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Jehanabad Chanachur: ट्रेन से सफर के दौरान अलग-अलग राज्यों और स्टेशनों पर अलग-अलग खाने-पीने की चीजें मिलती हैं. कहीं खीरा-ककड़ी तो कहीं झालमुरी के साथ मूंगफली, चना और अन्य खाने वाली चीजें मिलती रहती हैं. इसी तरह जहानाबाद और आसपास के स्टेशनों में भी एक आइटम बहुत बिकता है. इस आइटम का नाम चनाचूर है. यह आपको हर पैसेंजर ट्रेन में बिकता हुआ दिख जाएगा. यह सस्ता आइटम खाने में लोगों को स्वादिष्ट लगता है. जहानाबाद में चनाचूर बिकने की अपनी एक कहानी है.
चनाचूर बहुत पुराना खाने वाला आइटम है. अब इसे बहुत जगह पसंद किया जाने लगा है. वैसे तो बिहार में कई जगह चनाचूर बनता है लेकिन, जहानाबाद में एक ऐसा गांव है, जहां करीब 20 से 25 घरों में चनाचूर बनता है. वह गांव मखदुमपुर प्रखंड का सैदपुर है.
यहां हर घरों में सिलवटें देखने को मिल जाएंगे जिस पर चना को कूटकर, कड़ाही में तलकर चनाचूर तैयार किया जाता है. इस चनाचूर को बनाने में महिलाएं और पुरुष सुबह 4:00 से ही लग जाते हैं. पूरा दिन इसी में लगे रहते हैं और इसी से होने वाली आय से अपना परिवार पालते हैं.
जीविका से जुड़ी संजू देवी ने बताया कि उनके यहां नदौल के रहने वाले बहनोई गांव आए थे. काफी साल पहले जब वह आए थे तो उस समय वह चनाचूर का व्यवसाय काफी समय से कर रहे थे. उन्होंने बताया कि आप लोग भी इस प्रकार का बिजनेस घर बैठ कर सकते हैं.
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उन्होंने ही लोगों को चनाचूर बनाने की बारीकी सिखाई और फिर वहां से चनाचूर बनाने का सिलसिला शुरू हुआ. संजू देवी ने बताया कि आज उनके यहां हर दिन 4 किलो से 5 किलो तक चना कूटा जाता है और उससे चनाचूर तैयार किया जाता है. उनके पति भी इस व्यवसाय में उनका सहयोग करते हैं और बच्चे भी कभी-कभी सहयोग कर देते हैं.
संजू ने कहा कि इससे घर बैठे आमदनी भी हो जाती है और पति को भी दूसरे राज्य रोजगार के लिए नहीं जाना पड़ता. दोनों लोग मिलकर यहीं साथ में काम करते हैं. वह मेला और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी चनाचूर बेचने का काम करते हैं. संजू ने बताया कि ट्रेन में बेचने के लिए पास की जरूरत होती है जो उनके पति के पास है. इसी पास के जरिए उन्हें ट्रेन में बिक्री की अनुमति मिलती है.