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Mithila Ghorjaur Recipe: घोरजौर (Ghorjaur) मिथिला और संपूर्ण बिहार का एक अत्यंत पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजन है. कई लोग इसे ‘घोरजौर खीर’ भी कह देते हैं, लेकिन यह मीठी खीर नहीं, बल्कि दही-मट्ठे चावल से बनी एक नमकीन डिश है. जो दिखने में कुछ हद तक खीर की तरह लगती है, लेकिन इसका स्वाद अलग होता है. आइये जानते हैं इसकी रेसिपी के बारे में.
अगर आप पारंपरिक खाने-पीने के शौकीन हैं और आप देसी स्वाद लेना चाहते हैं तो मिथिलांचल इसके लिए सबसे उचित जगह है. आज आपको मिथिलांचल के एक डिश जो पारंपरिक व्यंजन में शामिल है, जिसमें हाथों की घोर करने से स्वाद बढ़ जाती है.
घोरजौर की रेसिपी दिखने में खीर की तरह होती है, लेकिन इसका स्वाद नमकीन और खट्टा- मीठा होता है. जिसे सब्जी के साथ खाई जाता है. कभी-कभी लोग इसे अपने घर में बनाते हैं. इसे विशेष रूप से पंचमी के समय या सावन के महीने बनाया जाता है.
घोरजौर बनाने के लिए चावल को धोकर उबलते पानी में पकाते हैं. जब आधा पक जाए फिर उसमें बहुत सारा दही को मेरिनेट कर डालते हैं. फिर इसमें स्वादाअनुसार नमक, थोड़ी चीनी डालते और पकाते हैं. जैसे ही घोरजौर बनकर तैयार हो जाए तब इसके स्वाद को दो गुना बढ़ाने की जरूरत है.
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तड़का में इसमें तेल ,जीरा, सुखी लाल मिर्च और तेज पत्ता का तड़का लगाते हैं. जहां बने घोरजौर को सब्जी के साथ परोसा जाता है. जैसे खीर में दूध चीनी और ड्रायफ्रूट की मात्रा होती है. वैसे ही घोरजौर में दही , नमक और तड़का लगाना होता है.
मिथिलांचल में घोरजौर बनाने के लिए ताजी दही नहीं, बल्कि खट्टी दही का उपयोग होता है, दो दिन पहले ही जमी दही ज्यादा अच्छी स्वाद देती है. इसके अलावा मट्ठे से भी घोरजौर बनाई जाती है. ऐसे में अगर देसी व्यंजन खानें का मन है तो एक बार आप भी 15-20 मिनट वाली इस रेसिपी को जरूर ट्राई करें.