सीकर. अप्रैल के महीने से भीषण गर्मी का दौर शुरू हो जाता है. इस मौसम में शरीर को ठंडक देने वाली चीजें बहुत पसंद आती है. राजस्थान में भीषण गर्मी में आज भी पुराने समय के देसी उपाय अपनाए जाते हैं. उन्हीं में से एक खास ड्रिंक है राबड़ी, जो पीढ़ियों से लोगों की जिंदगी का हिस्सा रही है. जब न फ्रिज थे और न ही कोल्ड ड्रिंक का चलन, तब लोग प्राकृतिक तरीकों से ही गर्मी से राहत पाते थे. राबड़ी उसी परंपरा का एक अहम हिस्सा रही है, जिसे सुबह पीकर दिनभर शरीर को ठंडा और तरोताजा रखा जाता था.

गांवों में आज भी बुजुर्ग बताते हैं कि पहले के समय में खेतों में काम करने वाले लोग राबड़ी पीकर ही लू और तेज धूप से खुद को बचाते थे. यह केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि गर्मी से लड़ने का एक पारंपरिक व्यंजन. इसकी तासीर ठंडी होती है, जो शरीर के तापमान को संतुलित बनाए रखती है. यही वजह है कि यह व्यंजन समय के साथ आज भी अपनी खास पहचान बनाए हुए है और लोगों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है.

बाजरे या जौ की घाट से बनती है राबड़ी

महिला सहायता समूह की सुनिता ने राबड़ी बनाने की विधि बेहद आसान और घरेलू बताई है, जिसे कोई भी आसानी से तैयार कर सकता है. इसके लिए सबसे पहले बाजरे या जौ की घाट तैयार करना है. और उसे साफ करके पानी में उबालने के लिए चढ़ा दिया जाता है. जब य अच्छी तरह पक जाता है, तब उसमें थोड़ा और आटा मिलाकर उसे गाढ़ा किया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बनावट दोनों बेहतर हो जाते है. इसकी सबसे खास बात यह है कि इस चूल्हे पर हांडी में बनाया जाता है जिससे इसमें मिट्टी व चूल्हे की खुशबू इसे और भी स्वादिष्ट बना देती है.

इसके बाद इस तैयार घाट को रातभर के लिए ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है. सुबह यह हल्का खट्टा और ठंडा हो जाता है, जिसे छाछ मे मिलाकर पिया जाता है. कुछ लोग इसमें नमक या जीरा डालकर स्वाद को और बढ़ा देते हैं. यह व्यंजन जितना सरल है, उतना ही फायदेमंद भी है, खासकर गर्मियों में यह शरीर को तुरंत राहत देने का काम करता है.

सेहत के लिए भी है फायदेमंद

राबड़ी न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होती है. हेल्थ एक्सपर्ट् डॉ. प्रिया वर्मा ने बताया कि यह शरीर को अंदर से ठंडक प्रदान करती है और लू से बचाने में मदद करती है. गर्मियों में जब शरीर में पानी की कमी होने लगती है, तब राबड़ी उसे संतुलित बनाए रखने में सहायक होती है. इसके नियमित सेवन से शरीर हाइड्रेट रहता है और थकान भी कम महसूस होती है. इसके अलावा राबड़ी पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी होती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व पेट को ठंडा रखते हैं और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं. यह शरीर को एनर्जी देने के साथ-साथ दिनभर एक्टिव बनाए रखती है. यही कारण है कि आज भी गांवों में लोग इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर रखते हैं और गर्मी में इसे बेहद पसंद करते हैं.

महिलाओं को मिल रहा रोजगार

यह पारंपरिक पेय राबड़ी केवल घरों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि बाजार में भी अपनी पहचान बना रहा है. सीकर के अल्बर्ट ग्राउंड में लगे मेले में इसकी स्टॉल लगाई गई है, जहां महिलाएं इसे तैयार कर लोगों तक पहुंचा रही हैं. इससे न केवल इस परंपरा को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि महिलाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं. सरकार भी ऐसे पारंपरिक व्यंजनों को बाजार तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.



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