लोकसभा में पिछली बार पेश किए गए परिसीमन बिल में अगर तीन बदलाव किए जाते हैं तो द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) बदले हुए स्वरूप में इस बिल का समर्थन कर सकती है। DMK की ये 3 शर्तें ऐसे समय में सामने आई हैं, जब केंद्र सरकार विधेयक के लिए जरूरी समर्थन जुटाने के मकसद से विपक्षी दलों से संपर्क बढ़ा रही है।

बता दें कि परिसीमन बिल को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक सरकार 15 अगस्त के बाद संसद का विशेष सत्र बुला सकती है

परिसीमन बिल पर DMK का रुख साफ

नरेंद्र मोदी सरकार नए सिरे से परिसीमन (delimitation) की प्रक्रिया के लिए संविधान संशोधन बिल लाने की संभावना पर विचार कर रही है। ऐसे में, DMK समर्थन देने पर विचार कर सकती है, अगर सरकार अप्रैल में लोकसभा में पेश किए गए बिल में तीन जरूरी बदलाव करके कानून में संशोधन करती है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक DMK ने सरकार के सामने कुछ शर्त रखी हैं।

क्या हैं वो 3 शर्तें?

  1. पार्टी की पहली शर्त ये है कि जनगणना के आधार पर सीटों की संख्या पर लगी रोक अगले 25 साल तक जारी रहे। अभी राज्यों की लोकसभा सीटें 1971 की जनगणना के आधार पर तय हैं। ये व्यवस्था 2027 की जनगणना के बाद खत्म हो जाएगी। DMK चाहती है कि इसे 25 साल और बढ़ाया जाए।
  2. नए बिल में सभी राज्यों के लिए लोकसभा की सीटों में 50 फीसदी की एक समान बढ़ोतरी की जाए।
  3. DMK की तीसरी शर्त ये है कि नया कानून पेश किए जाते समय तमाम संशोधित सीटों की लिस्ट भी प्रकाशित की जानी चाहिए। DMK चाहती है कानून में साफ-साफ बताया जाए कि किस राज्य को कितनी सीटें मिलेंगी यानि बिल में हर राज्य की सीटों की संख्या पहले से लिखी जाए।

अमित शाह ने क्या वादा किया था?

1971 की जनगणना के आधार पर सीटों की संख्या पर लगी रोक, 2027 में पूरी होने वाली नई जनगणना के बाद खत्म हो जाएगी। DMK चाहती है कि यह संवैधानिक रोक अगले 25 सालों तक बनी रहे और साथ ही संविधान में संशोधन करके सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50% की एकसमान बढ़ोतरी की जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल में संसद में परिसीमन से जुड़ा बिल पेश करते समय मौखिक रूप से ऐसा करने का वादा किया था।

इसके अलावा, DMK के सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चाहती है कि लेजिस्लेटिव पैकेज (विधायी पैकेज) में हर राज्य के लिए सीटों की संख्या की एक लिस्ट हो। पार्टी का कहना है कि वह बिल का स्वरूप और उसमें क्या-क्या शामिल है, यह पता चलने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेगी।

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