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छपरा शहर के हथुआ मार्केट में एक ऐसी लस्सी मिलती है, जिसका स्वाद लोगों को सीधे गांव की शुद्धता और पुरानी यादों से जोड़ देता है. दयानंद राय की यह मशहूर दुकान 1974 से लगातार अपनी गुणवत्ता और मिठास के लिए जानी जाती है. शुद्ध दूध से तैयार दही, उसमें मिलाए गए खोआ, काजू और केसर का अनोखा मिश्रण और कुल्हड़ में परोसने का पारंपरिक अंदाज इसे खास बनाता है. आज के दौर में जहां लोग केमिकल युक्त पेय पदार्थों से दूर रहना चाहते हैं, वहां यह लस्सी स्वाद के साथ सेहत का भी भरोसा देती है.

छपरा शहर की हलचल भरी व्यस्तता के बीच एक ऐसा स्वाद आज भी सुरक्षित है, जो हमें सीधे गांव की शुद्धता और पुरानी यादों से जोड़ देता है. हम बात कर रहे हैं छपरा के हथुआ मार्केट स्थित दयानंद राय की मशहूर लस्सी की, जिसकी ख्याति न केवल शहर में, बल्कि जिले के सुदूर कोनों तक फैली हुई है.

1974 में दयानंद राय के पिता द्वारा शुरू की गई यह दुकान आज दूसरी पीढ़ी के हाथों में है, लेकिन इसकी खासियत आज भी वही पुरानी है. शुद्धता और मिठास का बेजोड़ संगम.

बदलते दौर में जब बाजार कृत्रिम कोल्ड ड्रिंक्स और केमिकल युक्त पेय पदार्थों से भरा पड़ा है, दयानंद राय की लस्सी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प बनकर उभरी है.

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इस लस्सी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निर्माण प्रक्रिया है. यहां उपयोग होने वाला दूध सीधे ग्रामीण क्षेत्रों से लाया जाता है, जिसे दुकान पर ही दही में परिवर्तित किया जाता है. कोल्ड ड्रिंक्स के विपरीत, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाते हैं, यहां की दही से बनी लस्सी शरीर को ठंडक और पोषण दोनों प्रदान करती है.

दयानंद राय बताते हैं कि वे अपनी लस्सी में भरपूर मात्रा में खोआ, काजू, किशमिश, चेरी और केसर का मिश्रण डालते हैं, जो इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है. ग्राहकों के सामने ताजी लस्सी तैयार करना और उसे मिट्टी के कुल्हड़ों में परोसना, इस दुकान की एक ऐसी पहचान बन चुकी है जो लोगों के मन में गहरा विश्वास जगाती है.

दयानंद राय का मानना है कि उनकी सफलता के पीछे केवल सामग्री का मिश्रण नहीं, बल्कि उसमें मिलाया गया ‘प्यार’ है. ग्राहकों का तांता यहां हमेशा लगा रहता है, और पर्व-त्योहारों के सीजन में तो बिक्री इतनी बढ़ जाती है कि उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है.

लोग न केवल दुकान पर बैठकर इसका आनंद लेते हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक इस स्वाद को अपने घरों तक ले जाने के लिए पहुंचते हैं. पांच दशकों से चला आ रहा यह सिलसिला आज भी अपनी गुणवत्ता पर कायम है, जो साबित करता है कि यदि ईमानदारी और शुद्धता के साथ कोई काम किया जाए, तो वह समय के साथ और भी लोकप्रिय होता जाता है.

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