नई दिल्ली: अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने PM मोदी से फोन पर बात की है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन कॉल आया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत-अमेरिका सहयोग पर चर्चा की गई। पीएम मोदी ने जेडी वेंस और उनकी पत्नी को बेटे के जन्म की बधाई भी दी

पीएम मोदी ने एक्स पर दी जानकारी

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन कॉल आया। हमने भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को अहम क्षेत्रों में और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। उनके और ‘सेकंड लेडी’ को बेटे के जन्म पर गर्मजोशी से बधाई दी और पूरे परिवार को शुभकामनाएं दीं।”

अमेरिकी सीनेट में पास हुआ बिल

बता दें कि दोनों नेताओं के बीच ऐसे समय में यह बातचीत हुई है जब शुक्रवार को अमेरिकी सीनेट ने दोनों पार्टियों के समर्थन वाला एक बिल पास किया। यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों (जैसे भारत और चीन) से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है जो रूस से तेल और गैस का आयात जारी रखते हैं। इसके पीछ तर्क यह दिया जा रहा है कि ऐसा व्यापार मॉस्को की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने और यूक्रेन में उसके सैन्य अभियानों के लिए फंड जुटाने में मदद करता है।

भारी बहुमत से मिली मंजूरी

सीनेट ने भारी बहुमत (86-11 वोट) से ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ को मंजूरी दी। दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम (जो इसके मुख्य निर्माताओं में से एक थे) के नाम पर रखे गए इस कानून का मकसद रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। साथ ही उन देशों को भी निशाना बनाना है जिनके मॉस्को के साथ बड़े पैमाने पर ऊर्जा व्यापार संबंध हैं। इस कानून के प्रावधानों के तहत, अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार मिलेगा कि वे रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के दुनिया के शीर्ष पांच खरीदारों से होने वाले आयात पर 100% तक टैरिफ लगा सकें।

रूसी इकॉनमी के सपोर्ट को कम करना टारगेट

विदेशी एनर्जी खरीदारों को टारगेट करने के अलावा, यह कानून रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, सीनियर पॉलिटिकल और मिलिट्री अधिकारियों, फाइनेंशियल संस्थानों, एनर्जी प्रोजेक्ट्स और रूस की युद्ध कोशिशों से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ नए प्रतिबंधों की रूपरेखा तैयार करता है। यह कानून उन पुराने और री-फ्लैग्ड (झंडा बदले हुए) ऑयल टैंकरों पर भी अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाता है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर रूस ग्लोबल प्रतिबंधों से बचने और एनर्जी एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई को बनाए रखने के लिए करता है। इसका व्यापक मकसद रूस की इकॉनमी और मिलिट्री कैंपेन को सपोर्ट करने वाले फाइनेंशियल फ्लो को रोकना है।

रूसी तेल के खरीदारों पर लग सकता है टैरिफ

यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी तेल या नेचुरल गैस के टॉप पांच खरीदारों से इम्पोर्ट किए जाने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। चीन के साथ-साथ भारत भी दुनिया भर में रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है। इस कदम का मकसद एनर्जी इम्पोर्ट करने वाले देशों के सामने एक विकल्प रखना है: या तो वे रियायती दरों पर रूसी एनर्जी खरीदना जारी रखें या फिर फायदेमंद अमेरिकी बाजार तक अपनी पहुंच बनाए रखें। बता दें कि 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद, ग्लोबल बाजार में उथल-पुथल के दौरान अपनी राष्ट्रीय एनर्जी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई थी।

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