भारतीय खानपान में छोले-भटूरे और छोले-कुल्चे दोनों ही बेहद लोकप्रिय व्यंजनों में से एक हैं. देखने में ये दोनों कुछ हद तक एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन इनके बनाने की विधि, पोषण मूल्य और स्वास्थ्य पर प्रभाव में काफी अंतर होता है. यदि सेहत के नजरिये से देखा जाए तो कुल्चे आमतौर पर भटूरे की तुलना में बेहतर विकल्प माने जा सकते हैं.
भटूरे क्या होते हैं?
भटूरा मैदा से बनाया जाता है. इसके आटे में दही, बेकिंग सोडा या यीस्ट मिलाकर उसे कुछ समय के लिए फुलाया जाता है. इसके बाद भटूरे को गहरे तेल में तलकर तैयार किया जाता है. तलने के कारण यह काफी फूला हुआ और कुरकुरा बनता है.
भटूरे की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वाद है, लेकिन यही इसकी कमजोरी भी है. अधिक तेल सोख लेने के कारण इसमें कैलोरी और वसा (फैट) की मात्रा बढ़ जाती है. एक मध्यम आकार के भटूरे में लगभग 250 से 350 कैलोरी तक हो सकती हैं, जो उसके आकार और इस्तेमाल किए गए तेल पर निर्भर करती हैं.
कुल्चे क्या होते हैं?
कुल्चा भी आमतौर पर मैदा से बनाया जाता है, लेकिन इसे तंदूर, ओवन या तवे पर सेंका जाता है. इसमें भी दही या यीस्ट का उपयोग हो सकता है, लेकिन इसे तेल में नहीं तला जाता. इसी कारण कुल्चे में वसा और कैलोरी अपेक्षाकृत कम होती हैं.
एक साधारण कुल्चे में लगभग 150 से 200 कैलोरी होती हैं. यदि इसमें कम मक्खन या घी लगाया जाए, तो यह और भी हल्का भोजन बन सकता है.
दोनों में मुख्य अंतर
पकाने की विधि
भटूरा: गहरे तेल में तला जाता है.
कुल्चा: तंदूर या तवे पर सेंका जाता है.
कैलोरी और फैट
भटूरे में अधिक तेल होने के कारण कैलोरी और फैट ज्यादा होता है.
कुल्चे में फैट कम होता है.
पाचन
भटूरे भारी होते हैं और कई लोगों को गैस, एसिडिटी या अपच की समस्या हो सकती है.
कुल्चे अपेक्षाकृत हल्के होते हैं और पचने में आसान माने जाते हैं.
वजन नियंत्रण
बार-बार भटूरे खाने से वजन बढ़ने की संभावना अधिक होती है.
कुल्चे अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प हैं, खासकर यदि उनमें अतिरिक्त मक्खन न लगाया जाए.
सेहत के लिए क्या बेहतर है?
अगर केवल भटूरे और कुल्चे में से किसी एक को चुनना हो, तो कुल्चा अधिक स्वास्थ्यकर विकल्प माना जाएगा. इसका मुख्य कारण यह है कि उसे तला नहीं जाता, जिससे अतिरिक्त तेल और अनावश्यक कैलोरी शरीर में नहीं जाती. हृदय रोग, मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल या मधुमेह से जूझ रहे लोगों के लिए कुल्चा अपेक्षाकृत बेहतर चुनाव हो सकता है.
हालांकि पारंपरिक कुल्चा भी ज्यादातर मैदा से ही बनता है, जिसमें फाइबर कम होता है. इसलिए सबसे अच्छा विकल्प होगा कि कुल्चा या रोटी गेहूं के आटे, मल्टीग्रेन या मिलेट्स (बाजरा, ज्वार आदि) से तैयार की जाए. जिससे आपकी सेहत को भी नुकसान न पहुंचे.