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बरसात शुरू होते ही छत्तीसगढ़ की रसोई में मूली भाजी की खुशबू फैलने लगती है. गृहणी अन्नू नायक बताती हैं कि मूली के साथ बनने वाली लपेटे दार छत्तीसगढ़िया मूली भाजी का स्वाद सबसे अलग होता है. मूंगफली के पेस्ट और देसी तड़के से तैयार यह पारंपरिक सब्जी सिर्फ 30 मिनट में बन जाती है और चावल, दाल या रोटी के साथ खाने का स्वाद कई गुना बढ़ा देती है.

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मौसम कोई भी हो, पारंपरिक भाजी का स्वाद लोगों की थाली से कभी गायब नहीं होता. हालांकि, बरसात शुरू होते ही हरी-भरी मौसमी भाजियों की मांग और भी बढ़ जाती है. इन दिनों बाजारों में ताजी मूली भाजी आसानी से मिलने लगी है और घर-घर में इससे बनने वाली पारंपरिक सब्जी का स्वाद लोगों को आकर्षित कर रहा है. खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ में मूली भाजी को केवल पत्तियों से नहीं, बल्कि मूली के साथ मिलाकर बनाया जाता है, जिससे इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है.

गृहणी अन्नू नायक बताती हैं कि छत्तीसगढ़िया स्टाइल में बनने वाली मूली भाजी की असली पहचान उसकी लपेटे दार बनावट और देसी स्वाद है. उनका कहना है कि अगर मूली भाजी को मूली के साथ पकाया जाए तो सब्जी का स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है. यही वजह है कि बरसात के मौसम में यह व्यंजन कई परिवारों की पहली पसंद बन जाता है.

बनाने की विधि
अन्नू नायक रेसिपी बताते हुए कहती हैं कि सबसे पहले मूली भाजी को अच्छी तरह धोकर बारीक काट लिया जाता है. इसके साथ मूली को भी साफ करके छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है. इसके बाद दोनों को एक साथ उबालकर एक्स्ट्रा पानी छान लिया जाता है. यह प्रक्रिया सब्जी को मुलायम बनाने के साथ उसका नेचुरल स्वाद भी बनाए रखती है.

इसके बाद एक कढ़ाई में उबली हुई मूली और मूली भाजी डालकर उसमें मूंगफली का पेस्ट और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है. इस मिश्रण को कुछ देर तक पकने दिया जाता है, जिससे मूंगफली का स्वाद सब्जी में अच्छी तरह घुल-मिल जाता है. पकने के बाद इसे अलग प्लेट में निकालकर रखा जाता है.

छत्तीसगढ़ की लपेटे दार मूली भाजी
अब दूसरी बार कढ़ाई गर्म कर उसमें तेल डाला जाता है. तेल गर्म होने पर सरसों, बारीक कटा लहसुन और हरी मिर्च का तड़का तैयार किया जाता है. इसके बाद पहले से तैयार मूली और मूली भाजी के मिश्रण को इस तड़के में डालकर करीब दो मिनट तक अच्छी तरह चलाया जाता है. इसी प्रक्रिया से तैयार होती है छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लपेटे दार मूली भाजी, जिसका स्वाद खाने वालों को लंबे समय तक याद रहता है.

अन्नू नायक बताती हैं कि पूरी रेसिपी तैयार होने में करीब 30 मिनट का ही समय लगता है. बरसात के मौसम में गरमा-गरम मूली भाजी की सब्जी को चावल, दाल या रोटी के साथ परोसा जाए तो भोजन का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. यही कारण है कि मौसम बदलते ही इस पारंपरिक छत्तीसगढ़ी स्टाइल में मूली भाजी एक बार फिर लोगों की रसोई में अपनी खास जगह बना लेता है.

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Mohd Majid

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