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बारिश में बढ़ जाता है इन 8 पकौड़ियों का स्वाद, देखते ही खाने का मन कर जाएगा

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बरसात का मौसम आते ही गरमा-गरम पकौड़ियों की खुशबू हर घर में महसूस होने लगती है. चाय के साथ पकौड़े खाने की परंपरा वर्षों पुरानी है. अलग-अलग सब्जियों और देसी सामग्रियों से बनने वाली ये पकौड़ियां स्वाद के साथ बचपन और गांव की पुरानी यादों को भी ताजा कर देती हैं. आइए जानते है कुछ आसान रेसिपी..

गांवों की पारंपरिक रसोई में बरी पकौड़ी का खास स्थान है. चने की दाल से बनने वाली यह पकौड़ी स्वाद में कुरकुरी और बेहद लाजवाब होती है. इसे बनाने के लिए चने की दाल को रातभर पानी में भिगोकर रखा जाता है और सुबह धोकर पीस लिया जाता है. इसके बाद इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, पसंदीदा मसाले और नमक मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है. तैयार मिश्रण को लड्डू के आकार में बनाकर सरसों के तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है. बाहर से कुरकुरी और अंदर से मुलायम बरी पकौड़ी चटनी या गर्म चाय के साथ खाने का मजा बढ़ा देती है. बरसात के मौसम में इसका देसी स्वाद गांव की पुरानी यादों और पारंपरिक खानपान की खुशबू को फिर से ताजा कर देता है.

ब्रेड पकौड़ा ऐसा नाश्ता है, जिसे बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई पसंद करता है. इसे बनाने के लिए उबले हुए आलू में हरी मिर्च, धनिया, मसाले और थोड़ा अमचूर मिलाकर स्वादिष्ट भरावन तैयार किया जाता है. इस मिश्रण को ब्रेड के बीच भरकर बेसन के घोल में डुबोया जाता है और फिर सुनहरा होने तक तला जाता है. बाहर से कुरकुरी और अंदर से मसालेदार आलू की परत वाला ब्रेड पकौड़ा बारिश के मौसम में चाय के साथ खाने का मजा दोगुना कर देता है. हरी चटनी और टमाटर सॉस के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.

लौकी की पकौड़ी स्वाद के साथ सेहत का भी बेहतरीन विकल्प मानी जाती है. इसे बनाने के लिए ताजी, छोटी और बिना बीज वाली लौकी लेना बेहतर रहता है. लौकी को गोलाकार पतले टुकड़ों में काटकर अलग रख लें. इसके बाद बेसन में नमक, हरी मिर्च, धनिया, जीरा और थोड़ा चावल का आटा मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार किया जाता है. कटे हुए लौकी के टुकड़ों को इस घोल में अच्छी तरह लपेटकर सरसों के तेल में कुरकुरा और सुनहरा होने तक तला जाता है. बाहर से कुरकुरी और अंदर से मुलायम लौकी की पकौड़ी बरसात के मौसम में चाय के साथ खाने का स्वाद बढ़ा देती है. यह स्वाद के साथ शरीर को ऊर्जा और पोषण भी प्रदान करती है.

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बैंगन की पकौड़ी भी बरसात के मौसम में पसंद किया जाने वाला पारंपरिक नाश्ता है. इसे बनाने के लिए बैंगन को पतले-पतले टुकड़ों में काटकर बेसन के मसालेदार घोल में अच्छी तरह लपेटा जाता है. इसके बाद इन्हें धीमी आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तला जाता है. बैंगन की मुलायम बनावट और बेसन की कुरकुरी परत मिलकर इसे खास स्वाद देती है. पुदीने या धनिया की चटनी के साथ गरमा-गरम बैंगन पकौड़ी का स्वाद और भी बढ़ जाता है. बारिश के मौसम में चाय के साथ इसका आनंद लेना एक अलग ही अनुभव देता है. 

टीडी कॉलेज चौराहा, बलिया पर पकौड़े बनाने वाले दुकानदार विशाल कुमार के अनुसार, आलू की पकौड़ी या आलू की कतली का नाम सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. इसे बनाने के लिए कटे हुए आलू के टुकड़ों को गाढ़े बेसन के मसालेदार घोल में डुबोकर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तला जाता है. बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम आलू की पकौड़ी हर उम्र के लोगों को पसंद आती है. इसके साथ अगर टमाटर, धनिया और लहसुन की स्वादिष्ट चटनी मिल जाए, तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. बारिश के मौसम में गरमा-गरम आलू पकौड़ी का आनंद लोगों को खास पसंद आता है.

गिरवछ के पत्तों की पकौड़ी गांवों की पुरानी पारंपरिक रसोई का खास हिस्सा रही है. पहले दादी-नानी के हाथों से बनने वाली यह पकौड़ी अब धीरे-धीरे कम देखने को मिलती है. इसे बनाने के लिए गिरवछ के कोमल पत्तों पर मसालेदार बेसन की परत लगाई जाती है और फिर पत्तों को कई बार मोड़कर लपेटा जाता है. इसमें खटाई का इस्तेमाल स्वाद को खास बनाने के लिए किया जाता है. ग्रामीण इलाकों में अपनी अलग पहचान रखने वाली यह पारंपरिक पकौड़ी हल्की सुगंध, कुरकुरी बनावट और देसी स्वाद के लिए जानी जाती है. बारिश के मौसम में गरमा-गरम गिरवछ पत्ते की पकौड़ी का स्वाद लोगों को पुराने दिनों और गांव की रसोई की याद दिला देता है.

प्याज और गोभी की पकौड़ी भी बरसात के मौसम में लोगों की पसंदीदा होती है. प्याज की पकौड़ी बनाने के लिए पतले कटे प्याज में बेसन, हरी मिर्च, अजवाइन, धनिया और मसाले मिलाकर अच्छी तरह तैयार किया जाता है. इसमें पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाता, ताकि पकौड़ी कुरकुरी बने. तैयार मिश्रण के छोटे-छोटे हिस्सों को गर्म तेल में तलकर सुनहरा किया जाता है. वहीं, गोभी की पकौड़ी के लिए गाढ़ा और मसालेदार बेसन का घोल तैयार किया जाता है. गोभी के छोटे-छोटे टुकड़ों को इस घोल में लपेटकर सरसों के तेल में कुरकुरा होने तक तला जाता है. बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम ये पकौड़ियां बारिश के मौसम में चाय के साथ स्वाद का मजा दोगुना कर देती हैं. 

बरसात का मौसम आते ही घरों में पकौड़ियों की खुशबू माहौल को खास बना देती है. अलग-अलग सब्जियों और पारंपरिक सामग्रियों से तैयार होने वाली ये पकौड़ियां सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ातीं, बल्कि परिवार के साथ बैठकर पुराने दिनों की यादों और अपनापन का एहसास भी कराती हैं. गरमा-गरम चाय, स्वादिष्ट चटनी और अपनों का साथ मिल जाए, तो बारिश का आनंद और भी बढ़ जाता है. आलू, प्याज, लौकी, बैंगन, गोभी और अन्य पारंपरिक पकौड़ियां अपने अलग स्वाद और देसी अंदाज के कारण हर किसी को पसंद आती हैं. 

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