देश की सबसे अमीर महानगरपालिका BMC अब हाईटेक और पेपरलेस होने की तैयारी में है। BMC के पार्षदों और प्रमुख कमेटियों के नेताओं को टैबलेट देने का प्रस्ताव है। लेकिन करीब 5 से 6 करोड़ रुपये के इस प्रस्ताव पर सियासत शुरू हो गई है। शिवसेना UBT और कांग्रेस इसे फिजूलखर्ची बता रहे हैं, जबकि BJP और शिवसेना शिंदे का कहना है कि टैबलेट से BMC का कामकाज तेज होगा, समय और पैसा दोनों बचेंगे। यानी सवाल सिर्फ टैबलेट का नहीं, बल्कि मुंबईकरों के पैसे के इस्तेमाल और BMC के कामकाज को डिजिटल बनाने की जरूरत का है।
BMC को पेपरलेस बनाने की तैयारी
देश की सबसे अमीर महानगरपालिका BMC अब पेपरलेस और डिजिटल कामकाज की तरफ बढ़ने की तैयारी में है। BMC में 227 पार्षद हैं और करीब 300 से ज्यादा टैबलेट खरीदने का प्रस्ताव है। इन टैबलेट का इस्तेमाल पार्षदों के साथ-साथ प्रमुख अधिकारियों और कमेटियों के प्रमुखों के लिए किया जाएगा। BMC का तर्क है कि फिलहाल बैठकों के एजेंडे और जरूरी दस्तावेज पार्षदों तक पहुंचाने के लिए कागज की छपाई, कर्मचारियों, प्यून, गाड़ी, ड्राइवर और डीजल का इस्तेमाल होता है। हालांकि, इस प्रस्ताव के सामने आते ही विपक्ष ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
UBT का हमला, बताया फिजूलखर्ची
शिवसेना UBT नेता आदित्य ठाकरे ने इस योजना को फिजूलखर्ची बताया है। उनका कहना है कि उनकी सरकार के कार्यकाल में छात्रों को टैबलेट दिए गए थे, लेकिन अब पार्षदों के लिए टैबलेट खरीदने के नाम पर BMC के पैसे खर्च किए जा रहे हैं। आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि मुंबईकरों के पैसे की बर्बादी करने के बजाय BMC को जनता के बुनियादी सवालों पर पैसा खर्च करना चाहिए। आपको बता दें कि हाल के दिनों में आदित्य ठाकरे लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर हैं।
कांग्रेस भी प्रस्ताव के विरोध में
कांग्रेस का कहना है कि पार्षदों के पास पहले से मोबाइल फोन और निजी डिजिटल डिवाइस मौजूद हैं। ऐसे में BMC के पैसे से नए टैबलेट खरीदने की जरूरत क्या है? कांग्रेस का आरोप है कि विपक्षी पार्षदों के इलाकों में सड़क, नाले और अस्पतालों की हालत खराब है और विकास के लिए फंड नहीं मिल रहा, लेकिन टैबलेट खरीदने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि उसे अपने लिए टैबलेट नहीं चाहिए, बल्कि अपने इलाके की जनता के लिए विकास का फंड चाहिए।
BJP का पलटवार
विपक्ष के आरोपों पर BJP ने पलटवार किया है। BMC में BJP के ग्रुप लीडर गणेश खनकर का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीति कर रहा है। उनका कहना है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली BMC में भी पार्षदों के लिए लैपटॉप खरीदे गए थे। अब अगर BMC को डिजिटल और पेपरलेस बनाया जा रहा है तो इसका विरोध क्यों? BJP का दावा है कि टैबलेट से पार्षदों को बैठकों का एजेंडा और जरूरी दस्तावेज समय पर मिलेंगे। इससे कामकाज तेज होगा और पेपर, प्रिंटिंग और दस्तावेज पहुंचाने का खर्च भी कम होगा।
BMC में टैब से क्या होगा फायदा?
