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Deoghar Best Place To Eat Non-Veg: देवघर में कृषि विज्ञान केंद्र के सामने बिरला इलाके के मिनी ढाबे सस्ते देसी स्टाइल चिकन मटन के लिए मशहूर हैं. यहां वीकेंड पर भारी भीड़ होती है. अगर शहर में किसी ऐसी जगह की तलाश है जहां सुकुन और स्वाद साथ-साथ मिले तो यहां आ सकते हैं.

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देवघर. कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें चिकन और मटन खाने का बेहद शौक होता है, लेकिन घर में जगह की कमी, समय का अभाव या अन्य पारिवारिक कारणों की वजह से वे अपनी पसंद का नॉनवेज खाना नहीं बना पाते. कई लोग बाहर महंगे रेस्टोरेंट में हजार रुपये फूंक कर चले आते हैं. लेकिन ऐसे लोगों के लिए देवघर में एक ऐसी खास जगह मौजूद है, जो धीरे-धीरे नॉनवेज प्रेमियों की पसंदीदा डेस्टिनेशन बन चुकी है. यहां लोग दूर-दूर से सिर्फ चिकन और मटन का स्वाद लेने पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों के बीच यह इलाका बिरला के नाम से काफी मशहूर है.

मुख्यालय से 16 किलोमीटर दूर है यह जगह
देवघर मुख्यालय से करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य गेट के सामने सड़क किनारे कई छोटी-छोटी दुकानें और ढाबे संचालित होते हैं. देखने में भले ही ये दुकानें साधारण लगती हों, लेकिन यहां मिलने वाले चिकन और मटन का स्वाद लोगों को बार-बार खींच लाता है. खास बात यह है कि यहां ग्राहक के ऑर्डर के अनुसार ताजा चिकन और मटन तैयार किया जाता है. अगर कोई व्यक्ति पहले से फोन कर देता है, तो महज आधे घंटे के भीतर उसका ऑर्डर तैयार मिल जाता है. यही सुविधा इस जगह को और भी खास बनाती है.

150 रुपये में एक किलो चिकन तैयार
यहां दुकान संचालित करने वाले शुभम मंडल ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि उनके पास देवघर शहर ही नहीं बल्कि जिले के विभिन्न प्रखंडों और गांवों से भी लोग आते हैं. कई ग्राहक ऐसे हैं जो हर सप्ताह यहां पहुंचते हैं. शुभम के अनुसार, यहां चिकन बनाने का शुल्क लगभग 150 रुपये प्रति किलो लिया जाता है. कम कीमत में स्वादिष्ट और ताजा भोजन मिलने के कारण लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है. आज के समय में जहां होटल और रेस्टोरेंट में चिकन-मटन खाने पर काफी खर्च करना पड़ता है, वहीं यहां लोग अपनी पसंद के अनुसार कम बजट में भरपूर स्वाद का आनंद ले सकते हैं.

देसी स्टाइल में बनाया जाता है चिकन
ढाबों पर बनने वाले चिकन और मटन की खासियत इसका देसी स्वाद है. यहां मसालों का ऐसा संतुलन रखा जाता है कि खाने वाला उंगलियां चाटता रह जाए. कई लोग अपने साथ कच्चा चिकन लेकर आते हैं और अपनी पसंद के मसालों और घी या सरसों तेल के साथ बनवाकर ले जाते हैं. वहीं कुछ लोग ढाबे पर बैठकर दोस्तों के साथ खाने का आनंद लेते हैं. ग्रामीण माहौल, खुली हवा और सड़क किनारे बैठकर गर्मागर्म चिकन खाने का अनुभव लोगों को अलग ही सुकून देता है.

शनिवार और रविवार को उमड़ती है भीड़
शाम होते-होते यहां का नजारा पूरी तरह बदल जाता है. ढाबों के सामने ग्राहकों की भीड़ जुटने लगती है और कई बार ऑर्डर की लंबी लाइन भी लग जाती है. हालांकि सप्ताह के अन्य दिनों में भी लोगों की अच्छी खासी भीड़ रहती है, लेकिन शनिवार और रविवार को यहां सबसे अधिक रौनक देखने को मिलती है. इसकी एक बड़ी वजह पुनासी डैम और आसपास के पर्यटन स्थल हैं. वीकेंड पर बड़ी संख्या में लोग घूमने निकलते हैं और वापसी के दौरान या रास्ते में यहां रुककर चिकन और मटन का स्वाद जरूर लेते हैं. कई परिवार तो पहले से योजना बनाकर यहां पहुंचते हैं ताकि घूमने के साथ-साथ स्वादिष्ट भोजन का भी आनंद लिया जा सके.

सोशल मीडिया से फैली यहां के चिकन की पहचान
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ वर्षों पहले तक इस जगह के बारे में बहुत कम लोग जानते थे, लेकिन स्वाद और कम कीमत की चर्चा धीरे-धीरे पूरे जिले में फैल गई. आज स्थिति यह है कि देवघर के अलावा जसीडीह, मधुपुर, सारठ और आसपास के कई इलाकों से लोग यहां पहुंच रहे हैं. सोशल मीडिया और लोगों की आपसी बातचीत ने भी इस जगह को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है.

अगर आप भी देवघर में किसी ऐसी जगह की तलाश कर रहे हैं जहां कम खर्च में ताजा और स्वादिष्ट चिकन-मटन मिल सके, तो कृषि विज्ञान केंद्र के सामने स्थित यह मिनी ढाबा जरूर आपकी पसंद बन सकता है. देसी स्वाद, किफायती कीमत, ऑर्डर पर ताजा तैयारी और ग्रामीण माहौल का अनोखा संगम इस जगह को खास बनाता है. यही वजह है कि नॉनवेज प्रेमियों के बीच यह स्थान अब कि   सी पहचान का मोहताज नहीं रह गया है. यहां पहुंचने वाला लगभग हर व्यक्ति एक बार फिर लौटकर आने की इच्छा जरूर रखता है.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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