बारिश का मौसम आ चुका है. ऐसे में बाजार में सब्जी की किल्लत दिखती है. अगर सब्जी मिलती भी है तो वह काफी महंगी होती है. ऐसे में पुराने जमाने के लोग घरों में एक चटपटी सब्जी बनाकर रखा करते थे. इस सब्जी खासियत होती है कि अगर आपने इसे एक दिन पका लिया तो इसे चार-पांच रोज आसानी से खाया जा सकता है. यह इतनी चटपटी होती है कि इसके साथ कोई भी दो रोटी एक्स्ट्रा खा ले. इसमें खट्टा और मीठा दोनों स्वाद होता है. सबसे अच्छी बात यह है कि यह सब्जी बेहद आसान तरीके से बन जाती है. जी हां आप बिलकुल सही अंदाजा लगा रहे हैं, इस सब्जी का नाम है अमरा या अमड़ा.
देश में अलग-अलग नामों से जाना जाता है अमड़ा
यूं तो अमड़ा या अमरा देश के लगभग हर हिस्से में पाया जाता है, लेकिन आमतौर पर इसकी बड़े पैमाने पर बागवानी खेती नहीं होती है. सामान्य तौर पर लोग अपने बगीचे में दो-चार पेड़ लगा लेते हैं. उसी में से कुछ पैदावार मार्केट में बिकने के लिए आते हैं. अमरा (Amra) को अंग्रेजी में Hog Plum कहते हैं. वहीं आम बोलचाल में इसे अंबड़ा या आमड़ा भी कहा जाता है. इस सब्जी को अंबड़ा, आमड़ा (बंगाली), अंबाड़ा, आम्रातक (संस्कृत), अंबाडा (मराठी), अमरा (गुजराती), मत्तगीरी (तमिल) या अंबूझम, अमिटम (तेलुगु) नाम से जाना जाता है. इस सब्जी का वैज्ञानिक नाम स्पोंडियस मोम्बिन (Spondias mombin) या स्पोंडियस पिन्नाटा (Spondias pinnata) है.
अमड़ा का स्वाद कैसा होता है?
अमरा या अमड़ा का स्वाद खट्टा होता है. बच्चे इसे कई बार नमक के साथ मिलाकर भी खाते हैं. यह कच्चे आम से भी ज्यादा खट्टा होता है. हालांकि इसमें मानव शरीर को फायदा पहुंचाने वाले कई चीजें पाई जाती है. अमरा में सबसे ज्यादा विटामिन C पाया जाता है. इसके अलावा विटामिन A, विटामिन B-कॉम्प्लेक्स भी प्रचूर मात्रा में पाया जाता है. इस सब्जी में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और फास्फोरस भी पाया जाता है. यानी स्वस्थ्य इंसान के शरीर के लिए उपयोगी कई महत्वपूर्ण चीजें अमरा या अमड़ा सब्जी में पाया जाता है.
अमड़ा का अंगूरा बनाने के लिए सामग्री
अगर आप परिवार में चार लोगों के लिए अमड़ा का अंगूरा बनाना चाहते हैं और केवल एक बार में खाकर फिनिश करना चाहते हैं तो इस हिसाब से सामग्री लें-:
- अमड़ा: 250 ग्राम
- मेथी: 15-20 दाने
- सौंफ: 15-20 दाने
- धनिया पाउडर: एक छोटी चम्मच
- तेज पत्ता: 2
- लौंग: 4 पीस
- काली मिर्च पाउडर: एक छोटा चम्मच
- भूना जीरा पाउडर: एक छोटा चम्मच
- सरसो तेल: दो छोटा चम्मच
- गुड़: 100 ग्राम
- चीनी: 25 ग्राम
- नमक: दो छोटी चुटकी
अमड़ा का अंगूरा बनाने का प्रोसेस
सबसे पहले बाजार से लाए गए अमरा या अमड़ा को अच्छे से धो लें, अब उसे सावधानी से चार हिस्सों में काट लें. अमड़ा या अमरा काटने में सावधानी बरतें क्योंकि इसमें अंदर रेसे होते हैं, जिसके चलते इसे काटना थोड़ा कठिन होता है, हड़बड़ी करने पर कई बार हाथ कटने जैसी दुर्घटना भी हो जाती है.
अब गैस पर कड़ाही चढ़ाएं, ध्यान रहे लोहा की कड़ाही नहीं हो. क्योंकि अमड़ा का स्वाद खट्टा होता है, जिससे वह लोहे के साथ रिएक्शन करके स्वाद बिगाड़ देता है. कड़ाही अच्छे से गर्म हो जाए तो उसमें दो छोटा चम्मच सरसो तेल डालें. तेल गरम हो जाए तो अब उसमें फोरन के रूप में मेथी दाने, सौंफ, लौंग और तेजपत्ता डालें. सारी चीजें चटक जाएं तब इसमें कटे हुआ अमरा या अमड़ा डालें. गैस का फ्लेम मीडियम या लो ही रखें. अब अमड़ा को धीमी आंच पर ही करीब पांच मिनट भूनें.
आप देखेंगे कि अमड़ा का ऊपरी स्किन गलने लगा है तब, इसमें गूड़ और चीनी डालकर तीन छोटे कप से पानी डाल दें. अच्छे से मिलाएं. इसी समय दो चुटकी नमक भी डालें, अगर घर पर काला नमक हो तो वो भी एक चुटकी डालें. अमड़ा गुड़ और चीनी के साथ मिलकर उबलने लगे तो उसमें काली मिर्च पाउडर डाल दें. इसे धीमी आंच पर ढककर 12 से 15 मिनट पकाएं. बीच-बीच में ढक्कन हटाकर देखें कि अमड़ा गलने लगा है और गुड़ की ग्रेवी ठीक ठाक गाड़ी हो गई तो गैस को बंद कर दें, ऊपर से भूने हुए जीरे का पाउडर छिड़ककर उसे ढककर 15 मिनट के लिए छोड़ दें. बस आपका अमड़ा का अंगूरा तैयार है.
अब आप चाहे तो अमड़ा के अंगूरा में डूबो-डूबोकर सीधे रोटी, पूड़ी या पराठे खा सकते हैं. या भी फिर आप इस सब्जी को खाने की प्लेट में एडिशनल सब्जी के रूप में भी यूज कर सकते हैं. आप चाहे तो इसे ज्यादा मात्रा में बनाकर तीन से चार दिन रख सकते हैं. इसे फ्रीज में भी रखने की जरूरत नहीं होती है. फ्रीज में रखते हैं तो वेटर है वरना खुले में भी छलनी या या कपड़े से ढककर पतले में रख सकते हैं. इसे रखने में बस एक बात का ख्याल रखें कि बर्तन एल्युमिनियम या लोहे की ना हो. स्टील, चीनी मिट्टी, कांच या प्लास्टिक या मिट्टी की ही हो. सबसे जरूरी बात अमरा के अंगूरा को अगर दो तीन दिनों के लिए स्टोर कर रहे हैं तो इसे किसी बिलकुल सूखे हुए चम्मच ही उपयोग के लिए नकालें, इसमें ध्यान रखें कि इसे खुले हाथों से ना छूएं.