DUSU Election Result 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव की मतगणना में उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने सबको चौंका दिया है। 7वें राउंड की मतगणना के बाद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन 11,347 वोटों के साथ सबसे आगे हैं, जबकि ABVP के इशु मौर्या 5,739 वोटों के साथ दूसरे और NSUI के वीर छत्रथ 1,620 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। शौकीन अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मौर्या से 5,608 वोट आगे चल रहे हैं। इस तरह नंगे पांव चलकर चुनाव प्रचार करने वाले दीपांशु ने ABVP और NSUI, दोनों के कैंडिडेट को काफी पीछे छोड़ दिया है।
4 साल से छात्रों के बीच रहने का दावा
दीपांशु शौकीन का कहना है कि उनका चुनाव लड़ने का मकसद सिर्फ पद हासिल करना नहीं, बल्कि छात्रों की आवाज बनना है। इंडिया टीवी से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि वह पिछले 5 साल से छात्रों के बीच रहे हैं और इसी दौरान उन्हें छात्रों का साथ, समर्थन और प्यार मिला। उनके मुताबिक, यही समर्थन उन्हें लगातार चुनाव लड़ने और छात्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रेरित करता रहा। शौकीन ने कहा कि ABVP और NSUI दोनों बड़े छात्र संगठन हैं और उपाध्यक्ष पद पर दोनों ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इसके बावजूद उन्हें छात्रों के समर्थन पर भरोसा है।
NSUI से टिकट को लेकर क्या बोले?
शौकीन ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी उन्हें ऐसा मंच देती है, जहां वह देशभर के छात्रों की आवाज उठा सकते हैं। दीपांशु से जब NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से टिकट या पद की पेशकश किए जाने के दावे पर सवाल किया गया, तो उन्होंने संगठन के भीतर की प्रक्रिया पर अपनी बात रखी। शौकीन ने दावा किया कि उन पर लगातार दबाव बनाया जाता था और उनसे कहा जाता था कि उनकी गाड़ियां नहीं दिखतीं, उनका माहौल नहीं है और वे चुनाव में पैसा खर्च नहीं कर रहे हैं।
‘मुझे जिम्मेदार ठहराया जाना सही नहीं’
शौकीन ने कहा कि पहले उनसे एक पद पर चुनाव लड़ने की बात कही गई, लेकिन बाद में तीनों प्रमुख पदों के उम्मीदवारों को लेकर बदलाव हुआ। उनके मुताबिक, अध्यक्ष और सचिव पद के उम्मीदवार तय होने के बाद उन्होंने अपना नामांकन वापस लिया। उन्होंने दावा किया कि NSUI से जुड़े 3 अन्य लोग भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। शौकीन ने संगठन की आंतरिक राजनीति को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि इसके लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना सही नहीं है।
जीतने पर छात्रों की आवाज बनने का दावा
अपने विजन के बारे में शौकीन ने कहा कि अगर वह जीतते हैं तो सबसे पहले कैंपस में जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि जो छात्र किसी समस्या का सामना कर रहा है, उसकी आवाज उठाना और उसके अधिकारों के लिए लड़ना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने सत्या निकेतन में हुए हादसे का भी जिक्र किया। शौकीन के मुताबिक, घटना के बाद उन्होंने छात्रों को न्याय और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर अपना ‘न्याय सत्याग्रह’ शुरू किया।
आखिर नंगे पैर क्यों कर रहे हैं प्रचार?
दीपांशु शौकीन चुनाव प्रचार के दौरान नंगे पैर नजर आ रहे हैं। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि सत्या निकेतन की घटना के बाद उन्होंने यह संकल्प लिया। उनके अनुसार, नंगे पैर चलने से होने वाला दर्द उन्हें लगातार उन छात्रों की परेशानियों की याद दिलाता है, जिनकी आवाज वह उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले करीब डेढ़ लाख छात्रों की समस्याओं को वह अपने साथ लेकर चल रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलता, उनका यह सत्याग्रह जारी रहेगा।
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