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Royal Indian Food: आज के दौर में मोबाइल पर केवल एक क्लिक से कोई भी व्यंजन घर पर मंगवा सकते हैं या खुद पका सकते हैं. लेकिन आज हम आपको ऐसे 6 व्यंजन के बारे में बताने जा रहे हैं, जो केवल रॉयल और धनी परिवार के यहा मिलते थे. इन व्यंजन का सफर भी बेहद दिलचस्प भरा है. जो व्यंजन पहले ये सिर्फ महलों और अमीर घरों तक सीमित थे, लेकिन धीरे-धीरे भारत के आम खाने का हिस्सा बन गए. आइए जानते हैं इन खास डिशेज के बारे में…

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Royal Indian Food: आज जो कई व्यंजन हमारे लिए आरामदायक खाने बन गए हैं और मोबाइल पर एक क्लिक में मिल जाते हैं. पहले वे कभी सिर्फ राजघरानों और अमीर लोगों के लिए ही बनाए जाते थे. उन दिनों में सामग्री दूर-दूर से आती थी, पकाने में समय और हुनर लगता था और प्लेट में हर चीज स्वाद के साथ-साथ स्टेटस भी दिखाती थी. साथ ही इन रेसिपी को बनाना भी आसान नहीं था इसके लिए अलग से रसोइये भी होते थे क्योंकि हर कोई इनको बना भी नहीं पाता था. आज जो हम शादियों, पारिवारिक डिनर या आम दिनों में आसानी से खाते हैं, वह कभी असली दौलत, जश्न और शाही ठाठ का प्रतीक था. आइए जानते हैं कुछ ऐसे भारतीय व्यंजन, जो पहले लग्जरी माने जाते थे और अब हमारे किचन तक पहुंच गए हैं.

केसर: शाही ठाठ की सुनहरी डोर
पहले केसर जितना महंगा और खास कोई दूसरा मसाला नहीं होता था. हर कोई केसर को अफोर्ड नहीं कर पाते था, केवल रॉयल और धनी फैमली के घरों के खाने में यह मिलता था. इन लोगों के घरों पर केसर सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि शान के लिए भी प्रयोग किया जाता था. मिठाइयों में या चावल के व्यंजनों में केसर डालने से हर रेसिपी में जश्न का अहसास आ जाता था.

बासमती चावल: सिर्फ खाने का सामान नहीं
हर चावल एक जैसा नहीं होता. बासमती चावल, अपनी लंबी ग्रेन और खास खुशबू के साथ खास मौके के लिए चुना जाता था. बासमती चावल अब आसानी से हर घर में मिल जाता है लेकिन पहले ये केवल रॉयल घरों में पाया जाता है. पहले यह चावल केवल पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि खाने की प्रेजेंटेशन, खुशबू और यादगार बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था.

शाही टुकड़ा: राजसी मिठाई
शाही टुकड़ा का मतलब ही है राजसी टुकड़ा. शाही टुकड़ा तले हुए ब्रेड को मीठे दूध में भिगोकर, ऊपर से केसर और ड्राई फ्रूट्स डालकर बनाया जाता है. अपने शाही इतिहास के अनुसार, यह साधारण सामग्री को शाही और रिच मिठाई में बदल देता है. यह राजसी मिठाई आम लोगों की पहुंच से बहुत दूर होती थी

ड्राई फ्रूट्स: शाही सजावट
बादाम, पिस्ता और किशमिश कभी बहुत दुर्लभ थे और अक्सर राजघरानों की रसोई या त्योहारों की थाली में ही मिलते थे. पहले किसी भी डिश में इनका होना समृद्धि और शान का संकेत माना जाता था, जिससे साधारण रेसिपी भी शानदार बन जाती थी. अब तो ज्यादातर घरों में ड्राई फ्रूट्स आसानी से मिल जाते हैं लेकिन पहले इनके लिए युद्ध तक हो जाते हैं.

कबाब: स्वाद और हुनर का मेल
कबाब की शुरुआत शाही व्यंजन के रूप में हुई थी, जिसमें सेंट्रल एशिया और पर्शियन प्रभाव था. राजघरानों में कबाब बनाना एक कला थी, हर कोई यह नहीं बना पाता था इसके लिए खास रसोइये बुलाए जाते हैं, जो मांस को मैरीनेट करना, मसाले मिलाना और धीमी आंच पर पकाना ताकि वह नरम और स्वादिष्ट बने. इसमें लगने वाली मेहनत इसे शाही व्यंजन बनाती थी.

बिरयानी: हर परत में जश्न
बिरयानी आज भले ही आरामदायक खाना हो गया है लेकिन इसकी शुरुआत शाही किचन से हुई थी. पर्शियन खाने के असर से यह एक रिच, लेयर्ड डिश बन गई, जिसमें खुशबूदार चावल, मसाले और मीट के टुकड़े पाए जाते थे. रॉयल और धन परिवारों में यह आसानी से मिल जाता था लेकिन आम घरों में यह पहुंच से बहुत दूर था. बिरयानी को हमेशा खास और जश्न के लिए बनाया जाता था.

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Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें





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