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Chhattisgarh Snacks Recipe: सबसे जरूरी प्रक्रिया मुरकु को धूप में सुखाना है. इसे फैलाकर तेज धूप में एक से दो दिन तक अच्छी तरह सुखाया जाना चाहिए. यही प्रक्रिया इसे लंबे समय तक खराब होने से बचाती है और इसका असली स्वाद भी इसी प्रक्रिया से आता है.
जांजगीर चांपा. छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई अपने देसी और सादे स्वाद के लिए जानी जाती है. यहां के कई व्यंजन ऐसे हैं, जो कम सामग्री में तैयार होते हैं लेकिन स्वाद में लाजवाब होते हैं. उन्हीं में से एक खास और लोकप्रिय स्नैक है चावल के आटे से बनने वाली कुरकुरी मुरकु. यह न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होती है बल्कि लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है, इसलिए इसे खासतौर पर गर्मियों के दिनों में बनाया जाता है. मुरकु बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में पानी लें. उसमें स्वाद के लिए जीरा, नमक और हल्की कुरकुराहट के लिए चुटकीभर खाने वाला सोडा मिलाया जाता है. अब इस पानी को गैस ऑन करके अच्छे से उबाल लें. इसके बाद इसे नीचे उतारें. अब इसमें बढ़िया गुणवत्ता वाला चावल का आटा धीरे धीरे डालें और बड़े चम्मच से मिलाते जाएं. जब चावल का आटा पूरी तरह मिल जाए, तो उसके बाद आप छत पर या आंगन में कपड़ा बिछाकर उसपर मुरकु बना सकते हैं.
आप चाहें तो पर्रा में कपड़ा बांधकर भी बना सकते हैं. इस आटे को मुरकु बनाने वाले सांचे में छोटे-छोटे लोई में बांटकर मुरकु का आकार दिया जाता है, जो आमतौर पर लंबा या घुमावदार होता है. सबसे जरूरी प्रक्रिया धूप में सुखाना है. मुरकु को फैलाकर तेज धूप में एक से दो दिन तक अच्छी तरह सुखाया जाता है. यही प्रक्रिया इसे लंबे समय तक खराब होने से बचाती है और असली स्वाद भी इसी से आता है. जब मुरकु पूरी तरह सूख जाए, तब इसे गर्म तेल में तल लिया जाता है.
महीनों तक नहीं होता खराब
तलने के बाद मुरकु का रंग हल्का सुनहरा और टेक्सचर बेहद कुरकुरा हो जाता है. इसके पूरी तरह सूख जाने के बाद महीनों तक स्टोर करके रख सकते हैं. मुरकु को खाने के साथ या चाय के साथ या हल्के नाश्ते के रूप में परोसा जा सकता है, जिससे यह घरवालों का पसंदीदा स्नैक बन जाता है. अगर आप भी घर पर कुछ देसी और अलग स्वाद ट्राई करना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ के इस पारंपरिक मुरकु को जरूर बनाएं. आसान विधि और जबरदस्त स्वाद के साथ यह आपके परिवार को जरूर पसंद आएगा.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.