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Chhattisgarhs Khujri Sweet Recipe: छत्तीसगढ़ का पारंपरिक व्यंजन खुजरी पेयूष (खीस) यानी गाय या भैंस के पहले-दूसरे दिन के गाढ़े दूध से बनाया जाती है. इसकी बनावट मावा जैसी दानेदार और स्वाद बेहद लाजवाब होता है. यह पौष्टिक मिठाई आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में खास अवसरों पर बड़े चाव से बनाई जाती है.
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खानपान संस्कृति में कई ऐसे व्यंजन शामिल हैं, जो आज भी गांवों में खास अवसरों पर बड़े चाव से बनाए जाते हैं. इन्हीं में से एक है ‘खुजरी’, जो गाय या भैंस के बच्चे देने के बाद पहले या दूसरे दिन निकलने वाले गाढ़े दूध, जिसे पेयूष या खीस कहा जाता है. यह व्यंजन स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर माना जाता है. दूध में चीनी या गुड़, इलायची और चाहें तो सूखे मेवे मिलाकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. तैयार होने पर इसकी बनावट दानेदार और मावा जैसी हो जाती है, जो मुंह में जाते ही घुल जाती है. ग्रामीण अंचलों में यह मिठाई मेहमानों के स्वागत और पारिवारिक खुशियों के अवसर पर विशेष रूप से बनाई जाती है.
खुजरी छत्तीसगढ़ का एक पारंपरिक व्यंजन है, जिसे पेयूष यानी गाय या भैंस के बच्चे देने के बाद निकलने वाले पहले या दूसरे दिन के गाढ़े दूध से बनाया जाता है. इस दूध में सामान्य दूध की तुलना में अधिक पोषक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए इसे बेहद पौष्टिक माना जाता है.
खुजरी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
पेयूष (गाय या भैंस का पहला/दूसरा दूध)- 1 लीटर. चीनी या गुड़-200 से 250 ग्राम (स्वादानुसार)इलायची पाउडर-आधा छोटा चम्मच. काजू, बादाम, किशमिश-बारीक कटे हुए (वैकल्पिक).
खुजरी बनाने की आसान रेसिपी
सबसे पहले पेयूष को अच्छी तरह छानकर एक मोटे तले वाले बर्तन में लें. इसमें चीनी या गुड़ और इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें. अब इसे धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं, ताकि दूध तले में चिपके नहीं. जब मिश्रण गाढ़ा होकर मावा जैसी कंसिस्टेंसी में आ जाए, तब गैस बंद कर दें. कुछ देर ठंडा होने के बाद यह अपने आप दानेदार और जमने जैसी बनावट ले लेता है? चाहें तो ऊपर से सूखे मेवे डालकर परोसें.
स्वाद के साथ पोषण का भी खजाना
खुजरी सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि पोषण से भरपूर पारंपरिक व्यंजन भी है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे प्रसव के बाद पशु के पहले दूध का सर्वोत्तम उपयोग माना जाता है. इसका स्वाद हल्का मीठा, मुलायम और बेहद लाजवाब होता है.
छत्तीसगढ़ की परंपरा से जुड़ा खास व्यंजन
आधुनिक खानपान के दौर में भी छत्तीसगढ़ के गांवों में खुजरी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. स्थानीय लोग इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा मानते हैं और आज भी विशेष अवसरों पर परिवार के साथ इसका आनंद लेते हैं. यह व्यंजन राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक स्वाद की अनमोल पहचान है.
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