झारखंड में सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने रिश्वतखोरी के एक बड़े मामले में तीन राजस्व अधिकारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है और रांची–धनबाद में पांच ठिकानों पर तलाशी ली है। गिरफ्तार आरोपियों में गृहमंत्रालय के अन्तर्गत क्षेत्रीय वेतन एवं लेखा कार्यालय (RPAO), CISF के वरिष्ठ लेखा अधिकारी संतोष कुमार महतो, सहायक लेखा अधिकारी सुनील कुमार और सहायक लेखा अधिकारी सुजीत कुमार सिंह शामिल हैं।

क्या है पूरा मामला

सीबीआई के अनुसार, यह मामला CISF के जवानों से सम्बन्धित यात्रा भत्ता (TA), बच्चों की शिक्षा भत्ता (CEA) और अन्य लंबित बिलों के भुगतान के प्रोसेसिंग से जुड़ा हुआ है। प्रयागराज की NTPC यूनिट में तैनात हेड कांस्टेबल रविकांत त्रिपाठी ने अधिकारियों पर लंबित   भुगतान में अनावश्यक देरी कर रकम की मांग करने का आरोप लगाते हुए सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत की प्राथमिक जांच के बाद सीबीआई ने आरोपों को सत्य पाया और औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराकर कार्रवाई शुरू कर दी।

कैसे हुई गिरफ्तारी

सीबीआई ने 27 अगस्त को रांची स्थित RPAO कार्यालय में एक जाल बिछाया। शिकायतकर्ता जब निर्धारित राशि लेकर कार्यालय पहुंचा और आरोपियों को रिश्वत के रूप में रु. 48,400 रुपये दिए, तब वहीं मौजूद सीबीआई अधिकारियों ने आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। मौके से रिश्वत की पूरी राशि भी बरामद कर ली गई। गिरफ्तार तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है और उन्हें 28 अगस्त को सीबीआई की अदालत में पेश किया जाएगा।

छापेमारी और सबूत जब्त

गिरफ्तारी के बाद CBI की अलग-अलग टीमें रांची व धनबाद में आरोपियों से जुड़े कुल पांच ठिकानों पर छापेमारी के लिए रवाना हुईं। तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, नकदी और आभूषण बरामद हुए हैं। धनबाद में लेखपाल सुजीत कुमार सिंह के आवास से लगभग 10 लाख रुपये से अधिक नकदी और अनुमानित 40 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण मिले। हालांकि ये रकम और वस्तुओं की आधिकारिक पुष्टि अभी सीबीआई द्वारा नहीं की गई है। सीबीआई टीम ने बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर उसकी मौलिकता और स्रोत की जांच शुरू कर दी है।

सीबीआई ने बताया है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और छापेमारी में मिले दस्तावेज़, बैंक लेनदेन तथा संपत्तियों के स्रोत की पड़ताल कर रही है। जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या रिश्वत लेने और भुगतान प्रक्रिया रोके जाने के पीछे किसी बड़े नेटवर्क या और अधिकारियों की हिस्सेदारी है। CISF विभाग में भी CBI की कार्रवाई के बाद सख्त सन्नाटा और आशंका व्याप्त है, अधिकारियों ने सहयोग का आश्वासन दिया है और आंतरिक जांच कराने की भी बात हो रही है।

अब आगे क्या होगा

गिरफ्तार आरोपियों को सीबीआई हिरासत में लेकर कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर रही अभी भी तहकीकात जारी है। सीबीआई  अदालत में पेशी के बाद आरोपों के आधार पर आरोप तय किए जाएंगे और आवश्यकतानुसार घरेलू संपत्ति, बैंक खाते और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के लिए प्रवर्तन एजेंसियों से समन्वय किया जाएगा।

सीबीआई ने अभी तक बरामद नकदी और आभूषणों की आधिकारिक कीमत की पुष्टि नहीं की है और न ही जांच में शामिल अन्य संवेदनशील जानकारियाँ सार्वजनिक की हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला और केंद्र के सम्बन्धित प्रशासनिक विभाग सहयोग कर रहे हैं। यह मामला सरकारी खर्च और जवानों के भत्तों के पारदर्शी भुगतान की आवश्यकता पर एक बार फिर सवाल उठाता है। सीबीआई की कार्रवाई से प्रभावी रूप से यह संदेश गया है कि सरकारी भुगतान में गड़बड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। इससे पहले सीबीआई ने हजारीबाग में केंद्रीय गोदाम निगम (CWC) के मैनेजर को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। 

रिपोर्ट- कुंदन सिंह, धनबाद

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