दशरथ मांझी जिन्हें “माउंटेन मैन” के नाम से भी जाना जाता है भारत के एक ऐसे अद्वितीय और दृढ़ संकल्पी व्यक्ति थे, जिन्होंने केवल एक छेनी और हथौड़े के बल पर अकेले ही एक पूरा पहाड़ काट डाला था। उनकी यह गाथा अदम्य साहस, निस्वार्थ प्रेम और अटूट संकल्प की एक अद्भुत मिसाल है। उनका जन्म लगभग 1934 में बिहार के गया जिले के पास गहलोर नामक एक बेहद पिछड़े और गरीब गांव में हुआ था। वह एक अत्यंत गरीब परिवार से थे और उन्होंने अपने जीवन में भारी सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया। दशरथ मांझी की पत्नी, फागुनी देवी, एक दिन उनके लिए पहाड़ पार कर खाना ले जा रही थीं। उसी दौरान पैर फिसलने के कारण वह पहाड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। समय पर इलाज न मिल पाने के कारण उनकी पत्नी ने दम तोड़ दिया। इस गहरे दुख ने उन्हें हिलाकर रख दिया और उन्होंने संकल्प लिया कि जो उनके साथ हुआ, वह गांव के किसी और व्यक्ति के साथ नहीं होने देंगे। माउंटेन मैन’ कहे जाने मांझी ने केलव छेनी और हथौड़ी के दम पर लगातार 22 साल तक पहाड़ तोड़ा और 110 मीटर लंबा रास्ता बना दिया। उनके इरादे लोगों को कई चीजें सिखाते हैं। यहां हम दशरथ मांझी के मोटिवेशनल कोट्स लेकर आए हैं। यहां पढ़ें दशरथ मांझी के मोटिवेशनल कोट्स।
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रास्ता कितना भी कठिन हो, अगर आपके इरादे मजबूत हैं, तो पहाड़ को भी झुकना ही पड़ता है।
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भगवान के भरोसे मत बैठो, क्या पता भगवान खुद तुम्हारे भरोसे बैठा हो।
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कई बार आप पहले होते हो, जो रास्ता बनाते हो, न कि बनाए हुए रास्ते पर चलते हो।
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गरीबी कमजोरी नहीं होती, बल्कि मेहनत करना छोड़ देना कमजोरी होती है।
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अगर एक आम आदमी भी चाह ले, तो वह अकेला बदलाव ला सकता।
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जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं… बहुत लंबा दंगल चलेगा रे तोहार और हमार!
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शुरुआत में सबने मुझे पागल कहा, लेकिन जब काम आगे बढ़ा, तो लोग चुप होते गए और मदद के लिए हाथ बढ़ने लगे।
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काम कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर आप हर रोज थोड़ा-थोड़ा करते हैं, तो एक दिन नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है।
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प्यार में इतनी ताकत होती है कि वह इंसान से वो काम भी करवा देता है, जिसे पूरी दुनिया असंभव मानती है।