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Aam Ka Gudamma: गर्मियों के मौसम में जब उत्तर भारत के घरों में कच्चे आमों की भीनी खुशबू महकने लगती है, तब अवध और पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक ‘आम का गुड़म्मा’ हर थाली की शान बन जाता है. गुड़ की नेचुरली मिठास और कच्चे आम की लाजवाब खटास का यह अद्भुत देसी कॉम्बिनेशन न केवल स्वाद में बेजोड़ है, बल्कि गर्मियों में पेट को ठंडक पहुंचाने का एक बेहतरीन पारंपरिक जरिया भी है. आइए, व्यंजन एक्सपर्ट सविता श्रीवास्तव से जानते हैं कि बेहद सीमित सामग्री के साथ इस पारंपरिक और सदाबहार डिश को घर पर कैसे आसानी से तैयार किया जा सकता है.
आम का गुड़म्मा अपने अनोखे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. इसमें गुड़ की मिठास और आम की हल्की खटास का अद्भुत मेल होता है. कई लोग इसमें हल्की चीनी का भी इस्तेमाल करते हैं. एक बार स्वाद लेने पर इसका देसी जायका लंबे समय तक याद रहता है. गुड़ की नेचुरली मिठास इसे सामान्य मिठाइयों से अलग बनाती है. गर्मियों में ठंडा करके खाने पर इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. गांव के लोग इसे रोटी, पूड़ी और सीधे कटोरी में परोसकर खाते हैं.
गांवों में आम का गुड़म्मा केवल एक व्यंजन नहीं बल्कि गांव की परंपरा का हिस्सा माना जाता है. पहले जब बाजार में तरह-तरह की मिठाइयां उपलब्ध नहीं थीं, तब घरों में इसी तरह के देसी पकवान बनाए जाते थे. महिलाएं गर्मियों में इसे बड़े प्रेम से तैयार करती थीं। परिवार के सभी सदस्य इसका आनंद लेते थे. आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में यह परंपरा जीवित है. यह व्यंजन स्थानीय खानपान और सांस्कृतिक विरासत की पहचान माना जाता है.
ग्रामीण योगेश कहते हैं कि आम का गुड़म्मा स्वाद, परंपरा और सरलता का अद्भुत संगम है. सीमित सामग्री और आसान विधि से तैयार होने वाला यह व्यंजन गर्मियों की विशेष सौगात माना जाता है.<br />इसकी मिठास और खटास का संतुलन हर उम्र के लोगों को पसंद आता है. आज के समय में भले ही कितनी महंगी और स्वादिष्ट मिठाइयां ना आ गई है लेकिन इसका स्वाद अलग अनुभव देता है.
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आम का गुड़म्मा बनाने वाली सविता श्रीवास्तव लोकल 18 से बताती हैं कि आम का गुड़म्मा उत्तर भारत, विशेषकर अवध और पूर्वांचल क्षेत्र का एक पारंपरिक व्यंजन है. इसे कच्चे और हल्के पके आम और गुड़ से तैयार किया जाता है. गर्मी के मौसम में जब आम की पैदावार होती है, तब घरों में यह बनाया जाता है. इसका स्वाद मीठा, हल्का खट्टा और बेहद लाजवाब होता है. पहले गांवों में मेहमानों के स्वागत और विशेष अवसरों पर आम का गुड़म्मा परोसा जाता था.
व्यंजन एक्सपर्ट सविता आगे बताते हैं कि आम का गुड़म्मा बनाने के लिए ज्यादा सामग्री की आवश्यकता नहीं होती है. इसके लिए लगभग आधा किलो कच्चे या अधपके आम, 250 ग्राम गुड़, थोड़ा पानी और स्वाद के हिसाब से सौंफ और इलायची ली जा सकती है.कुछ लोग इसमें थोड़ा सा काला नमक भी मिलाते हैं जिससे स्वाद और बढ़ जाता है.
इसके लिए सबसे पहले आमों को अच्छी तरह धोकर उनका छिलका उतार लेना चाहिए.इसके बाद आम को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है. यदि आम बहुत खट्टा हो तो उसके बीज अलग कर देना चाहिए. कटे हुए आम को साफ बर्तन में रखा जाता है ताकि आगे की प्रक्रिया आसानी से की जा सके. आम की क्वालिटी जितनी अच्छी होगी, गुड़म्मा का स्वाद भी उतना ही बेहतर बनेगा. इसलिए ताजे और रसदार आमों का चयन करना चाहिए.
इसके बाद इसे एक बर्तन में थोड़ा पानी डालकर गुड़ को गर्म करना चाहिए. गुड़ धीरे-धीरे पिघलकर गाढ़ी चाशनी का रूप ले लेता है. चाशनी बनाते समय उसे कलछुल से लगातार चलाना चाहिए ताकि वह नीचे से जलने न पाए. और अगर गुड़ में कोई कमी हो तो उसे छान लेना चाहिए. चाशनी बहुत अधिक पतली और गाढ़ी नहीं होनी चाहिए.
जब चासनी तैयार हो जाय तो चाशनी में कटे हुए आम के टुकड़े डाल देना चाहिए. इसके बाद मिश्रण को धीमी आंच पर पकाना चाहिए. पकते समय आम धीरे-धीरे नरम होने लगता है और गुड़ का स्वाद उसमें समा जाता है. बीच-बीच में चलाते रहने से मिश्रण समान रूप से पकता रहता है. लगभग 15 से 20 मिनट में यह गाढ़ा होकर तैयार हो जाता है. उसके बाद इसमें आप चाहें तो सौंफ और इलायची डालकर इसकी खुशबू और स्वाद को और अधिक बढ़ा सकते हैं.