चित्रकूट: चित्रकूट में बाढ़ के पानी ने जमकर कहर बरपाया है। हालात ये हैं कि मकानों की एक मंजिल पानी में डूब गई है। घरों में 5 फीट तक कीचड़ और गंदगी भरी हुई है। सड़कें कचरे से पटीं दिखीं और रामघाट का पुल भी टूट गया। इस दौरान तुलसीदास की प्रतिमा भी क्षतिग्रस्त हो गई।

क्या है पूरा मामला?

चित्रकूट में बाढ़ का पानी उतरने के बाद मुश्किलें बढ़ गईं। एक तरफ इलाके की बिजली गुल हुई और दूसरी तरफ लोगों के घर और गृहस्थी तबाह हो गए। हेलिकॉप्टर व रेस्क्यू टीमों ने  लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और CM मोहन यादव ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया।

Image Source : REPORTER INPUTचित्रकूट में बाढ़ के पानी ने काफी नुकसान पहुंचाया

अब शांत हो रहा मंदाकिनी का रौद्र रूप लेकिन तबाही का असली चेहरा काफी भयावह

मंदाकिनी का वह रौद्र रूप, जिसने 2 दिन तक चित्रकूट को सांसें थामने पर मजबूर कर दिया था, अब धीरे-धीरे शांत पड़ने लगा है। नदी का जलस्तर नीचे आया है, घाटों पर पानी का उफान थमा है और जिंदगी वापस पटरी पर लौटने की कोशिश कर रही है लेकिन बाढ़ का पानी उतरते ही तबाही का असली चेहरा सामने आने लगा है।

जिन घरों में कुछ दिन पहले तक जिंदगी की चहल-पहल थी, वहां अब कई-कई फीट तक कीचड़ जमा है। कहीं घर के भीतर मलबा है तो कहीं फ्रिज, कूलर और दूसरे घरेलू सामान कीचड़ में सने पड़े हैं। सड़कें कचरे, गाद और मलबे से अटी हैं। लोग अपने हाथों से घरों से पानी और कीचड़ निकाल रहे हैं। किसी के घर का सामान बर्बाद हुआ है तो किसी की दुकान की पूरी गृहस्थी पानी में बह गई।

मंदाकिनी का पानी भले उतर गया हो, लेकिन लोगों की आंखों में बाढ़ का डर और नुकसान का दर्द अब भी साफ दिखाई दे रहा है।

चित्रकूट में अचानक क्यों मची इतनी बड़ी तबाही?

चित्रकूट (यूपी-एमपी सीमा) में 29-30 अगस्त 2026 को मंदाकिनी नदी में अचानक भीषण बाढ़ आई थी। इसकी वजह से सड़कें टूट गईं। पुल भी टूटे। रामघाट समेत कई इलाके डूबे, सैकड़ों घरों और दुकानों को नुकसान हुआ।

अगर इस बात पर मंथन हो कि अचानक चित्रकूट में इतनी बड़ी आफत कैसे आई तो इसका सीधा सा जवाब है कि विंध्य क्षेत्र के पहाड़ी कैचमेंट एरिया और चित्रकूट के आसपास 18 घंटे से ज्यादा लगातार भारी बारिश हुई।  इस बारिश की वजह से पहाड़ी नालों में पानी तेजी से नीचे की ओर गया।

वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित गोरगी बांध भी अचानक फट गया और इससे बड़ी मात्रा में पानी निचले इलाकों और मंदाकिनी की ओर गया। 

एक और कारण डोडा बांध भी रहा। चित्रकूट/सतना क्षेत्र में डोडा बांध के ओवरफ्लो की खबर सामने आई। ऐसे में गांव और नदी का जलस्तर बढ़ा।

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पांच फीट तक कीचड़, घरों में तबाही का मंजर

लगातार बारिश के बाद मंदाकिनी नदी में करीब 30 फीट का उफान आया था। हालात इतने भयावह हो गए थे कि चित्रकूट के कई हिस्सों में एक मंजिल तक के मकान पानी में डूब गए। जान बचाने के लिए लोग घर छोड़कर छतों पर पहुंच गए। कई परिवारों को प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों और आश्रय स्थलों में पहुंचाया।

अब पानी कम हुआ है तो लोग वापस अपने घरों की ओर लौट रहे हैं, लेकिन वहां उनका स्वागत घर नहीं, बल्कि कीचड़, गंदगी और बर्बादी कर रही है।

कहीं बिस्तर और कपड़े खराब हो गए हैं तो कहीं रसोई का सामान मलबे में दबा है। बिजली के खंभे जगह-जगह टूटे पड़े हैं। कई इलाकों में दो दिनों से ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी हुई है। मध्य प्रदेश हो या उत्तरप्रदेश का चित्रकूट क्षेत्र, दोनों तरफ लोग बिजली और बुनियादी सुविधाओं की बहाली का इंतजार कर रहे हैं।

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रामघाट का पुल मंदाकिनी में समाया, तुलसीदास की प्रतिमा भी टूटी

बाढ़ की भयावहता ने चित्रकूट की पहचान से जुड़े कई स्थानों को भी नुकसान पहुंचाया है। रामघाट पर बना पुल टूटकर मंदाकिनी नदी में जा गिरा। वहीं तुलसीदास की प्रतिमा भी बाढ़ के तेज बहाव की चपेट में आ गई। प्रतिमा का कंधे के ऊपर का हिस्सा बह गया।

यह दृश्य लोगों के लिए सिर्फ एक क्षतिग्रस्त प्रतिमा या टूटे पुल का दृश्य नहीं है, बल्कि उस प्राकृतिक आपदा की भयावहता का प्रमाण है, जिसने चित्रकूट की आस्था और जनजीवन दोनों को झकझोर दिया।

