Gujarati Farsan Recipes: बारिश की पहली फुहार पड़ते ही सबसे पहले जिस चीज़ की याद आती है, वह है गर्मागर्म चाय और उसके साथ कुछ कुरकुरा, मसालेदार नाश्ता. हर राज्य की अपनी अलग बारिश वाली फूड परंपरा होती है, लेकिन गुजरात का फरसान इस मामले में सबसे खास माना जाता है. बेसन, दाल, हरी पत्तेदार सब्जियां और देसी मसालों से बनने वाले ये स्नैक्स स्वाद के साथ-साथ पेट भी भर देते हैं. खास बात यह है कि इनमें से कई रेसिपी घर में मौजूद सामान्य सामग्री से आसानी से तैयार हो जाती हैं.

अगर आप भी इस मानसून अपनी शाम की चाय को थोड़ा खास बनाना चाहते हैं, तो गुजरात के ये पांच पारंपरिक फरसान जरूर ट्राई करें. इनका स्वाद ऐसा है कि एक बार खाने के बाद हर बारिश में इन्हीं की फरमाइश होने लगेगी.

बारिश में क्यों पसंद किए जाते हैं गुजराती फरसान?
गुजरात में फरसान केवल स्नैक नहीं बल्कि खाने की संस्कृति का अहम हिस्सा है. मानसून के मौसम में हल्की ठंडक और नमी के बीच गर्म, ताजा और मसालेदार फरसान शरीर को सुकून देते हैं. इन व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाली दाल, बेसन, मेथी और मसाले स्वाद बढ़ाने के साथ पौष्टिकता भी देते हैं. अदरक वाली चाय या मसाला चाय के साथ इनका मेल बारिश की शाम को और भी यादगार बना देता है.

मेथी ना गोटा: बारिश का सबसे पसंदीदा नाश्ता
ताजी मेथी से आता है खास स्वाद
गुजरात के कई घरों में तेज बारिश के दौरान सबसे पहले मेथी ना गोटा ही बनाए जाते हैं. मोटे बेसन में ताजी मेथी, हरा धनिया, कुटी काली मिर्च, धनिया, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और थोड़ा सा तेल मिलाया जाता है. अंत में थोड़ा बेकिंग सोडा और नींबू का रस डालकर बैटर तैयार किया जाता है. गर्म तेल में तलने पर ये गोटे हल्के, फूले हुए और बेहद मुलायम बनते हैं. दही-पुदीना की चटनी के साथ इनका स्वाद और भी बढ़ जाता है.

दाल वडा: बाहर से कुरकुरा, अंदर से मुलायम
दालों का बेहतरीन स्वाद
अगर आपने कभी गुजरात की बारिश वाली गलियों में दाल वडा खाया है तो उसका स्वाद भूलना आसान नहीं है. इसे बनाने के लिए साबुत हरी मूंग दाल और पीली मूंग दाल को कुछ घंटों तक भिगोकर मोटा पीस लिया जाता है. इसमें बारीक कटी हरी मिर्च, अदरक, हरा धनिया और नमक मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है. इसके बाद छोटे-छोटे वड़े गर्म तेल में मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तले जाते हैं. बाहर से कुरकुरे और अंदर से नरम ये वड़े तली हुई हरी मिर्च और प्याज के साथ बेहद स्वादिष्ट लगते हैं.

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पत्रा: मीठे और मसालेदार स्वाद का अनोखा मेल
अरबी के पत्तों से बनती है खास डिश
पत्रा गुजरात की सबसे पारंपरिक फरसान रेसिपी में से एक है. इसे अरबी के बड़े पत्तों पर बेसन, इमली का गूदा, गुड़, अदरक, हरी मिर्च, तिल और मसालों का मिश्रण लगाकर तैयार किया जाता है. सभी पत्तों को रोल बनाकर स्टीम किया जाता है और ठंडा होने के बाद गोल टुकड़ों में काट लिया जाता है. फिर राई, तिल और हींग के तड़के के साथ हल्का सेंकने पर इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. मीठा, खट्टा और तीखा स्वाद इसे बाकी फरसानों से अलग बनाता है.

खीचू: सादगी में छिपा बेहतरीन स्वाद
मिनटों में तैयार होने वाला पारंपरिक स्नैक
खीचू उन लोगों के लिए बढ़िया विकल्प है जो कम तेल वाला गर्म नाश्ता पसंद करते हैं. पानी में जीरा, हरी मिर्च, अदरक और थोड़ा बेकिंग सोडा डालकर उबाला जाता है. इसके बाद धीरे-धीरे चावल का आटा मिलाकर लगातार चलाया जाता है ताकि गांठें न बनें. कुछ मिनट तक ढककर पकाने के बाद यह मुलायम और चिकना हो जाता है. इसे प्लेट में निकालकर ऊपर से मूंगफली का कच्चा तेल और अचार मसाला डालकर परोसा जाता है. इसकी सादगी ही इसका सबसे बड़ा स्वाद है.

हांडवो: हेल्दी और पेट भरने वाला विकल्प
चाय के साथ पौष्टिक स्नैक
अगर आप तले हुए स्नैक्स से थोड़ा अलग कुछ खाना चाहते हैं तो हांडवो बेहतरीन विकल्प है. इसे चावल, तुअर दाल, चना दाल और उड़द दाल के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जिसे रातभर भिगोकर पीसा और फर्मेंट किया जाता है. इस बैटर में कद्दूकस की हुई लौकी, दही, अदरक, हरी मिर्च और मसाले मिलाए जाते हैं. राई, तिल और करी पत्ते के तड़के के साथ इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है. बाहर से कुरकुरा और अंदर से मुलायम हांडवो मसाला चाय के साथ शानदार लगता है.

मानसून की शाम बन जाएगी यादगार
बारिश के मौसम में हर दिन एक जैसा नाश्ता खाने की बजाय अगर आप गुजरात के इन पारंपरिक फरसानों को आजमाएं, तो चाय का स्वाद कई गुना बढ़ सकता है. इन रेसिपीज़ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये स्वाद, परंपरा और पौष्टिकता का बेहतरीन संतुलन पेश करती हैं. परिवार और दोस्तों के साथ बारिश का आनंद लेने के लिए ये स्नैक्स एक शानदार विकल्प साबित हो सकते हैं.



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