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दुनिया की दो सबसे बड़ी टेक कंपनियों ऐपल (Apple) और माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने अपने सबसे चर्चित प्रोडक्ट्स में नंबर 9 को छोड़ दिया था. हालांकि, इसके पीछे कोई अंधविश्वास नहीं था. ऐपल ने आईफोन के 10 साल पूरे होने पर iPhone X लॉन्च किया, जबकि माइक्रोसॉफ्ट ने पुराने सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए Windows 10 नाम चुना. iPhone 9 और Windows 9 का कभी अस्तित्व नहीं रहा, लेकिन इसकी वजह बेहद दिलचस्प है. ऐपल अपने नए फोन को एक ऐतिहासिक माइलस्टोन के रूप में पेश करना चाहती थी, वहीं माइक्रोसॉफ्ट को Windows 95 और Windows 98 से जुड़ी कम्पैटिबिलिटी समस्याओं का खतरा था. दोनों कंपनियों के फैसले बाद में पूरी तरह सफल साबित हुए.

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न iPhone 9 आया, न Windows 9, कंपनियों ने क्यों सीधे 8 से 10 पर मार ली छलांगZoom

ऐपल और माइक्रोसॉफ्ट के फैसलों ने समय के साथ खुद को सही साबित किया. (AI)

नई दिल्ली. न iPhone 9 आया, न Windows 9. टेक्नोलॉजी की दुनिया में यह एक ऐसा सवाल है, जिसने सालों से लोगों को हैरान किया है. जब कंपनियां आमतौर पर एक के बाद एक नंबर के साथ अपने प्रोडक्ट लॉन्च करती हैं, तो फिर दुनिया की दो सबसे बड़ी टेक कंपनियों ने 8 के बाद सीधे 10 पर जाने का फैसला क्यों किया. कई लोगों को लगता है कि इसके पीछे कोई अंधविश्वास या नंबर 9 से जुड़ी मान्यता रही होगी, लेकिन असल वजह पूरी तरह बिजनेस और टेक्निकल जरूरतों से जुड़ी थी.

दिलचस्प बात यह है कि ऐपल (Apple) और माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) दोनों ने नंबर 9 को छोड़ा जरूर, लेकिन दोनों के कारण बिल्कुल अलग थे. एक कंपनी ऐसा करके अपने प्रोडक्ट को ऐतिहासिक बनाना चाहती थी, जबकि दूसरी कंपनी को पुराने सॉफ्टवेयर से जुड़ी बड़ी तकनीकी समस्या से बचना था.

iPhone 9 को छोड़कर क्यों आया iPhone X

साल 2017 ऐपल के लिए बेहद खास था. इसी साल ओरिजिनल आईफोन को लॉन्च हुए 10 साल पूरे हुए थे. कंपनी इस मौके को सिर्फ एक और सामान्य स्मार्टफोन लॉन्च के रूप में पेश नहीं करना चाहती थी. अगर ऐपल नया फोन iPhone 9 नाम से लॉन्च करती, तो यह लोगों को एक सामान्य अपग्रेड जैसा लगता. इसलिए कंपनी ने सीधे iPhone X लॉन्च किया. यहां X रोमन अंक 10 का प्रतीक था, जो आईफोन के 10 साल पूरे होने का जश्न भी था.

कंपनी ने सिर्फ नाम ही नहीं बदला, बल्कि फोन में भी बड़े बदलाव किए. iPhone X पहला ऐसा आईफोन था जिसमें होम बटन हटाया गया, फुल स्क्रीन डिस्प्ले दी गई और Face ID जैसी नई तकनीक पेश की गई. ऐपल दुनिया को यह संदेश देना चाहती थी कि यह सिर्फ नया मॉडल नहीं बल्कि आईफोन के नए दौर की शुरुआत है.

Windows 9 को छोड़ने की वजह थी तकनीकी समस्या

माइक्रोसॉफ्ट की कहानी पूरी तरह अलग है. कंपनी Windows 8.1 के बाद अपने अगले ऑपरेटिंग सिस्टम का नाम Windows 9 रखने पर विचार कर रही थी, लेकिन इंजीनियरों को एक बड़ी तकनीकी दिक्कत का सामना करना पड़ा. 1990 के दशक में Windows 95 और Windows 98 बेहद लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्टम थे. उस समय कई सॉफ्टवेयर डेवलपर्स ने अपने प्रोग्राम में शॉर्टकट कोड लिखे थे, जो “Windows 9” देखकर Windows 95 या Windows 98 की पहचान करते थे. अगर माइक्रोसॉफ्ट बाद में वास्तव में Windows 9 लॉन्च कर देती, तो पुराने प्रोग्राम भ्रमित हो सकते थे. वे Windows 9 को Windows 95 या Windows 98 समझ लेते, जिससे सॉफ्टवेयर क्रैश होने और कम्पैटिबिलिटी से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती थीं. हजारों पुराने प्रोग्राम्स को दोबारा ठीक करना लगभग असंभव था. ऐसे में माइक्रोसॉफ्ट ने सबसे आसान रास्ता चुना और सीधे Windows 10 लॉन्च कर दिया.

दोनों कंपनियों का फैसला कैसे साबित हुआ सही

ऐपल और माइक्रोसॉफ्ट के फैसलों ने समय के साथ खुद को सही साबित किया. iPhone X कंपनी के सबसे चर्चित और सफल स्मार्टफोन्स में शामिल हुआ और इसके बाद iPhone 11, iPhone 12, iPhone 13 जैसे मॉडल्स की नई श्रृंखला शुरू हुई. दूसरी तरफ, Windows 10 माइक्रोसॉफ्ट के इतिहास के सबसे लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम्स में से एक बना. इसके बाद कंपनी ने Windows 11 लॉन्च किया और नंबर 9 की कमी किसी को महसूस नहीं हुई.

वजह थी व्यवहारिक

पहली नजर में यह अजीब लग सकता है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी टेक कंपनियों ने एक ही नंबर को छोड़ दिया. लेकिन दोनों मामलों में फैसला पूरी तरह सोच समझकर लिया गया था. ऐपल ने iPhone X के जरिए अपने सबसे बड़े माइलस्टोन को यादगार बनाया, जबकि माइक्रोसॉफ्ट ने Windows 10 के जरिए भविष्य की तकनीकी परेशानियों से बचने का रास्ता चुना. यही वजह है कि आज भी iPhone 9 और Windows 9 टेक्नोलॉजी इतिहास के सबसे दिलचस्प “मिसिंग नंबर” माने जाते हैं.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें



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