हेलिकॉप्टर और रेस्क्यू टीमों ने बचाई 50 जिंदगियां

बाढ़ के दौरान राहत और बचाव अभियान लगातार चलाया गया। दो हेलिकॉप्टर और सुरक्षा एवं बचाव दलों की मदद से करीब 50 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। पुलिस और होमगार्ड के जवानों ने नाव चालकों के साथ मिलकर जलभराव वाले इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंच बनाई।

कई जगह जवानों ने बच्चों और बुजुर्गों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। जब सड़कें रास्ता नहीं रहीं और घर पानी में घिर गए, तब नावें ही जिंदगी और सुरक्षित जमीन के बीच का रास्ता बनीं।

छतों पर गुजरी रातें, अब घरों से कीचड़ निकालने की जद्दोजहद

बाढ़ के चरम के दौरान कई परिवारों ने छतों पर रात गुजारी। नीचे घर में पानी था और ऊपर खुले आसमान के नीचे परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों को संभाले बैठे थे। हर गुजरता घंटा खतरे की आशंका लेकर आता था।

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अब पानी उतर गया है, लेकिन मुश्किल खत्म नहीं हुई

लोगों के सामने घरों की सफाई, बिजली की बहाली, पेयजल, भोजन और रोजमर्रा की जिंदगी को दोबारा खड़ा करने की चुनौती है। जिस घर को बनाने में वर्षों की मेहनत लगी, उसे बाढ़ ने कुछ घंटों में कीचड़ और मलबे में बदल दिया।

बाढ़ के बाद प्रभावितों के बीच पहुंचे CM मोहन यादव

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार सुबह चित्रकूट पहुंचे और बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने राहत शिविरों में पहुंचकर प्रभावित लोगों से बातचीत की और राहत सामग्री वितरित कराई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदाकिनी नदी की बाढ़ का पानी घरों में घुसने से काफी नुकसान हुआ है। चित्रकूट की अधोसंरचनाओं को भी क्षति पहुंची है। उन्होंने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार और प्रशासन उनके साथ खड़ा है और प्रभावितों को हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चित्रकूट में जनजीवन सामान्य होने तक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी यहीं रुककर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करें और प्रभावित परिवारों को हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराएं।

20 श्रद्धालुओं का दल बाढ़ में फंसा, आश्रय स्थल बना सहारा

मुख्यमंत्री ने आश्रय स्थल पर बांदा के बबेरू से आए श्रद्धालु राजू सिंह से भी मुलाकात की। राजू सिंह ने बताया कि वे करीब 20 लोगों के साथ कामतानाथ स्वामी के दर्शन करने चित्रकूट आए थे, लेकिन बाढ़ के कारण वापस घर नहीं लौट सके।

उन्होंने बताया कि आश्रय स्थल पर प्रशासन की ओर से भोजन, पानी और नाश्ते की व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने आश्रय स्थल पर मौजूद बाढ़ प्रभावितों को वस्त्र, घरेलू सामग्री और खाद्यान्न सहित राहत सहायता सामग्री वितरित की।

कीचड़ से सनी सड़क पर पैदल पहुंचे मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केवल अधिकारियों से बाढ़ की जानकारी लेकर लौटने के बजाय प्रभावित इलाकों का पैदल भ्रमण किया। वह चित्रकूट नगर के रामधाम मोहल्ले में जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों में कीचड़ से सने रास्तों पर पैदल चलते हुए लोगों के घरों तक पहुंचे।

उन्होंने रामफल गर्ग और  किस्मत कुमार गर्ग के घर पहुंचकर बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी ली। प्रभावित परिवारों से आत्मीयता से बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मदद के लिए हरसंभव कदम उठाएगी।

दुकान में घुसा पानी, कारोबार पर भी पड़ा असर

सतना-चित्रकूट मार्ग पर सियाराम कुटीर स्थित माधव धर्मशाला के समीप अग्रहरि किराना स्टोर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने दुकानदार कामता प्रसाद गुप्ता से मुलाकात की। दुकान में पानी भरने से हुए नुकसान का उन्होंने जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिन समय में सरकार प्रभावितों के साथ है और नियमानुसार हरसंभव राहत एवं सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

अब चुनौती बाढ़ से बड़ी जिंदगी को फिर से खड़ा करने की

मंदाकिनी अब शांत है। घाटों पर पानी का शोर कम हो गया है। लेकिन चित्रकूट के घरों में जमा कीचड़, टूटी सड़कें, उखड़े बिजली के खंभे, क्षतिग्रस्त पुल और बर्बाद हुई गृहस्थियां उस बाढ़ की कहानी खुद बयां कर रही हैं।

पानी उतर गया है, लेकिन दर्द अभी नहीं उतरा

अब राहत और बचाव के बाद सबसे बड़ी चुनौती पुनर्वास और पुनर्निर्माण की है। लोगों को सिर्फ घरों से कीचड़ निकालने में मदद नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी उजड़ी हुई गृहस्थी फिर से बसाने के लिए सहारे की जरूरत है। मंदाकिनी की लहरें लौट गई हैं, मगर अपने पीछे एक ऐसा चित्रकूट छोड़ गई हैं, जहां आस्था के इस शहर को अब अपनी जिंदगी फिर से संवारनी है।

बता दें कि इससे पहले खबर सामने आई थी कि भारी बारिश से सतना में हालात बिगड़े हैं और चित्रकूट में बाढ़ आ गई है। UP-MP का संपर्क टूटा है। (रिपोर्ट- सतना से अमित त्रिपाठी)

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