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Dholpur Style Mahi Aloo ki Sabzi Recipe: बरसात के मौसम में धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में मही आलू की सब्जी बड़े चाव से खाई जाती है. आलू, छाछ, प्याज, लहसुन और मसालों से बनने वाली यह रेसिपी कम समय में तैयार हो जाती है. गांवों में इसे रोटी, पूरी और पराठे के साथ परोसा जाता है, जबकि बच्चों के टिफिन में भी रखा जाता है. स्वाद और पोषण का बेहतरीन मेल होने के कारण यह सब्जी आज भी ग्रामीण परिवारों की पहली पसंद बनी हुई है. अगर आप बारिश में देसी स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं, तो यह रेसिपी जरूर ट्राई करें.

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धौलपुर. राजस्थान के धौलपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में बारिश के मौसम में मही आलू की सब्जी बड़े चाव से खाई जाती है. यह छाछ जिसे ग्रामीण भाषा में मही कहा जाता है और आलू से बनने वाली पारंपरिक सब्जी है. यह सब्जी कम समय में आसानी से तैयार हो जाती है. यह सब्जी खाने में बेहद स्वादिष्ट तो होती है, साथ ही स्वास्थ्यवर्धक भी मानी जाती है. गांवों में बच्चे, और बुजर्गों को सभी को पसंद आती है. अगर बरसात में कुछ देसी और अलग स्वाद खाना चाहते हैं, तो मही आलू एक बेहतरीन सब्जी है.

गृहिणी प्रभा शर्मा बताती हैं कि मही आलू की सब्जी बनाने की सामग्री लगभग हर घर में आसानी से मिल जाती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले आलू को अच्छी तरह धोकर छील लें और छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. इसके बाद प्याज, लहसुन और हरी मिर्च को बारीक काट लें. अब गैस पर कढ़ाई चढ़ाकर उसमें सरसों का तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर सबसे पहले हरी मिर्च, प्याज और लहसुन डालकर अच्छी तरह भून लें. जब यह सुनहरा हो जाए तो इसमें हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, स्वादानुसार नमक और थोड़ा सा गरम मसाला डालकर मसालों को अच्छी तरह भून लें.

इस तरह घर पर बनाएं धौलपुर की देसी मही आलू की सब्जी

इसके बाद कटे हुए आलू डालें और थोड़ा पानी मिलाकर करीब 5 मिनट तक पकाएं, ताकि आलू नरम होने लगें. अब छाछ यानी मही को अच्छी तरह फेंट लें और धीरे-धीरे कढ़ाई में डालें. ध्यान रहे कि मही डालने के बाद सब्जी को लगातार 5 से 8 मिनट तक चलाते रहें. ऐसा नहीं करने पर छाछ फट सकती है और सब्जी का स्वाद खराब हो सकता है. लगातार चलाने से मही अच्छी तरह आलू में मिल जाती है और सब्जी का स्वाद बढ़ जाता है. इस तरह धौलपुर की देसी मही आलू की सब्जी कुछ ही देर में बनकर तैयार हो जाएगी.

ग्रामीण इलाकों में बेहद लोकप्रिय है यह सब्जी

धौलपुर के ग्रामीण इलाकों में यह एक पारंपरिक और बेहद लोकप्रिय सब्जी है. गांवों में मेहमान आने पर भी अक्सर मही आलू की सब्जी बनाई जाती है. इसे रोटी, पूरी और पराठे के साथ बड़े स्वाद से खाया जाता है. ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों के टिफिन में भी यह सब्जी रखते हैं, क्योंकि बच्चे भी इसे बहुत पसंद करते हैं. आसान रेसिपी, देसी स्वाद और पौष्टिक गुणों की वजह से मही आलू आज भी ग्रामीण रसोई की खास पहचान बनी हुई है.

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deep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…

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