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गर्मी आते ही बाजार आमों से भर जाते हैं, लेकिन असली स्वाद और सेहत छिपी होती है पेड़ पर प्राकृतिक रूप से पके देसी बीजू आम में. दरभंगा के विशेषज्ञ डॉ. एस.के. सिंह बताते हैं कि गुठली से उगने वाले ये आम बिना रसायनों के पकते हैं, इसलिए ज्यादा पौष्टिक और सुरक्षित माने जाते हैं. इनमें विटामिन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं. इसकी मीठी खुशबू और रस भरा स्वाद इसे खास बनाता है.
दरभंगा : गर्मी की दस्तक के साथ ही आम की मिठास फिज़ाओं में घुल जाती है, लेकिन सबसे खास होते हैं पेड़ पर प्राकृतिक रूप से पूरी तरह पके देसी बीजू आम. ये स्वाद में बेमिसाल तो हैं ही, सेहत के लिए भी किसी औषधि से कम नहीं. इस विषय पर प्रोफेसर (डॉ.) एस.के. सिंह, विभागाध्यक्ष, पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ प्लांट पैथोलॉजी बताते हैं कि आज बाजार में रसायनों से पकाए आम भरे पड़े हैं. ऐसे में पेड़ पर पका बीजू आम शुद्ध पोषण का सबसे सुरक्षित स्रोत है.
बीजू आम क्या है?
बीजू आम कलमी नहीं, बल्कि गुठली से उगे पेड़ पर लगता है. इसकी जड़ें गहरी, स्वाद हर पेड़ का अलग और रासायनिक हस्तक्षेप न के बराबर होता है. गाँव में इसे “देसी आम” कहते हैं. यह स्थानीय जैव विविधता को भी बढ़ाता है.
पहचान कैसे करें?
डॉ. सिंह के अनुसार पेड़ पर पके बीजू आम का रंग प्राकृतिक पीला-सुनहरा होता है. उसमें दूर तक फैलने वाली मीठी सुगंध होती है. डंठल के पास कालापन नहीं होता. फल हल्का नरम, रसभरा होता है और अक्सर पककर खुद गिर जाता है.
पोषण का खजाना
पेड़ पर पके बीजू आम में विटामिन A, C, E, प्राकृतिक शर्करा, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, पोटैशियम और मैग्नीशियम भरपूर मिलते हैं. यह संपूर्ण स्वास्थ्यवर्धक फल है.
7 बड़े फायदे
1. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए: विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट मौसमी बीमारियों से बचाते हैं.
2. पाचन दुरुस्त रखे: फाइबर कब्ज दूर करता है, आंतें साफ रखता है.
3. आँखों के लिए वरदान: बीटा-कैरोटीन रतौंधी से बचाव कर रोशनी बढ़ाता है.
4. त्वचा में निखार: एंटीऑक्सीडेंट कोशिकाओं को बचाकर त्वचा को युवा रखते हैं.
5. तुरंत ऊर्जा दे: प्राकृतिक शर्करा गर्मी की थकान मिटाती है.
6. हृदय को रखे स्वस्थ: पोटैशियम ब्लड प्रेशर नियंत्रित कर हृदय का दबाव कम करता है.
7. तनाव घटाए: सूक्ष्म पोषक तत्व मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं.
वैज्ञानिक तथ्य
डॉ. सिंह कहते हैं कि पेड़ पर पूरी तरह पके फलों में एंजाइम गतिविधि और एंटीऑक्सीडेंट स्तर अधिक होता है. शरीर पोषक तत्व बेहतर तरीके से अवशोषित करता है. वहीं कार्बाइड से पके आम में रसायन अवशेष रह सकते हैं.
सावधानी जरूरी
मधुमेह रोगी सीमित मात्रा में खाएँ. ज्यादा आम न खाएँ. हमेशा साफ, पका फल ही लें. कटे आम को खुला न छोड़ें.
About the Author
7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें