गया कि किसी बड़े नुकसान की बात सामने नहीं आई है।

भारत ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए पाकिस्तान के कार्यवाहक राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज ने conduct April 1991 के भारत पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के Article 10 का सीधा उल्लंघन किया था।

भारत पाकिस्तान के बीच क्या है समझौता

इस घटना ने साल 1991 के द्विपक्षीय समझौते के तहत सैन्य अभ्यास और युद्धाभ्यास के लिए अग्रिम सूचना तथा सुरक्षित आवाजाही के प्रावधानों को फिर से चर्चा में ला दिया है। इसे पहले भी एक 16 जून 2011 को ऐसी ही दुर्घटना हुई थी। पाकिस्तानी जहाज PNS Babur और भारतीय युद्धपोत INS Godavari के बीच अदन की खाड़ी में हुई थीं। भारत ने उस समय भी इसका विरोध दर्ज किया था।

बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता मिलिट्री एक्सरसाइज़, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही के बारे में पहले से सूचना देने से जुड़ा है। इस समझौते में सैन्य अभ्यास और गतिविधियों से जुड़े नियम शामिल हैं, जिनमें दोनों देशों की सेनाओं के बीच संभावित खतरनाक टकराव को रोकने के उपाय हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते में खास बात यह है कि एक-दूसरे के करीब सैन्य प्लेटफॉर्म (जैसे जहाज या पनडुब्बी) के संचालन से जुड़े एहतियाती उपाय भी शामिल हैं। 

दूरी को लेकर क्या हैं नियम

अनुच्छेद 10 में कहा गया है: किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए एक दूसरे के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों को एक-दूसरे से तीन नॉटिकल मील (NM) से कम दूरी पर नहीं आना चाहिए। यानी जब भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज या पनडुब्बियां अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हों, तो वे एक-दूसरे से कम से कम तीन नॉटिकल मील की दूरी बनाए रखें। तीन नॉटिकल मील लगभग 5.56 किलोमीटर के बराबर होता है, जो दुर्घटना या खतरनाक टकराव की संभावना को कम करने के लिए न्यूनतम दूरी है।

दोनों देशों की नौसेनाओं में कब कब हुआ टकराव

  • पिछले कुछ दशकों में भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच तनावपूर्ण आमना-सामना की कई घटनाएं हुई हैं।
  • ‘सोसाइटी फॉर पॉलिसी स्टडीज़’ के मैरीटाइम रिसर्च ग्रुप की 2024 की एक रिपोर्ट में 1995 की एक घटना का ज़िक्र है, जिसमें इंडोनेशिया में हो रहे इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल भारतीय नौसेना के एक जहाज़ के ऊपर पाकिस्तान नौसेना के ‘अलौएट’ (Alouette) हेलीकॉप्टर खतरनाक रूप से कम ऊंचाई पर उड़े थे।
  • इसी रिपोर्ट में 1996 की एक और घटना का ज़िक्र है। अरब सागर में पाकिस्तान के ‘सी स्पार्क’ अभ्यास से जुड़ी निगरानी के दौरान पाकिस्तान नौसेना के ‘अलौएट’ हेलीकॉप्टर और भारतीय नौसेना के ‘सी किंग’  हेलीकॉप्टर के बीच टक्कर होते-होते बची थी।

ये घटनाएं बताती हैं कि जब दोनों देशों के बीच औपचारिक रूप से युद्ध ना भी हो रहा हो, तब भी दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी भरोसा बढ़ाने वाले तंत्र क्यों ज़रूरी हैं और समझौतों पर अमल करना कितना जरूरी है। 

समुद्री नेविगेशन के नियम का पालन है जरूरी

बता दें कि नौसेना के जहाज़ आम कॉमर्शियल जहाज़ों से काफी अलग होते हैं। वे अक्सर निगरानी, ​​एक्सरसाइज़, पेट्रोलिंग और दूसरे मिलिट्री मिशन चलाते हैं, कभी-कभी ऐसे इलाकों में जहां अलग-अलग देशों के जहाज़ एक साथ चल रहे होते हैं। इस वजह से समुद्री नेविगेशन के नियमों का पालन करना बहुत ज़रूरी हो जाता है। समुद्र में टक्कर रोकने के लिए इंटरनेशनल रेगुलेशन, जिन्हें आम तौर पर COLREGs कहा जाता है, जहाज़ों की आवाजाही के नियम तय करते हैं और इनका मकसद टक्कर को रोकना होता है। 

क्या हैं समुद्री नेविगेशन के नियम

  • हर जहाज को हर समय आंखों, कानों और अन्य उपलब्ध साधनों से पूरी सतर्कता रखनी चाहिए ताकि आसपास के खतरों और अन्य नावों का पता चल सके।
  • प्रत्येक पोत को हमेशा एक सुरक्षित गति से चलना चाहिए ताकि यातायात, दृश्यता और परिस्थितियों के अनुसार समय पर रोका या मोड़ा जा सके। 
  • यदि कोई संदेह हो, तो यह माना जाना चाहिए कि टक्कर का जोखिम मौजूद है।
  • रडार का उपयोग करते समय नाविकों को उसकी सीमाओं की पूरी समझ होनी चाहिए। 
  • टक्कर से बचने के लिए उठाया गया कदम स्पष्ट और समय पर होना चाहिए।
  • जब दो पावर-संचालित जहाज आमने-सामने आ रहे हों, तो दोनों को अपने दाहिने (Starboard/Right) की ओर मुड़ना चाहिए ताकि वे एक-दूसरे के बाईं तरफ से निकल सकें।
  • जब दो जहाज एक-दूसरे को काट रहे हों, तो जिस जहाज के दाईं ओर दूसरा जहाज हो, उसे रास्ता छोड़ना (Give-way) होगा।
  •  एक पोत को रास्ता छोड़ना होता है और दूसरे को अपनी गति व दिशा बनाए रखनी होती है, लेकिन यदि रास्ता देने वाला पोत न हटे, तो दूसरे पोत को खुद कार्रवाई करनी पड़ती है। 





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