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Charminar Famous Churan: हैदराबाद की ऐतिहासिक चारमीनार की गलियों में पाशा भाई का चुलबुला चूरन वर्षों से लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. अपने अनोखे खट्टे-मीठे और मसालेदार स्वाद के कारण यह चूरन बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बचपन की याद दिला देता है. स्थानीय लोगों के साथ-साथ शहर घूमने आने वाले पर्यटक भी इस खास स्वाद का आनंद लेना नहीं भूलते. पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाने वाला यह चूरन चारमीनार की खान-पान संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुका है. स्वाद और यादों का यह अनोखा संगम आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है.
हैदराबाद: ऐतिहासिक चारमीनार की परछाई में बसी हुसैनी अलम की तंग और व्यस्त गलियों में इतिहास सिर्फ इमारतों में नहीं, बल्कि यहाँ के पारंपरिक स्वादों में भी सांस लेता है. इसी इलाके की मशहूर हुसैनी अलम कमान से गुज़रते हुए जब आप ग़ौसिया मस्जिद के करीब पहुँचते हैं, तो मसालों की एक तीखी और सोंधी महक कदम रोकने पर मजबूर कर देती है. यह खुशबू है पाशा भाई चूरन की दुकान की, जो दशकों से शहर के लजीजकदमों का एक अनूठा पड़ाव बनी हुई है. पारंपरिक सफेद टोपी पहने और बड़े-बड़े डिब्बों के बीच बैठे पाशा भाई आज भी अपने खास तरीके से तैयार चूरन बेचते हैं जिसे चखने के लिए पुराने शहर के शौकीनों की भारी भीड़ उमड़ती है.
पाशा भाई की इस छोटी सी दुकान में चटपटे और हाजमेदार स्वादों का एक पूरा खजाना मौजूद है. यहाँ आने वाले ग्राहकों के सामने वैरायटी की एक लंबी फेहरिस्त होती है. इनमें गाढ़े लाल रंग की मीठी चूरन, तीखी जुबान वालों के लिए काली खट्टी चूरन, और चटख रंग वाली लाल खट्टी चूरन सबसे ज्यादा पसंद की जाती है. इसके अलावा पाशा भाई का विशेष शक्कर अनारदाना पाउडर और पारंपरिक हाज़मे की चूरन भी काफी लोकप्रिय हैं. स्वाद के इस सफर को पूरा करते हैं आमचूर के खट्टे-खट्टे टुकड़े, जो मुंह में जाते ही बचपन की यादों को ताजा कर देते हैं.
पुरानी विरासत का एक लजीज हिस्सा बनी हुई
स्थानीय ग्राहकों और नियमित खरीदारों का मानना है कि भारी हैदराबादी खान-पान, जैसे बिरयानी या हलीम के बाद, पाशा भाई की चूरन पेट को एक अनोखी राहत देती है. खुद पाशा भाई बड़े दावे के साथ कहते हैं कि एसिडिटी या सीने की जलन होने पर उनकी हाज़मे वाली चूरन का एक चौथाई चम्मच पानी के साथ लेने से चंद मिनटों में आराम मिल जाता है. हालांकि, आधुनिक चिकित्सक इन औषधीय दावों को पूरी तरह वैज्ञानिक नहीं मानते और इसे केवल अस्थायी राहत या माउथ फ्रेशनर के रूप में देखने की सलाह देते हैं. इसके बावजूद, इस पारंपरिक जायके का आकर्षण जरा भी कम नहीं हुआ है. हुसैनी अलम की यह छोटी सी दुकान आज भी हैदराबाद की समृद्ध खान-पान संस्कृति और पुरानी विरासत का एक लजीज हिस्सा बनी हुई है.
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