- कामकाज होगा डिजिटल और पेपरलेस
- कागज और प्रिंटिंग का खर्च कम
- समय की होगी बचत
- प्यून, गाड़ी, ड्राइवर और डीजल का खर्च घटेगा
- मीटिंग का एजेंडा तुरंत मिलेगा
- इमरजेंसी की जानकारी तुरंत मिलेगी
- दस्तावेज आसानी से पढ़े और सर्च किए जा सकेंगे
- कागज की खपत कम होने से पर्यावरण को फायदा
- लंबी अवधि में BMC के खर्च में कमी का दावा
शिंदे शिवसेना भी BJP के साथ
BJP के इस तर्क को सत्ता में उसकी सहयोगी शिवसेना शिंदे का भी समर्थन मिला है। BMC में शिवसेना शिंदे के ग्रुप लीडर अमय घोले का कहना है कि वह तीन बार नगरसेवक रह चुके हैं और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली BMC में भी काम कर चुके हैं। उनका सवाल है कि जब पहले पार्षदों को मोबाइल, SIM और दूसरी डिजिटल सुविधाएं दी जाती थीं, तब उसे फिजूलखर्ची क्यों नहीं कहा गया? अमय घोले के मुताबिक BMC ने मौजूदा मैनुअल सिस्टम में होने वाले खर्च और डिजिटल सिस्टम से होने वाली संभावित बचत का हिसाब लगाया है। उनका दावा है कि एक पार्षद पर दस्तावेज पहुंचाने, गाड़ी, ड्राइवर और डीजल समेत सालाना करीब एक लाख रुपये तक का खर्च आता है।
समझें प्रस्ताव का पूरा गणित
अब इस प्रस्ताव का पूरा गणित समझिए। BMC का बजट 82 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है और BMC में 227 पार्षद हैं। मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले पार्षदों के घर BMC मुख्यालय से काफी दूरी पर हैं। बैठकों के एजेंडे और दूसरे दस्तावेज पार्षदों तक पहुंचाने में BMC को कर्मचारियों और वाहनों का इस्तेमाल करना पड़ता है। BMC के अनुमान के मुताबिक, एक पार्षद पर सालाना करीब एक लाख रुपये तक का खर्च इस प्रक्रिया में आता है। 227 पार्षदों के हिसाब से यह रकम करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है। इसी खर्च को कम करने के लिए करीब 300 टैब खरीदने का प्रस्ताव है। एक टैबलेट की अनुमानित कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये तक बताई जा रही है और पूरी खरीद पर करीब 5 से 6 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। हालांकि, अभी यह प्रस्ताव अंतिम नहीं हुआ है। प्रस्ताव प्रशासन के पास जाएगा। प्रशासन इसकी प्रक्रिया पूरी करेगा और इसके बाद संबंधित कमेटी की मंजूरी के बाद ही इसे लागू किया जा सकेगा। पूरी प्रक्रिया में करीब एक से डेढ़ महीने का समय लग सकता है।
असली सियासी सवाल
BMC में टैबलेट का प्रस्ताव सिर्फ डिजिटल सिस्टम का मामला नहीं रह गया है। विपक्ष पूछ रहा है- “जब पार्षदों के पास स्मार्ट मोबाइल और निजी टैबलेट हैं तो BMC के पैसे से नए टैबलेट क्यों?” सत्ता पक्ष का जवाब है- “जब संसद और विधान भवन डिजिटल हो सकते हैं, तो BMC क्यों नहीं?” विपक्ष कह रहा है- “पहले जनता के इलाके में सड़क, नाले और अस्पताल ठीक करो।” सत्ता पक्ष कह रहा है- “पेपरलेस सिस्टम से लंबे समय में BMC का खर्च ही कम होगा।” यानी करीब 5 से 6 करोड़ रुपये के टैबलेट पर अब BMC में टेक्नोलॉजी बनाम फिजूलखर्ची की सियासत शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि BMC को पेपरलेस और हाईटेक बनाने का यह प्रस्ताव वास्तव में मुंबईकरों के पैसे और समय की बचत करता है या फिर 5 से 6 करोड़ रुपये की टैबलेट खरीद राजनीतिक विवाद में उलझ जाती है।
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