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Dholpur Famous Dish Ghonta Aloo Sabji: धौलपुर के चंबल बीहड़ क्षेत्र की खास पहचान घोंटा आलू की सब्जी अपने देसी स्वाद के लिए मशहूर है. बिना प्याज-लहसुन और केवल आलू व देसी मसालों से बनने वाली यह डिश शादी, भंडारे और दावतों में खास जगह रखती है. लोहे की कड़ाही में पकने से इसका स्वाद और बढ़ जाता है. पुआ और पूड़ी के साथ परोसी जाने वाली यह सब्जी लोगों की पहली पसंद है और चंबल क्षेत्र की पारंपरिक खाद्य संस्कृति का अहम हिस्सा मानी जाती है.

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धौलपुर. राजस्थान के हर जिले का अपना एक खास स्वाद और पहचान है. कहीं कोटा की हींग कचौड़ी मशहूर है तो कहीं मारवाड़ की केर-सांगरी लोगों की पहली पसंद है. इसी तरह धौलपुर के चंबल बीहड़ अंचल की पहचान बन चुकी घोंटा आलू की सब्जी लोगों को बेहद पसंद आती है. अगर आप धौलपुर चंबल के बीहड़ों में घूमने आए हैं और इस खास स्वाद का मजा नहीं लिया, तो मानो आपकी यात्रा अधूरी रह गई.

धौलपुर और आस-पास के क्षेत्रों में घोंटा आलू की सब्जी लोगों की बेहद पसंदीदा डिश है. यहां इसकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि शादी समारोह, भंडारा या किसी भी दावत में यह सब्जी जरूर बनाई जाती है. बिना घोंटा आलू के यहां का कोई भी भोज पूरा नहीं माना जाता. इसका स्वाद इतना लाजवाब होता है कि लोग उंगलियां चाटते रह जाते हैं .इस सब्जी की सबसे खास बात यह है कि इसे बिना प्याज और लहसुन के बनाया जाता है.

घोंटा आलू बनाने की विधि भी है काफी आसान

केवल आलू और खास देसी मसालों से तैयार होने के बावजूद इसका स्वाद बाकी सब्जियों पर भारी पड़ता है. यही वजह है कि इसे चंबल का पारंपरिक स्वाद भी कहा जाता है. घोंटा आलू बनाने की विधि भी काफी आसान है. सबसे पहले आलुओं को अच्छी तरह धोकर बड़े टुकड़ों में काट लिया जाता है. इसके बाद लोहे की कड़ाही में गर्म पानी के साथ इन्हें उबाला जाता है. आलू पकने के बाद इन्हें उसी कड़ाही में अच्छी तरह घोंटा जाता है और आलू के छिलकों को अलग नहीं किया जाता. फिर इसमें स्वादानुसार हल्दी, नमक, लाल मिर्च, धनिया और गरम मसाला डाला जाता है.

शादी और भंडारों में आसानी से दिख जाएगी यह सब्जी

इसके बाद सब्जी को काफी देर तक पकाया जाता है, जब तक इसका रंग हल्का गहरा न हो जाए. लोहे की कड़ाही में बनने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है, इसलिए इसे पारंपरिक रूप से केवल लोहे की कड़ाही में ही बनाया जाता है. तैयार होने के बाद इसे गरमा-गरम पुआ और पूड़ी के साथ परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद बेहद शानदार लगता है. धौलपुर के चंबल अंचल में शादी-ब्याह और भंडारों में यह सब्जी हर थाली में जरूर दिखाई देती है. स्वाद के साथ-साथ इसे सादगी और देसी परंपरा का प्रतीक भी माना जाता है. यही वजह है कि यह आज भी लोगों के बीच उतनी ही लोकप्रिय है जितनी पहले थी.

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deep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें



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