Last Updated:

Pedakiya Recipe: घर पर ही बाजार जैसी पीड़िकिया बनाई जा सकती है. हलवाई सीताराम साह ने पारंपरिक पीड़िकिया बनाने की आसान और स्टेप बाय स्टेप विधि बताई. अगर आप इस रेसिपी के हिसाब से मिठाई बनाएंगे तो बिलकुल बाजार वाला स्वाद मिलेगा. पिड़िकिया खस्ता और जूसी बनेगी.

ख़बरें फटाफट

सीतामढ़ी. त्योहारों और खास अवसरों पर पारंपरिक मिठाइयों का अपना एक अलग ही महत्व होता है, जिनमें चाशनी वाली रसीली और खस्ता पीड़िकिया हर किसी की पहली पसंद होती है. इस पारंपरिक मिठाई को बनाने के अनुभवी हलवाई सीताराम साह बताते हैं कि इसकी शुरुआत उत्तम गुणवत्ता वाले मैदे को सही तरीके से गूंथने से होती है. मैदे में मोयन के रूप में घी, डालडा या रिफाइन मिलाकर गरम पानी की मदद से इसे सख्त और बढ़िया गूंथा जाता है, जिससे पीड़िकिया की बाहरी परत बेहद खस्ता और कुरकुरी बनती है.

स्टफिंग से आती है जान
इसके बाद पीड़िकिया की जान यानी इसकी स्वादिष्ट स्टफिंग या भरावन तैयार की जाती है, जिसके लिए शुद्ध दूध को जलाकर गाढ़ा मावा (खोआ) तैयार किया जाता है. हलवाई सीताराम साह के अनुसार, इस मावे में स्वाद और सुगंध बढ़ाने के लिए सौंफ, इलायची पाउडर, बारीक कटा नारियल और किशमिश जैसे मेवे मिलाए जाते हैं. खास बात यह है कि इस भरावन में अंदर चीनी का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जाता, जिससे मावे और सूखे मेवों का असली स्वाद पूरी तरह बरकरार रहता है.

सेंकना है बहुत जरूरी
गूंथे हुए मैदे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें बेला जाता है और फिर उनके अंदर यह मावा और मेवों का मिश्रण भरकर किनारियों को मोड़ते हुए सुंदर आकार दिया जाता है. इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण इन्हें तलने का होता है, जिसके लिए तेल या घी को धीमी आंच पर हल्का गरम किया जाता है. जब तेल में हल्के बुलबुले उठने लगें, तब पीड़िकिया को उसमें डालकर धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तला जाता है, ताकि यह अंदर तक अच्छी तरह पक सके.

चाशनी में डुबाकर खाएं
अंत में एक तार की चाशनी तैयार की जाती है और तली हुई गरम-गरम पीड़िकिया को उसमें 2 से 3 मिनट के लिए डुबोकर निकाला जाता है. जो लोग कम मीठा पसंद करते हैं, वे इसे बिना चाशनी के सूखा भी खा सकते हैं, जबकि ज्यादा मीठा पसंद करने वालों के लिए चाशनी में डूबी रसीली पीड़िकिया परोसी जाती है. सीताराम साह की बताई इस आसान और पारंपरिक विधि से आप भी घर पर ही बाजार जैसी स्वादिष्ट और रसीली पीड़िकिया बनाकर सबका दिल जीत सकते हैं.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …

और पढ़ें



Source link

Write A Comment