उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में संभागीय परिवहन कार्यालय में वाहन संबंधी काम कराने पहुंचे लोगों से कथित अवैध वसूली के मामले ने अब बड़ा प्रशासनिक रूप ले लिया है। शिकायतों के बाद हुए औचक निरीक्षण में अनियमितताओं के सामने आने पर परिवहन विभाग ने दो एआरटीओ को निलंबित कर दिया है, जबकि आरटीओ प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मामले में कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों समेत कुल 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। इस मामले में कार्रवाई परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के निर्देश पर की गई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर पुलिस उपायुक्त और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी के नेतृत्व में टीम ने संभागीय एवं सहायक परिवहन कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था, इस दौरान टीम ने कार्यालय में मौजूद करीब 50 लोगों से पूछताछ की थी जिसके दौरान जांच में 11 संदिग्ध लोगों को चिन्हित किया गया था जिन पर वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर आवेदकों से अवैध रूप से पैसे लेने का आरोप सामने आया था ।
जांच में मिले 43485 रुपये नकद
कानपुर में RTO में निरीक्षण के दौरान संदिग्ध लोगों के पास से 43485 रुपये नकद बरामद किए गए। इस दौरान जब जांच आगे बढ़ी तो परिवहन कार्यालय के दो लिपिक मधुर मिश्रा और विपिन कुमार की भूमिका भी सामने आई। इसके बाद प्रशासन की ओर से थाना काकादेव में कुल 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई, मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई। प्रथम दृष्टया अनियमितताओं, कार्यालय की निगरानी में लापरवाही और अधीनस्थ कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रखने के आरोप में एआरटीओ प्रवर्तन तृतीय दल सोमलता यादव और एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार को निलंबित किया गया है।
26750 रुपये लिए, रसीद सिर्फ 21750 रुपये की देने का आरोप
औचक निरीक्षण के दौरान एक ट्रक चालक ने जांच टीम को बताया कि कार्यालय के एक कर्मचारी ने उससे 26750 रुपये लिए, लेकिन उसे सिर्फ 21 750 रुपये की जमा पर्ची दी गई। नकद मिलान के दौरान भी टीम को इस तरह की अनियमितता के संकेत मिले। इसके बाद जिलाधिकारी ने निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट परिवहन आयुक्त कार्यालय को भेजी।
RTO प्रशासन को 15 दिन में जवाब देना होगा
इस मामले में आरटीओ प्रशासन राकेन्द्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्हें 15 दिनों के भीतर शासन को अपना स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों की जिम्मेदारी और कार्यालय में कथित अनधिकृत गतिविधियों को लेकर विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
मंत्री बोले – अवैध वसूली और धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि परिवहन कार्यालयों में अनधिकृत लोगों के काम करने पर रोक लगाने के लिए शासन और मुख्यालय स्तर से लगातार निर्देश दिए जाते रहे हैं। इसके बावजूद कानपुर कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से अनधिकृत लोगों द्वारा काम किया जाना गंभीर मामला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और लोगों के साथ धोखाधड़ी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
निलंबित अधिकारी मुख्यालय से संबद्ध
निलंबन की अवधि में सोमलता यादव और आलोक कुमार को परिवहन विभाग के मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। पूरे मामले की विभागीय जांच के लिए उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र), वाराणसी को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
(रिपोर्ट – अनुराग श्रीवास्तव)
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