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न खेत में बोया, न रोपा फिर भी उगता है ये चावल! छठ माता की पूजा में है महत्व

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सुल्तानपुर: चावल की कई किस्में आपने खाई होंगी, लेकिन अवध क्षेत्र में मिलने वाला पसई या पसाढ़ी चावल अपनी अलग पहचान रखता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इसकी खासियत यह है कि इसकी सामान्य धान की तरह बुवाई या रोपाई नहीं की जाती, बल्कि यह खाली जगहों पर प्राकृतिक रूप से उगता है. भाद्रपद की छठी तिथि को छठ माता की पूजा के दौरान इससे जुड़ी विशेष परंपरा भी निभाई जाती है. यही वजह है कि यह चावल स्थानीय खान-पान के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है.

सुल्तानपुर: आपने सफेद और काले चावल के बारे में तो खूब सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी ऐसे भूरे चावल के बारे में सुना है, जिसकी न तो बुवाई की जाती है और न ही रोपाई? सुल्तानपुर और अवध क्षेत्र में पसई या पसाढ़ी का चावल इसी खासियत के लिए जाना जाता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह चावल खाली जगहों पर अपने आप उग आता है और भाद्रपद महीने की छठी तिथि को होने वाली छठ माता की पूजा में इसका विशेष महत्व है.

स्थानीय महिला पुष्पा देवी के मुताबिक, छठ माता के पूजन के दौरान महिलाएं पसाढ़ी के चावल का सेवन करती हैं. इस दिन दूसरे प्रकार के चावल खाने की परंपरा नहीं बताई जाती. स्थानीय मान्यता के अनुसार, पुत्र प्राप्ति वाली महिलाएं इस चावल को पकाकर खाती हैं. यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है.

पसई चावल की सबसे खास बात इसकी प्राकृतिक रूप से उगने की परंपरा है. स्थानीय लोगों के अनुसार, इसके लिए खेत में अलग से बुवाई या रोपाई नहीं की जाती. खाली पड़ी जगहों या खेतों में यह अपने आप उगता है. इसी वजह से इसे सामान्य धान की खेती से अलग माना जाता है. हालांकि, इसके प्राकृतिक रूप से उगने और कृषि संबंधी गुणों को लेकर स्थानीय अनुभव और वैज्ञानिक जानकारी अलग-अलग हो सकती है.

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अवध क्षेत्र में भाद्रपद महीने की छठी तिथि को छठ माता की पूजा से पसाढ़ी चावल को जोड़कर देखा जाता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, पूजा करने वाली महिलाएं इस दिन पसई चावल से तैयार भोजन ग्रहण करती हैं. पुष्पा देवी बताती हैं कि इस चावल को पकाने और खाने की भी एक खास परंपरा है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसे गाय के घी के बजाय भैंस के घी के साथ पकाकर खाया जाता है. इसके साथ महुआ और करमवा का साग खाने की परंपरा भी बताई जाती है.

सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, पसई चावल को लेकर स्थानीय स्तर पर इसके पोषण संबंधी फायदे भी बताए जाते हैं. उनका कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को वजन नियंत्रित करना है तो फाइबर युक्त और संतुलित आहार मददगार हो सकता है. हालांकि, किसी एक चावल को वजन घटाने की गारंटी देने वाला खाद्य पदार्थ नहीं माना जा सकता. वजन प्रबंधन के लिए पूरी डाइट, शारीरिक गतिविधि और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति महत्वपूर्ण होती है.

डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, पसई चावल में मैग्नीशियम जैसे खनिज पोषक तत्व पाए जाते हैं. मैग्नीशियम शरीर में हड्डियों और मांसपेशियों समेत कई सामान्य कार्यों में भूमिका निभाता है. हालांकि, हड्डियों को मजबूत रखने के लिए केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहना उचित नहीं है. कैल्शियम, विटामिन D, प्रोटीन और संतुलित आहार के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण है. पसाढ़ी चावल की खासियत सिर्फ इसका रंग या स्वाद नहीं, बल्कि इससे जुड़ी स्थानीय परंपरा भी है. छठ माता की पूजा से इसका जुड़ाव अवध क्षेत्र की लोक-संस्कृति और खान-पान की पुरानी परंपराओं को दर्शाता है.

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