Highlights

  • पंजाब में पुराना हिंदू मंदिर तोड़ा गया
  • भारत के विदेश मंत्रालय ने जताई आपत्ति
  • पाकिस्तान सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग

भारत ने बुधवार को पाकिस्तान के पंजाब में एक सदी पुराने हिंदू मंदिर को तोड़े जाने की खबरों की निंदा की और इस्लामाबाद सरकार से इस घटना की जांच करने और दोषियों को जवाबदेह ठहराने को कहा।इस खबर पर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा,  “हमने पाकिस्तान के नारोवाल ज़िले के सिराज गांव में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को तोड़े जाने की परेशान करने वाली खबरों पर गहरी चिंता जताई है। हम अल्पसंख्यकों के पूजा-स्थल, जो एक सदी पुराना था, के साथ की गई इस निंदनीय तोड़-फोड़ की कड़ी निंदा करते हैं।

अधिकारियों की साफ़ तौर पर दिख रही उदासीनता और इस सदी पुराने मंदिर की सुरक्षा न कर पाना चिंताजनक है। ऐसी घटनाएं इस बात की साफ़ याद दिलाती हैं कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय लगातार असुरक्षित हैं और उनके धार्मिक अधिकारों और पूजा-स्थलों का गंभीर उल्लंघन हो रहा है। हम पाकिस्तान सरकार से मांग करते हैं कि वह इस घटना की तुरंत और पारदर्शी जांच करे और दोषियों को पूरी तरह से जवाबदेह ठहराए। इसके अलावा, पाकिस्तान सरकार को अपवित्र किए गए मंदिर को बहाल करने और अपने सभी अल्पसंख्यक नागरिकों और उनकी सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने की अपनी मुख्य ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।”

 एक बयान में कहा, “हमने पाकिस्तान के नारोवाल ज़िले के सिराज गांव में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को तोड़े जाने की परेशान करने वाली खबरों पर गहरी चिंता जताई है। हम अल्पसंख्यकों के सौ साल पुराने पूजा स्थल के साथ की गई तोड़-फोड़ की इस निंदनीय हरकत की कड़ी निंदा करते हैं।”

जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों की साफ़ तौर पर दिख रही बेरुखी और मंदिर की सुरक्षा न कर पाना चिंताजनक है। उन्होंने कहा, “ऐसी घटनाएं इस बात की साफ़ याद दिलाती हैं कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय लगातार असुरक्षित हैं और उनके धार्मिक अधिकारों व पूजा स्थलों का घोर उल्लंघन हो रहा है।”

 

पाकिस्तानी समाचार आउटलेट ‘द डॉन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, नारोवाल में मंदिर को गिराए जाने से पाकिस्तान में भी विवाद खड़ा हो गया है। एक अल्पसंख्यक अधिकार समूह का आरोप है कि पास के एक मदरसे के विस्तार के लिए इस ढांचे को जानबूझकर गिराया गया था। हालांकि, इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) का दावा है कि भारी बारिश के कारण मंदिर गिर गया।

मंदिर को 21 अगस्त को गिरा दिया गया था। इसके बाद, अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन ‘पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी’ (PMMP) ने आरोप लगाया कि लोगों के एक समूह ने ढांचे को गिराया और वहां से ईंटें, गुंबद से धातु की फिटिंग और अन्य सामान हटा दिया।

PMMP ने मंदिर गिराने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर अधिकारियों से संपर्क भी किया। समूह का कहना है कि मंदिर लगभग 125 साल से भी ज़्यादा पुराना था।





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