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Karauli Famous Sweet: आगरा के पेठे की तरह अब करौली का पारंपरिक पेठा भी अपनी खास पहचान बना रहा है. बूरा-बताशा बाजार में 50 साल से तैयार हो रही यह मिठाई सिर्फ कद्दू और चीनी की चाशनी से बनाई जाती है. शुद्ध स्वाद, सस्ती कीमत और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की वजह से यह स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है.
आगरा की मशहूर मिठाई पेठे का नाम तो आपने सुना होगा, लेकिन करौली के बूरा-बताशा बाजार में तैयार होने वाला पेठा भी अपनी खास पहचान रखता है. यहाँ 50 वर्षों से पारंपरिक तरीके से पेठा बनाया जा रहा है. यह मिठाई एक विशेष प्रकार के कद्दू (पेठा सब्जी) से तैयार की जाती है और लंबे समय तक खराब नहीं होती. स्थानीय लोगों के बीच इसकी काफी मांग रहती है.
इस मिठाई की तासीर ठंडी होती है. गर्मियों के मौसम में इसका सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम करता है. यदि सुबह खाली पेट सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो पेट संबंधी कई समस्याओं में राहत मिल सकती है.
सब्जी से बनने वाली यह मिठाई गर्मियों में 20 से 25 दिनों तक सुरक्षित रहती है, जबकि सर्दियों में एक महीने तक खराब नहीं होती. सिर्फ बरसात के मौसम में नमी अधिक होने के कारण इसके जल्दी खराब होने की संभावना रहती है.
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आज के महंगाई की दौर में भी यह सब्जी से बनने वाली शुद्ध मिठाई बहुत सस्ते रेट पर स्वाद के दीवानों के लिए उपलब्ध हो जाती है. फिलहाल में यह मिठाई 70 से 80 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रही है, जिससे यह आम लोगों की पहुंच में बनी हुई है.
इस पारंपरिक मिठाई की एक और विशेषता इसकी शुद्धता है. इसे तैयार करने में केवल पेठा कद्दू और चीनी की चाशनी का उपयोग किया जाता है. इसमें किसी प्रकार के कृत्रिम रंग या अतिरिक्त सामग्री का प्रयोग नहीं किया जाता. हालांकि इसे बनाने की प्रक्रिया काफी मेहनत और समय मांगती है.
इसे बनाने वाले पुश्तेनी कारीगर जब्बार भाई बताते हैं कि इसे बनाने के लिए सबसे पहले पेठा कद्दू का छिलका हटाकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है. इसके बाद इन टुकड़ों को चूने के पानी में धोकर तैयार किया जाता है, जिससे उनमें आवश्यक कठोरता आती है. फिर इन्हें अच्छी तरह गोदकर चीनी की चाशनी में उबाला जाता है. पर्याप्त समय तक पकाने के बाद इन्हें जमने के लिए रखा जाता है. इसके बाद स्वादिष्ट और पारंपरिक पेठा तैयार होकर बाजार में बिक्री के लिए पहुंच जाता है.