नेपाल में बुधवार सुबह आई अचानक भीषण बाढ़ ने कुछ ही घंटों में भारी तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि सड़कें, पुल, घर और जलविद्युत परियोजनाएं इसकी जद में आ गईं। रसुवा जिले में सबसे ज्यादा नुकसान की खबर है। खबर लिखे जाने तक 46 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 93 लोग घायल हुए हैं और कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है- आखिर बिना बेहद भारी बारिश के इतनी खतरनाक बाढ़ आई कैसे?
सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण से इस बाढ़ की वजह सामान्य मॉनसूनी बारिश नहीं, बल्कि पहाड़ों में हुई एक बड़ी प्राकृतिक घटना होने के संकेत मिल रहे हैं। Planet Labs ने एक वीडियो जारी किया है। इन सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण से संकेत मिलते हैं कि नेपाल-चीन बॉर्डर के पास रसुवागढ़ी सीमा चौकी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा भूस्खलन हुआ। इसका असर ल्हेंदे नदी पर पड़ा और वहां अचानक पानी का दबाव बढ़ गया। पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा नदी में गिरा और उसने कुछ वक्त के लिए पानी का रास्ता रोक दिया। इसके बाद नदी के पीछे पानी जमा होता गया। जब यह प्राकृतिक बांध अचानक टूटा, तो जमा हुआ पानी एक बेहद तेज लहर की तरह नीचे की तरफ बह निकला। यही पानी आगे चलकर भोटेकोशी नदी में मिला और अचानक नदी का जलस्तर खतरनाक तरीके से बढ़ गया।
वैज्ञानिक बर्फीले हिमस्खलन और अचानक आई पानी की तेज लहर के बीच संभावित संबंध की भी जांच कर रहे हैं। काठमांडू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और जलवायु शोधकर्ता रिजान भक्त कायस्थ ने बताया कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार, एक बर्फीले हिमस्खलन ने ल्हेंदे नदी के प्रवाह को रोक दिया होगा। इसके कारण पानी जमा होता गया और जब यह अवरोध टूटा, तो पानी का अचानक तेज बहाव नीचे की ओर आया और भोटेकोशी नदी में मिल गया।
भूकंप ने भी बढ़ाया शक
इस घटना के दौरान तिब्बती इलाके में भूकंप भी दर्ज किया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। इसका केंद्र गोसाईंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में बताया गया है। इसके कुछ ही समय बाद, करीब 9 बजे, तिब्बत की तरफ से भोटेकोशी नदी में तेज बहाव आने की खबर सामने आई।
किन इलाकों पर पड़ा असर?
अचानक आए इस फ्लैश फ्लड का असर नेपाल के कई इलाकों में दिखाई दिया। रसुवा और धादिंग जैसे तिब्बत सीमा से लगे जिलों के अलावा नुवाकोट में भी हालात प्रभावित हुए। तेज पानी ने रास्तों और पुलों को नुकसान पहुंचाया। कई घरों और जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान की खबर है। अचानक आई इस आफत की वजह से लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
भारत में भी बढ़ी चिंता
नेपाल की इस बाढ़ का असर भारत में भी पड़ सकता है, खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में। वजह है नेपाल से भारत की तरफ आने वाली नदियां। बिहार में गंडक नदी के जलस्तर को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
नेपाल और यूपी में अलर्ट
बिहार के डिप्टी सीएम विजय चौधरी के मुताबिक, नेपाल से करीब 1.5 लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी आने का अनुमान है। इससे गंडक नदी में कुल डिस्चार्ज करीब 2.5 लाख से 2.75 लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है।
देवघाट पर क्यों है नजर?
नेपाल में देवघाट एक अहम जगह है, जहां से गंडक नदी में आने वाले पानी के प्रवाह का आकलन किया जाता है। फिलहाल वहां जलस्तर करीब 4.7 मीटर बताया गया है। अनुमान है कि आने वाले पानी के कारण जलस्तर में करीब 3 मीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो जलस्तर करीब 7.7 से 8 मीटर तक पहुंच सकता है। हालांकि, ज्यादा खतरा तब माना जाएगा जब यहां जलस्तर करीब साढ़े 8 से 9 मीटर के ऊपर पहुंच जाए।
बिहार के डिप्टी ने कहा कि पानी आने के अनुमान को देखते हुए हम स्थिति को नियंत्रण से बाहर नहीं जाने देंगे। अभी गंडक नदी में डिस्चार्ज 1 लाख क्यूसेक से भी कम है। अनुमान है कि नेपाल से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी आ सकता है। इस हिसाब से गंडक में कुल डिस्चार्ज ढाई लाख से पौने तीन लाख क्यूसेक के आस-पास रहने की संभावना है। इसे देखते हुए सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है।
बिहार में अलर्ट
भारतीय नागरिकों के लिए इमरजेंसी नंबर
नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिक किसी भी आपात स्थिति में भारतीय दूतावास से संपर्क कर सकते हैं।
+977 985 131 6807
+977 970 910 7500
इन दोनों नंबरों पर WhatsApp के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।
इसके अलावा नेपाल के टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस नंबर 9851289445 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
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