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Monsoon Special Food Recipe: मानसून का मौसम आते ही गरमा-गरम और स्वादिष्ट व्यंजनों की याद सबसे पहले आती है. ऐसे में बूंदी कढ़ी एक बेहतरीन विकल्प है, जो स्वाद के साथ सुकून भी देती है. बेसन, दही और मसालों से तैयार की जाने वाली यह पारंपरिक डिश कुरकुरी बूंदी के साथ और भी लाजवाब लगती है. गर्मागर्म कढ़ी को चावल, बाजरे की रोटी या फुल्के के साथ परोसा जाए तो इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. बारिश की ठंडी फुहारों के बीच यह देसी व्यंजन न सिर्फ भूख मिटाता है, बल्कि पूरे परिवार के साथ खाने का आनंद भी दोगुना कर देता है.
जोधपुर: मानसून की शुरुआत होते ही मौसम सुहाना हो जाता है और घर में कुछ गरमागरम, चटपटा और देसी खाने का मन करने लगता है. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे राजस्थान से जुड़ी एक खास और यूनिक रेसिपी ‘बादल-बूंदी कढ़ी’, जिसे आप बारिश के मौसम में आसानी से अपने घर पर बना सकते हैं. इसमें बेसन की मुलायम बूंदी को खट्टी-मीठी मसालेदार कढ़ी में पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद बेहद खास और पारंपरिक बन जाता है. इसे बनाने के लिए बेसन, दही, हल्के मसाले और तड़के की जरूरत होती है.
बूंदी कढ़ी’ बनाने के लिए सबसे पहले बेसन में थोड़ा नमक, लाल मिर्च और पानी डालकर गाढ़ा घोल तैयार किया जाता है। इसके बाद कढ़ाही में तेल गर्म कर छोटे-छोटे बूंदी के पकौड़े सुनहरे और हल्के कुरकुरे होने तक तल लिए जाते हैं.अब एक बर्तन में दही और बेसन को अच्छी तरह फेंटकर उसमें पानी मिलाया जाता है। कढ़ाही में तेल या घी गर्म कर जीरा, राई, हींग, सूखी लाल मिर्च और करी पत्ते का तड़का लगाया जाता है। इसमें दही-बेसन का घोल डालकर लगातार चलाते हुए पकाया जाता है, ताकि कढ़ी में गांठ न पड़े. जब कढ़ी अच्छी तरह पककर हल्की गाढ़ी हो जाए, तो इसमें तैयार बूंदी डालकर कुछ मिनट धीमी आंच पर पकाया जाता है। ऊपर से देसी घी का तड़का, लाल मिर्च और हरा धनिया डालने से इसकी खुशबू और स्वाद दोनों ही बढ़ जाते हैं.
चावल से लेकर बाजरे की रोटी तक के साथ बढ़ाएगी स्वाद
बारिश के सुहाने मौसम में गरमा-गरम बूंदी कढ़ी का स्वाद और भी खास हो जाता है.इसे आप जीरा राइस, सादे चावल या फिर गरमा-गरम बाजरे की रोटी के साथ परोस सकते हैं. कढ़ी की खट्टी-खट्टी ग्रेवी और बूंदी का मुलायम स्वाद इसे एकदम देसी और खास बना देता है. ऊपर से डाला गया घी का तड़का इसकी खुशबू को इतना बढ़ा देता है कि रसोई से ही हर किसी का मन खाने को ललचा उठता है. मानसून में परिवार के साथ बैठकर गरमा-गरम ‘बादल-बूंदी कढ़ी’ का आनंद लेना अपने आप में राजस्थानी स्वाद का एक अलग ही अनुभव है.
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