उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्लीपर बस के अंदर नाबालिग लड़की के साथ हुई दुष्कर्म की घटना के बाद सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी के बाद कानपुर पुलिस ने भी स्लीपर और लंबी दूरी की बसों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस दौरान शहर में ‘ऑपरेशन अलर्ट’ चलाकर बसों की सघन चेकिंग की जा रही है। ऐसे में अब पुलिस का फोकस सिर्फ बस के कागजों तक सीमित नहीं है। अब यह भी देखा जा रहा है कि बस के अंदर पर्दों की आड़ में ऐसी कोई व्यवस्था तो नहीं, जिससे बाहर से अंदर की गतिविधियां दिखाई ही ना दें।

नोएडा की घटना के बाद कानपुर में क्यों बढ़ी सख्ती?

ऑपरेशन अलर्ट की जानकारी पर जॉइंट पुलिस कमिश्नर विपिन ताडा ने बताया कि कानपुर के अंदर स्लीपर बसों में यात्रियों को निजी केबिन जैसा माहौल देने के लिए लगाए जाने वाले पर्दे सुरक्षा के लिहाज से चुनौती बन सकते हैं। इसी को देखते हुए कानपुर पुलिस ऐसी बसों पर विशेष नजर रख रही है, जिनमें अनधिकृत तरीके से पर्दे लगाए गए हैं या ब्लैक फिल्म के जरिए अंदर का हिस्सा पूरी तरह ढका हुआ है, पुलिस का सीधा फोकस है, बस के अंदर कुछ गलत हो तो वह पर्दों के पीछे छिपा ना रह जाए।

ड्राइवर-कंडक्टर की सिर्फ ID नहीं, कुंडली भी देखेगी पुलिस

जॉइंट कमिश्नर विपिन ताडा के अनुसार ऑपरेशन अलर्ट के तहत स्लीपर और लंबी दूरी की बसों के चालक और परिचालकों का पुलिस सत्यापन कराया जाएगा। उनके पहचान संबंधी दस्तावेजों के साथ-साथ आपराधिक इतिहास की भी जांच होगी। किसी चालक या कंडक्टर के खिलाफ पहले से मुकदमा दर्ज है या उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड सामने आता है, तो पुलिस नियमानुसार कार्रवाई करेगी। यानी अब बस चलाने वाले और यात्रियों के बीच सिर्फ टिकट का रिश्ता नहीं होगा, पुलिस की नजर में उनकी पृष्ठभूमि भी जांच के दायरे में होगी।

पर्दे के पीछे क्या है? पुलिस करेगी पड़ताल

अभियान के दौरान बसों के भीतर जाकर सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जा रही है। पुलिस यह देख रही है कि बस में लगाए गए पर्दे नियमों के मुताबिक हैं या नहीं और कहीं पूरी बस के हिस्से को इस तरह तो नहीं ढका गया है कि निगरानी मुश्किल हो जाए। ब्लैक फिल्म और अनधिकृत पर्दों के इस्तेमाल पर भी कार्रवाई की जाएगी।

बस ऑपरेटरों को भी सख्त निर्देश

पुलिस ने परिवहन से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी की है। इसमें बस ऑपरेटर यूनियन, कैब ऑपरेटर यूनियन और लोकल बस ऑपरेटर यूनियन के प्रतिनिधियों को शामिल किया जा रहा है। बस संचालकों को चालक और परिचालक की नियुक्ति से पहले उनका सत्यापन कराने और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

खुफिया तंत्र भी जुटाएगा जानकारी

ऑपरेशन अलर्ट में पुलिस के साथ खुफिया तंत्र को भी सक्रिय किया गया है। चालक, परिचालक और परिवहन व्यवस्था से जुड़े लोगों के संबंध में आवश्यक जानकारी जुटाकर उनका सत्यापन किया जाएगा। निर्धारित जानकारी उपलब्ध नहीं कराने या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अब बस के अंदर भी रहेगी पुलिस की नजर

नोएडा की घटना के बाद कानपुर पुलिस का संदेश साफ है, स्लीपर बस में सफर करने वाला यात्री अकेला नहीं है, उसकी सुरक्षा पर पुलिस की नजर है। बस के अंदर पर्दे की आड़ हो या चालक-कंडक्टर का संदिग्ध अतीत, अब दोनों की जांच होगी। ‘ऑपरेशन अलर्ट’ के जरिए पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सफर के दौरान सुरक्षा किसी पर्दे के पीछे छिपकर कमजोर ना पड़े।

(रिपोर्ट – अनुराग श्रीवास्तव)

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