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झुमरी तिलैया का केसरिया कलाकंद, अमित शाह और राजनाथ सिंह चख चुके हैं स्वाद

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Jhumri Tilaiya Kesariya Kalakand: झारखंड के कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया की पहचान अब सिर्फ अभ्रक नगरी के रूप में नहीं रहेगी. यहां की करीब 71 वर्ष पुरानी प्रसिद्ध केसरिया कलाकंद मिठाई को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिल गया है. इसके साथ ही यह झारखंड का पहला खाद्य उत्पाद बन गया है, जिसे यह प्रतिष्ठित पहचान हासिल हुई है. जीआई टैग मिलने से स्थानीय मिठाई कारोबारियों और लोगों में खुशी का माहौल है. उन्हें उम्मीद है कि इससे केसरिया कलाकंद की पहचान और मांग देश ही नहीं, विदेशों में भी बढ़ेगी.

देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान से झुमरी तिलैया आकर बसे भाटिया परिवार ने वर्ष 1955 में झंडा चौक के पास भाटिया मिष्ठान नाम से दुकान शुरू की थी. इसी दुकान में पहली बार कलाकंद तैयार किया गया. अपने अलग स्वाद और मुलायम दानेदार बनावट के कारण यह मिठाई जल्द ही लोगों की पसंद बन गई और धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता पूरे क्षेत्र में फैल गई.

आनंद विहार के संचालक संजीव खेतान उर्फ लड्डू खेतान बताते हैं कि वर्ष 1965 में आदर्श जलपान की स्थापना के बाद यहां के कलाकंद को नई पहचान मिली. बाद में इस प्रतिष्ठान का नाम बदलकर आनंद विहार कर दिया गया. उस समय आदर्श जलपान और छाबड़ा स्वीट्स के कलाकंद की काफी मांग रहती थी. इसके बाद कन्हैया मिष्ठान सहित कई अन्य दुकानों ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाया.

कोडरमा का प्रसिद्ध कलाकंद स्थानीय दूध से तैयार किया जाता है. सबसे पहले दूध को तेज आंच पर लंबे समय तक उबालकर गाढ़ा किया जाता है. इसके बाद विनेगर मिले पानी का हल्का छिड़काव कर उसे दानेदार बनाया जाता है. तैयार मिश्रण को ट्रे में फैलाकर ठंडा किया जाता है और फिर उसके ऊपर केसर तथा ड्राई फ्रूट्स से सजावट की जाती है. शुरुआत में यहां केवल सफेद कलाकंद बनाया जाता था, लेकिन समय के साथ केसरिया कलाकंद ने लोगों के बीच विशेष पहचान बना ली.

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संजीव खेतान के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कोडरमा के केसरिया कलाकंद का स्वाद चख चुके हैं और इसकी सराहना कर चुके हैं. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के पारिवारिक आयोजनों में भी यह मिठाई भेजी जाती रही है. वहीं, तेजस्वी यादव की शादी में आनंद विहार से 300 किलो केसरिया कलाकंद विशेष ऑर्डर पर भेजा गया था.

उन्होंने बताया कि अमेरिका, थाईलैंड और ब्रिटेन सहित कई देशों तक इस मिठाई की सप्लाई की जा चुकी है. पहले इसे मिट्टी के बर्तनों में भेजा जाता था, बाद में कार्टन पैकिंग शुरू हुई और अब प्लास्टिक कंटेनरों में सुरक्षित तरीके से भेजा जाता है. सामान्य तापमान में यह मिठाई लगभग 72 घंटे तक ताजा बनी रहती है.

संजीव खेतान ने बताया कि कोडरमा के पूर्व उप विकास आयुक्त और बाद में उपायुक्त रहे आईएएस ऋतुराज के प्रयासों से केसरिया कलाकंद को जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया सफल हो सकी. वर्तमान में इसकी कीमत लगभग 480 रुपये प्रति किलो है. उन्होंने यह भी बताया कि अपने कारीगरों के माध्यम से दिल्ली में भी इस कलाकंद को तैयार करने की कोशिश की गई.

लेकिन कोडरमा जैसा दानेदार और मलाईदार स्वाद नहीं मिल सका. इसके पीछे यहां के पानी की विशेष गुणवत्ता को एक प्रमुख कारण माना जाता है. अब जीआई टैग मिलने के बाद कोडरमा के केसरिया कलाकंद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.

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