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भूकंप या किसी हादसे में मलबे के नीचे दबे लोगों की जान बचाना अब आसान होगा. ऑस्ट्रेलिया के रिसर्चर्स ने पैरामेडिक साइबोर्ग कॉकरोच तैयार किए हैं. इन्हें पैराबोर्ग्स नाम दिया गया है. ये रोबोटिक कॉकरोच मलबे में घुसकर घायलों को जीवन रक्षक दवाएं इंजेक्ट कर सकते हैं. इनके शरीर पर कैमरे और मेडिकल इंजेक्टर लगे हैं. यह नई तकनीक रेस्क्यू ऑपरेशन में गेम चेंजर साबित होगी. इससे मुश्किल हालातों में फौरन मेडिकल हेल्प मिलेगी.

नेपाल जैसी बाढ़ हो या भूकंप, इंसानों को मौत के मुंह से खींच लाएंगे ये 'कॉकरोच'Zoom

ऑटो-इंजेक्टर ले जाती हुई कॉकरोच. (फोटो क्रेडिट: यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड)

नई दिल्ली: नेपाल जैसी फ्लैश फ्लड, किसी इमारत के ढहने या गुफा में फंसने पर जान बचाना सबसे मुश्किल काम होता है. ऐसी जगहों पर इंसान या बड़े रोबोट आसानी से नहीं पहुंच सकते. लेकिन अब इस मुश्किल काम को कॉकरोच अंजाम देंगे. ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के वैज्ञानिकों ने एक कमाल की रिसर्च की है. उन्होंने पैरामेडिक साइबोर्ग कॉकरोच तैयार किए हैं. इन कॉकरोच को पैराबोर्ग्स का नाम दिया गया है. इन खास कॉकरोच के शरीर पर कैमरे और छोटे मेडिकल इंजेक्टर फिट किए गए हैं. ये आसानी से मलबे के संकरे रास्तों में घुस सकते हैं. वहां पहुंचकर ये घायलों की तलाश करते हैं. जरूरत पड़ने पर ये मरीजों को जीवन रक्षक दवाएं भी इंजेक्ट कर सकते हैं. हाल ही में हुए ट्रायल्स में इन कॉकरोच ने 72 प्रतिशत सफलता हासिल की है. यह एडवांस साइंस की दुनिया में एक बहुत बड़ा कदम है. इससे भविष्य के रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी तरह बदल जाएंगे.

आखिर कैसे काम करते हैं ये जीवन रक्षक पैराबोर्ग्स कॉकरोच?

यह पूरा सिस्टम कम से कम दो कॉकरोच पर निर्भर करता है. इसमें एक ऑब्जर्वर कॉकरोच होता है. इसके ऊपर एक वाई-फाई कैमरा लगा होता है. यह कैमरा कंट्रोल रूम के कंप्यूटर पर रियल टाइम तस्वीरें भेजता है. इससे पीड़ितों की लोकेशन का पता चलता है. इसके साथ ही यह ऑब्जर्वर कॉकरोच दवा देने वाले दूसरे कॉकरोच पर भी नजर रखता है.

दूसरे कॉकरोच की पीठ पर एक छोटा ऑटो-इंजेक्टर लगा होता है. टारगेट मिलने पर एक स्प्रिंग मैकेनिज्म एक्टिवेट होता है. यह केमिकल रिएक्शन से पैदा हुए प्रेशर का इस्तेमाल करता है. इस प्रेशर से मरीज को फौरन दवा इंजेक्ट हो जाती है.

इस रिसर्च में नॉर्थ क्वींसलैंड जायंट बरोइंग कॉकरोच का इस्तेमाल हुआ है. ये कॉकरोच 8.7 सेंटीमीटर तक लंबे और 4.5 सेंटीमीटर चौड़े होते हैं. इनका वजन 40 ग्राम तक हो सकता है. इनकी उम्र भी 10 साल तक होती है. इसलिए ये इस काम के लिए एकदम परफेक्ट माने गए हैं. इनकी मदद से रेस्क्यू टीम किसी भी इंसान तक आसानी से पहुंच सकती है.
कैमरा (दाएं) और ऑटो-इंजेक्टर (बाएं) ले जाते हुए कॉकरोच. (फोटो क्रेडिट: यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड)

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दीपक वर्माDeputy News Editor

दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…

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