Highlights
- पेपर लीक पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए मोदी सरकार ने पेश किया ‘एंटी पेपर लीक बिल’
- ‘एंटी पेपर लीक बिल’ के जरिए सरकार 2024 के पुराने कानून में कई अहम बदलाव करेगी
- परीक्षाओं की पारदर्शिता और पेपर लीक से जुड़े दोषियों को जल्द कठोर सजा दिलाने के लिए लाया गया बिल
पेपर लीक के मुद्दे पर सड़क की लड़ाई अब संसद में आ गई है। पेपर लीक कानून को और ताकतवर बनाने के लिए सरकार ने संसद में ‘एंटी पेपर लीक बिल’ पेश कर दिया है। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बिल पेश किया है। बीते दिनों जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद सरकार पेपर लीक के खिलाफ संसद में कड़े कानूनों वाला बिल लेकर आई है। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार ने यह बिल संसद में पेश कर दिया है। इस प्रस्तावित कानून के तहत हर राज्य में पेपर लीक के मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे, जहां रोजाना सुनवाई होगी और 90 दिन के अंदर ट्रायल पूरा कर सजा का ऐलान किया जाएगा।
अब मुद्दे को भटकाने की कोशिश न हो। कांग्रेस और विपक्ष से अपील है कि बच्चों के भविष्य को लेकर सरकार जो रिफॉर्म लेकर आई है, उस पर चर्चा जरूरी है। ये राजनीति का समय नहीं है। किसी की बहानेबाजी अब नहीं चलेगी। छात्रों के लिए लाया गया बिल पास होगा। ये सरकार की प्राथमिकता है।” – किरेन रिजिजू, संसदीय कार्य मंत्री
पुराने कानून और नए संशोधन बिल में क्या-क्या अंतर है?
- सजा: 2024 के कानून में जहां पहले 3 से 5 साल तक की सजा का प्रावधान था तो वहीं अब नए संशोधन बिल के मुताबिक इसे बढ़ाकर 5 से 10 साल कर दिया जाएगा।
- जुर्माना: 2024 के कानून में जहां पहले पेपर लीक के लिए 10 लाख का जुर्माना लगाया जाता था तो वहीं अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया जाएगा।
- जांच एजेंसी: पुराने कानून के तहत पहले सेंट्रल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच करती थी, तो वहीं अब नए संसोधन बिल के मुताबिक पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा।
- जांच पूरी: 2024 के कानून में पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच पूरी करने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं थी, लेकिन अब नए संशोधन में 2 महीने के भीतर जांच पूरी करने की बात कही गई है।
- सुनवाई: पुराने कानून के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई सामान्य अदालत में होती थी, जबकि संशोधन के बाद पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी।
- फैसला: 2024 के कानून के मुताबिक पेपर लीक से जुड़े मामलों में फैसला सुनाने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं थी। हालांकि संशोधन बिल में पेपर लीक से जुड़े मामलों में 3 महीने के भीतर फैसला सुनाने का प्रावधान है।
- हाईकोर्ट में अपील: पुराने कानून के मुताबिक पेपर लीक से जुड़े मामलों के लिए हाईकोर्ट में अपील का समय तय नहीं था, जबकि अब 30 दिन में ही हाईकोर्ट में अपील कर सकेंगे।
- हाईकोर्ट का फैसला: 2024 के कानून के तहत हाईकोर्ट के फैसले के लिए कोई समय तय नहीं था, लेकिन संशोधन बिल के मुताबिक ऐसे मामलों में 3 महीने में ही हाईकोर्ट का फैसला भी आ जाएगा।
पीएम मोदी युवाओं से कर रहे संवाद
पीएम मोदी पेपर लीक के मामले पर लगातार युवाओं से संवाद कर रहे हैं। उन्होंने पहली बार 23 जुलाई को वीडियो जारी कर पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून लाने की बात कही थी, फिर 24 जुलाई को GenZ को सपोर्ट के लिए थैंक्यू कहा था। अब 26 जुलाई को उन्होंने हाई पावर टास्क फोर्स के गठन की बात कही। अपने तीसरे वीडियो संदेश में पीएम मोदी ने हाई पावर टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया है।
हाई पावर टास्क फोर्स का गठन
पीएम मोदी ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाली 6 सदस्यों की ये कमेटी सरकार को पेपर लीक रोकने के सुझाव देगी, साथ ही परीक्षा में पार्दर्शिता लाने के तरीके भी बताएगी। पीएम मोदी ने कहा कि पेपर लीक के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हमने फास्ट ट्रैक कोर्ट भी बना दिया है। परीक्षा प्रणाली को और पारदर्शी बनाया जाएगा। ये कमेटी सरकार को बताएगी कि एग्ज़ाम सिस्टम में टेक्नॉलाजी कैसे ट्रांसपेरेंसी लाएगी और परीक्षाओं पर भरोसा मज़बूत होगा।
प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान
जंतर मंतर पर प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद पीएम मोदी ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को दे दी है। नेतृत्व में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब भारत की शिक्षा व्यवस्था बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने और स्कूलों के लिए नया पाठ्यक्रम लाने में जुटी है। सरकार को उम्मीद है कि प्रह्लाद जोशी के अनुभव से शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों को गति मिलेगी। शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वो पीएम मोदी की उम्मीदों को पूरा करने की पूरी कोशिश करेंगे।
अबतक क्या-क्या कार्रवाई की गई?
फिलहाल पेपर लीक मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए सरकार ने NTA के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। जिन अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है, उनके खिलाफ क्रिमिनल केस भी दर्ज किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक यह कदम NTA में बड़े पैमाने पर हो रहे बदलाव के तहत उठाया गया है। NTA में सुधार के लिए जल्द ही और एक्शन लिए जाएंगे। इससे पहले गुरुवार को सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों को बदला था। इस एक्शन के साथ ही अब NTA के आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बदलाव और तकनीकी सुधार लागू किए जाने की तैयारी है, जिससे परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके। इधर दिल्ली पुलिस ने देश की सभी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच के लिए STF का गठन किया है। इसके दायरे में UPSC से NTA तक सभी प्रमुख परीक्षाएं होंगी। पेपर लीक मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जा चुका है।
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