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Besan Meeda Recipe: राजस्थान के धौलपुर क्षेत्र की पारंपरिक रसोई में बनने वाली “बेसन मीड़ा” सब्जी अपने अनोखे स्वाद और देसी अंदाज के लिए काफी मशहूर है. बेसन और छाछ के खास मिश्रण से तैयार होने वाली यह डिश ग्रामीण इलाकों में आज भी बड़े चाव से बनाई जाती है. इसे बनाने के लिए बेसन, छाछ, देसी मसाले और हल्के तड़के का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसका स्वाद बेहद खास बन जाता है. खास बात यह है कि यह रेसिपी कम सामग्री में जल्दी तैयार हो जाती है और पौष्टिक भी मानी जाती है. गर्मागर्म बाजरे या गेहूं की रोटी के साथ इसका स्वाद और बढ़ जाता है.
धौलपुर: राजस्थान की पारंपरिक खानपान संस्कृति अपनी अलग पहचान रखती है. दाल-बाटी, गट्टे की सब्जी और केर-सांगरी जैसे व्यंजन देशभर में प्रसिद्ध हैं. इसी तरह धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बनने वाली “बेसन मीड़ा” की सब्जी भी स्वाद और सेहत के लिए खास मानी जाती है. यह पारंपरिक सब्जी गर्मियों के दिनों में लोगों की पहली पसंद बन जाती है, खासकर तब जब हरी सब्जियों की कमी होती है.
बेसन मीड़ा की सब्जी पूरी तरह बेसन से तैयार की जाती है. सबसे पहले बेसन को अच्छी तरह गूंथकर उसकी छोटी-छोटी गोलियां बनाई जाती हैं. इसके बाद इन गोलियों को मसालों के साथ पकाया जाता है. इस सब्जी की खास बात यह है कि इसमें छाछ का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है. यही देसी तरीका इसे दूसरी सब्जियों से अलग बनाता है.
बेसन मीड़ा बनाने की रेसिपी
ग्रहणी प्रभा शर्मा कहती है यह सब्जी बहुत कम समय में तैयार हो जाती है. करीब 10 मिनट में बनने वाली यह सब्जी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आती है. घर में मेहमान आने पर भी खास तौर पर बेसन मीड़ा की सब्जी बनाई जाती है.
गृहणी प्रभा शर्मा बताती हैं कि सबसे पहले बेसन को छानकर उसमें थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए अच्छी तरह गूंथा जाता है. इसके बाद बेसन की छोटी गोलियां बनाई जाती हैं. फिर प्याज और हरी मिर्च काटी जाती है। गैस पर कढ़ाई रखकर उसमें 4 से 5 चम्मच सरसों का तेल डाला जाता है. तेल गर्म होने के बाद उसमें जीरा डाला जाता है और फिर प्याज व हरी मिर्च को भून लिया जाता है.
इसके बाद स्वादानुसार नमक, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और थोड़ा गरम मसाला डालकर मसाले को अच्छी तरह पकाया जाता है. मसाला तैयार होने के बाद बेसन की गोलियों को कढ़ाई में डालकर हल्का सुनहरा होने तक पकाया जाता है. जब गोलियां सुनहरी हो जाती हैं, तब उसमें थोड़ा पानी और छाछ डाली जाती है. छाछ डालने के बाद करीब 5 मिनट तक लगातार चलाना जरूरी होता है, ताकि छाछ फटे नहीं. इसके बाद सब्जी तैयार हो जाती है.
बेसन मीड़ा की सब्जी लोगों की पसंदीदा पारंपरिक डिश
यह पारंपरिक सब्जी रोटी और पराठे के साथ बड़े स्वाद से खाई जाती है. स्वादिष्ट होने के साथ-साथ इसे स्वास्थ्यवर्धक भी माना जाता है. यही वजह है कि धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में आज भी बेसन मीड़ा की सब्जी लोगों की पसंदीदा पारंपरिक डिश बनी हुई है.
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