आपने सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ तो देखा ही होगा. अक्सर इस सीरियल में सोसायटी के मर्द ‘पार्टी-शार्टी’ करने की जब भी प्लानिंग करते हैं, कोई न कोई अड़चन आ ही जाती है. क्योंकि उन्हें ये पार्टी छिपकर करनी पड़ती है. लेकिन एक देश ऐसा भी है, जहां अपने ऑफिस के को-वर्कर के साथ या क्लाइंट के साथ ‘पार्टी-शार्टी’ करना उसकी ‘लॉयेलिटी’ की सौगात मानी जाती है. बढ़ते कॉर्पोरेट कल्चर और काम के स्ट्रैस के चलते ऑफिस के दोस्तों के साथ पार्टी करना भारत में भी आम बात है. लेकिन हम जिस देश की बात कर रहे हैं, वहां तो आपके प्रमोशन भी इस बात पर निर्भर करते हैं कि आपने बॉस के साथ कितने जाम छलकाए हैं… अरे नहीं-नहीं अभी से अपना पासपोर्ट ढूंढने मत लग जाइए, पहले उस देश का नाम और इस कल्चर के बारे में पूरी तरह जान तो लीजिए. ,
ये देश है जापान और यहां की इस ट्रेडिशनल ड्रिंकिंग पार्टी का नाम है नोमिकाई. जापान की ये नोमिकाई अक्सर ऑफिस, स्कूल, क्लब या सोशल ग्रुप में आयोजित की जाती है. ये जापानी शब्द 2 शब्दों से मिलकर बना है, नोमी यानी पीना और काई मतलब सभा/मिलन. तो नोमिकाई का मतलब है ‘पीने की पार्टी’. जापान की इस नोमिकाई के लिए वहां स्पेशल पब-रेस्तरां भी बने हैं, जिन्हें ‘इजाकाया’ कहा जाता है. दरअसल जापान में इस तरह की ड्रिंकिंग पार्टीज को कंपनी के प्रति वफादारी के रूप में देखा जाता है.
ऑफिस में फॉर्मल माहौल में जो बातें नहीं हो पातीं, वो इन पार्टीज में खुलकर होने लगती हैं.
नोमिकाई में जाना है तो सीख लें कांपाई
इन इजाकाया में बीयर, साके, शोचू और छोटे-छोटे जापानी स्नैक्स सर्व किए जाते हैं. अब इतना सीख लिया तो चलिए आपको थोड़ा और इस कल्चर के बारे में बताते हैं. इस पार्टी की शुरुआत कांपाई! यानी चीयर्स! से होती है. अपने सीनियर्स या बॉस के लिए ग्लास भरना, दूसरों को पहले परोसना, और ग्रुप हार्मनी बनाए रखना, ये सब इस पार्टी के अहम और जरूरी नियमों में आता है.
जरूरी नोमिकाई, नॉन ड्रिंकर्स के लिए बनजाती है मुसीबत
जापानी वर्क कल्चर में एक खास शब्द है, नोम्युनिकेशन यानी नोमी (पीना) + कम्युनिकेशन. ऑफिस में फॉर्मल माहौल में जो बातें नहीं हो पातीं, वो इन पार्टीज में खुलकर होने लगती हैं. माना जाता है कि इनसे टीम के बीच भरोसा बढ़ता है. इसका एक फायदा और है. जापान की सोसायटी में जूनियर-सीनियर के बीच का भेद बहुत ज्यादा है. जूनियर अपने सीनियर्स से सीधे बात करने में अक्सर झिझकते हैं. लेकिन ये नोमिकाई का रिलैक्स्ड माहौल और हल्का-हल्का सुरूर इस फॉर्मलिटी को ढीला कर देता है.
लेकिन जहां इसके फायदे हैं, वहीं जो लोग ड्रिंक नहीं करते, या ऐसे अपने कलीग्स के साथ सिर्फ ‘दोस्ती’ बढ़ाने के लिए ऐसी पार्टीज में नहीं जाते, उन्हें इसकी मुआवजे भी भुगतने पड़ते हैं. जापान में ऐसी नोमिकाई में शामिल होना अक्सर लगभग अनिवार्य सा ही माना जाता है. ऐसे में भले ही आपका मन न हो, फिर भी यहां शामिल होना एक मजबूरी हो जाती है. जो लोग नहीं आते, उन्हें कभी-कभी टीम से अलग-थलग या प्रमोशन से भी हाथ धोना पड़ता है. हाई स्ट्रैस वाले जापानी वर्क कल्चर में ये नोमिकोई जहां काफी सुकून भरा है, तो कभी-कभी एक मजबूरी भी बन जाता है.
Gen Z बदल रहा है ओल्ड-स्कूल के नियम
हालांकि Gen Z ने जैसे दुनियाभर में बदलाव दिखाएं है, जापान भी उससे अच्छूता नहीं है. नई पीढ़ी इस नोमिकाई को ‘जबरदस्ती का सौदा’ नहीं साबित होने दे रही. आंकड़े पहले ही बता रहे हैं कि जेन ज़ी ने शराब से दूरी बनाई है. ऐसे में जापान में भी कई लोग अल्कोहल-फ्री विकल्प चुन रहे हैं, या इसी पार्टी को ऑप्शनल बना रहे हैं. हालांकि ट्रेडिशनल जापानी कंपनियों में ये पार्टीज आज भी बिजनेस रिलेशनशिप का अहम हिस्सा है.
जापान के ताजा ट्रेंड बताते हैं कि 60% से ज्यादा जापानी युवा महीने में एक बार से कम शराब पीते हैं.
जापान के ताजा ट्रेंड बताते हैं कि 60% से ज्यादा जापानी युवा (20-29 वर्ष) महीने में एक बार से कम शराब पीते हैं. जबकि 44% युवा तो बिल्कुल भी शराब नहीं पीते. इसका सीधा असर नोमिकाई पर पड़ रहा है. कई युवा अल्कोहल-फ्री विकल्प या बिना शराब की मीटिंग्स पसंद करते हैं. साथ ही अब उन्हें जबरदस्ती वाले नोमिकाई भी पसंद नहीं आ रहीं. 62% युवा कर्मचारी कहते हैं कि मैंडेटरी ड्रिंकिंग इवेंट्स उन्हें बोझ लगते हैं. Gen Z इन सिर्फ ‘दारू पार्टियों’ के बजाए सीखने वाले या टीम बॉन्डिंग वाले नोमिकाई इवेंट्स का सपोर्ट कर रहे हैं.
दरअसल नई पीढ़ी इन जापानी ‘नोमिकाई’ को बंद नहीं कर रही बल्कि इन्हें बदल रही है. युवा अब पर्सनल टाइम, हेल्थ और फाइनेंशियल कॉस्ट को ज्यादा समझ रहे हैं.