भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। 65 नामों वाली इस टीम में 53 नए चेहरे हैं, जबकि सिर्फ 12 पुराने नेताओं को बरकरार रखा गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की यह टीम सिर्फ मौजूदा चुनावों के लिए नहीं, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यूपी, पंजाब, उत्तराखंड समेत आने वाले विधानसभा चुनाव इस टीम का पहला बड़ा इम्तिहान होंगे। इंडिया टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम कॉफी पर कुरुक्षेत्र में एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा ने वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह, वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर के साथ इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की।
स्मृति ईरानी की वापसी
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि भाजपा की नई टीम में राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष अपने पद पर बने रहेंगे। वहीं राष्ट्रीय महामंत्रियों की टीम में आठ में से सिर्फ विनोद तावड़े और सुनील बंसल को दोबारा जगह मिली है। स्मृति ईरानी की राष्ट्रीय महामंत्री के तौर पर वापसी को नई टीम का सबसे चर्चित फैसला बताया गया है। विश्लेषकों ने कहा कि 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद पार्टी में स्मृति ईरानी की उपयोगिता पर कोई खास असर नहीं पड़ा और अलग-अलग राज्यों के चुनावों में उन्हें लगातार प्रचार की जिम्मेदारी दी जाती रही है। नई टीम में विप्लव कुमार देव, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया को भी राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। कार्यक्रम में बताया गया है कि सुनील बंसल और विनोद तावड़े को संगठन में लगातार प्रदर्शन करने वाले नेताओं के तौर पर जाना जाता है। वहीं विप्लव कुमार देव के संगठनात्मक अनुभव पर भी चर्चा की गई।
क्या और मजबूत टीम की जरूरत थी?
कार्यक्रम में चर्चा के दौरान विश्लेषकों के बीच भाजपा की नई टीम में पीढ़ीगत बदलाव को लेकर भी अलग-अलग राय सामने आई। एक तरफ सवाल उठाया गया कि पार्टी को संगठन में इससे ज्यादा धारदार और मजबूत टीम की जरूरत थी। तो वहीं विश्लेषकों ने पुराने दौर का उदाहरण भी दिया और बताया कि पहले पार्टी नेतृत्व ने प्रमोद महाजन, अरुण जेटली, वेंकैया नायडू और अनंत कुमार जैसे नेताओं को संगठन में तैयार किया, जो आगे चलकर पार्टी के बड़े नेता बने।
कार्यक्रम के दौरान एक्सपर्ट्स ने यह तर्क भी दिया गया कि नई टीम को काम करने का पूरा अवसर दिया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अपेक्षाकृत कम उम्र पर बात करते हुए कहा गया कि उनके साथ बहुत ज्यादा पुराने और भारी-भरकम चेहरों की टीम होती तो अध्यक्ष के लिए अपनी स्वतंत्र कार्यशैली विकसित करना मुश्किल हो सकता था। विश्लेषकों के मुताबिक, अब नए नेताओं के सामने उनके पास खुद को साबित करने का मौका है।
वसुंधरा राजे को लेकर भी चर्चा
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की सूची में राम माधव, वसुंधरा राजे सिंधिया, मनप्रीत बादल, बैजयंती पांडा और तीरथ सिंह रावत जैसे नाम शामिल हैं। कार्यक्रम में राम माधव की वापसी पर चर्चा करते हुए उनके पुराने संगठनात्मक अनुभव और संघ से पार्टी में लौटने की पृष्ठभूमि का जिक्र किया गया। वहीं वसुंधरा राजे को लेकर विश्लेषकों ने सवाल उठाया गया कि उपाध्यक्ष के तौर पर उनकी वास्तविक संगठनात्मक भूमिका क्या होगी। इसके जवाब में उनकी जनाधार और भीड़ जुटाने की क्षमता को पार्टी के लिए काफी फायदेमंद बताया गया है।
पंजाब पर भी नजर
कार्यक्रम के दौरान पंजाब को लेकर भी नई टीम में खास रणनीति दिखाई देने पर चर्चा की गई है। आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए संदीप पाठक को राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने का जिक्र करते हुए विश्लेषकों ने कहा कि बीजेपी पंजाब में उनके पुराने संगठनात्मक और राजनीतिक अनुभव का इस्तेमाल करना चाहती है। कार्यक्रम में पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाए जाने को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। इसके अलावा मीडिया टीम में अनिल बलूनी को बरकरार रखे जाने, नए सह-संयोजकों को जिम्मेदारी दिए जाने और सोशल मीडिया टीम में अमित मालवीय की जगह दीपक मास्के को संयोजक बनाए जाने पर भी चर्चा हुई।
बीजेपी के संगठन में एक बड़ा बदलाव
कार्यक्रम के दौरान विश्लेषकों ने बीजेपी के मीडिया और सोशल मीडिया कम्युनिकेशन सिस्टम को लेकर कहा कि पार्टी को खास तौर पर यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रवक्ताओं को पार्टी का पक्ष रखने के साथ-साथ यह भी पता होना चाहिए कि क्या नहीं बोलना है। कार्यक्रम में चर्चा के दौरान नई टीम को बीजेपी के संगठन में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा गया। इस टीम की असली परीक्षा आने वाले विधानसभा चुनावों और उसके बाद 2029 के लोकसभा चुनाव में होगी।
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(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)