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Karauli Famous Tinde Sweet Recipe: राजस्थान के करौली में टिंडे से बनने वाली अनोखी मिठाई इन दिनों लोगों को खूब पसंद आ रही है. बड़े बाजार स्थित 70 साल पुराने झंडू मिष्ठान भंडार पर बनने वाली यह मिठाई केवल गर्मियों में 3 से 4 महीने ही मिलती है. पिछले 20 से 25 साल से यह मिठाई करौली में बनती आ रही है. मावा, मेवा और गुलाब की पंखुड़ियों से तैयार यह मिठाई अपने ठंडे स्वाद और खास रेसिपी के कारण आगरा-मथुरा तक मशहूर है. इसकी मांग इतनी ज्यादा है कि लोग पहले से बुकिंग करवाते हैं.
गर्मियों के मौसम में टिंडे की सब्जी तो लगभग हर घर में बनती है लेकिन क्या आपने कभी टिंडे से बनी मिठाई का स्वाद चखा है. राजस्थान के करौली में टिंडे से एक ऐसी खास मिठाई बनाई जाती है जिसका स्वाद लोगों को पहली ही बार में दीवाना बना देता है. यह अनोखी मिठाई शहर की करीब 70 साल पुरानी प्रसिद्ध झंडू मिष्ठान भंडार पर तैयार की जाती है. इस मिठाई की खास बात इसका अनोखा स्वाद और हेल्दी इनग्रेडिएंट्स हैं जो लोगों को बार बार इसे खाने पर मजबूर कर देते हैं और यह स्थानीय पहचान बन चुकी है.
खास बात यह है कि यह मिठाई सालभर नहीं, बल्कि केवल गर्मियों में करीब 3 से 4 महीने ही मिलती है. करौली की इस खास टिंडे की मिठाई की डिमांड सिर्फ स्थानीय लोगों में ही नहीं, बल्कि आगरा और मथुरा तक रहती है. झंडू मिष्ठान भंडार के कन्हैयालाल शर्मा के अनुसार लोग पहले से फोन करके इस मिठाई की बुकिंग तक करवाते हैं. यह मिठाई अपनी अनोखी बनावट और स्वाद के कारण पर्यटकों को भी आकर्षित करती है और लोग इसे खास मौके पर खरीदना पसंद करते हैं. हर साल यहां भीड़ रहती है.
मिठाई बनाने वाले का कहना है कि इस मिठाई को बनाना आसान काम नहीं है. इसमें काफी मेहनत और समय लगता है. एक व्यक्ति पूरे दिन मेहनत करके भी मुश्किल से 5 किलो मिठाई ही तैयार कर पाता है. यही वजह है कि इसकी मांग के मुकाबले पूर्ति कम हो पाती है. इसी कारण यह मिठाई हमेशा सीमित मात्रा में ही उपलब्ध रहती है और लोग इसे पहले से ऑर्डर करके खरीदते हैं. इसकी तैयारी में खास सामग्री और सावधानी की जरूरत होती है जिससे स्वाद और गुणवत्ता बनी रहे. लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है.
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इस अनोखी मिठाई को बनाने के लिए सबसे पहले ताजे टिंडे को अच्छी तरह छील लिया जाता है. इसके बाद टिंडे को अंदर से खाली कर उसका गूदा निकालते हैं. फिर इन्हें मीठे पानी में धीरे-धीरे पकाया जाता है ताकि टिंडा पूरी तरह मुलायम हो जाए. इसके बाद इन्हें ठंडा करके हल्की चीनी की चाशनी में डाला जाता है. इसमें इलायची और केसर डालकर स्वाद को बढ़ाया जाता है और सूखे मेवे भी मिलाए जाते हैं. आखिर में इसे ठंडा करके परोसा जाता है जिससे स्वाद और भी निखर जाता है.
झंडू मिष्ठान भंडार के कन्हैयालाल शर्मा बताते हैं कि टिंडे की मिठाई करीब 20 से 25 सालों से करौली में बनाई जा रही है. इसे तैयार करने के लिए खास तौर पर कच्चे और नरम टिंडे चुने जाते हैं ताकि मिठाई का स्वाद बेहतर रहे. टिंडे का सीजन शुरू होते ही इसकी तैयारी भी शुरू हो जाती है और गर्मियों में इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है. खास स्वाद और पारंपरिक विधि के कारण यह मिठाई करौली की पहचान बन चुकी है. दूर-दूर से लोग इसे खरीदने के लिए यहां पहुंचते हैं और बुकिंग भी करवाते हैं.
जब टिंडा अच्छी तरह पककर तैयार हो जाता है तब उसमें मावा, मेवा और गुलाब की पंखुड़ियों का स्वादिष्ट मिश्रण भरा जाता है. इसके बाद उसे सावधानी से बंद करके ठंडा किया जाता है ताकि अंदर का स्वाद अच्छी तरह जम जाए. फ्रिज में कुछ देर रखने के बाद इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है और मिठाई खाने में बेहद मुलायम लगती है. खास खुशबू और अनोखे स्वाद के कारण यह मिठाई लोगों को खूब पसंद आती है. गर्मियों में इसकी मांग लगातार बनी रहती है और लोग दूर-दूर से इसे खरीदने पहुंचते हैं.
टिंडे की मिठाई की सबसे बड़ी खासियत इसका ठंडापन और हल्का स्वाद है. गर्मियों में ठंडी-ठंडी यह मिठाई लोगों को बेहद पसंद आती है और गर्मी से राहत का एहसास कराती है. इसमें इस्तेमाल होने वाला मावा, मेवा और गुलाब की खुशबू इसके स्वाद को और खास बना देती है. जो भी व्यक्ति एक बार इसका स्वाद चख लेता है वह बार-बार इसे खाने की इच्छा जरूर करता है. यही वजह है कि करौली की यह अनोखी मिठाई स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों में भी काफी लोकप्रिय हो चुकी है.
राजस्थान के करौली में इस खास मिठाई को बनाने वाले कुछ चुनिंदा और प्रसिद्ध हलवाई ही हैं जो इसे पारंपरिक और खास रेसिपी से तैयार करते हैं. करौली के बड़े बाजार स्थित झंडू मिष्ठान भंडार पर मिलने वाली यह अनोखी मिठाई करीब 400 रुपये किलो बिकती है. गर्मियों के मौसम में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है और दूर-दूर से लोग इसे खरीदने पहुंचते हैं. करौली आने वाले पर्यटक भी इस खास मिठाई का स्वाद लेना नहीं भूलते. अपने ठंडे स्वाद, हल्की मिठास और अनोखे अंदाज के कारण यह मिठाई अब करौली की खास पहचान बन चुकी है.