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Vindhya Sevaiyan Recipe: विंध्य क्षेत्र की ग्रामीण महिलाएं हाथों या सांचे से सेवइयां तैयार कर धूप में सुखाती हैं, जिन्हें सालभर उपयोग में लाया जाता है. बिना केमिकल की ये देसी सेवइयां स्वाद और सेहत दोनों में बेहतर मानी जाती हैं, जिससे परंपरा आज भी कायम है.
Vindhya Food: विंध्य क्षेत्र में भोजन केवल स्वाद नहीं, बल्कि संस्कृति और सद्भाव का प्रतीक है. यही वजह है कि होली की गुजिया और मीठी ईद की सेवइयां बिना किसी भेदभाव के हर घर में अपनापन घोलती हैं. जैसे ही गर्मियों का मौसम दस्तक देता है, गांव-गांव में गेहूं के आटे से बनी पारंपरिक सेवइयों की खुशबू फैलने लगती है. बघेलखंड अंचल में यह सेवइयां हर थाली का अहम हिस्सा मानी जाती हैं.
ग्रामीण इलाकों में आज भी महिलाएं पारंपरिक तरीके से हाथों या मशीन (सांचे) की मदद से सेवइयां तैयार करती हैं. सेवइयां बनाने के लिए गेहूं के आटे को सख्त गूंथकर पतली-पतली धारियों में ढाला जाता है, फिर इन्हें 2-3 दिनों तक तेज धूप में सुखाया जाता है. पूरी तरह सूखने के बाद इन्हें सालभर के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है.
केमिकल, मसालों का इस्तेमाल नहीं
खास बात ये कि इन देसी सेवइयों में किसी तरह के केमिकल या बाजारू मसालों का इस्तेमाल नहीं होता. सादगी, परंपरा और सेहत का यह अनोखा मेल इन्हें और खास बनाता है. आदिवासी बाहुल्य गांवों में यह परंपरा आज भी जीवित है, हालांकि, बाजार में मशीन से बनी सेवइयों की बढ़ती उपलब्धता ने इसे कुछ हद तक प्रभावित जरूर किया है.
सेहत के लिए अच्छी
रसोइया प्रियंका सिंह बताती हैं कि गर्मियों में हर साल महिलाएं मिलकर सेवइयां बनाती हैं. उनके अनुसार, बाजार की सेवइयां भले ही दिखने में आकर्षक हों, लेकिन घर की बनी सेवइयों जैसा स्वाद उनमें नहीं होता. कई परिवार आज भी अपनी परंपरा को बनाए रखने के लिए खुद ही सेवइयां तैयार करते हैं. उनका मानना है कि यह न केवल स्वाद में बेहतर होती हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हैं.
ऐसे बनाएं
पारंपरिक विधि के अनुसार, पहले गेहूं के आटे को सख्त गूंथा जाता है और कुछ समय के लिए ढककर रखा जाता है. इसके बाद छोटी-छोटी लोइयों को हाथ से रोल कर पतली सेवइयां बनाई जाती हैं. इन्हें साफ कपड़े या थाली में फैलाकर धूप में सुखाया जाता है और फिर एयरटाइट कंटेनर में स्टोर कर लिया जाता है.
प्रोटीन-आयरन भी भरपूर
आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ .आरपी परौहा के अनुसार, हाथ से बनी गेहूं की सेवइयां पोषण के लिहाज से भी काफी लाभकारी होती हैं. इनमें प्रोटीन और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इन्हें मीठी खीर या नमकीन उपमा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे हर बार एक अलग स्वाद का अनुभव मिलता है.
आधुनिकता के इस दौर में भले ही बाजारवाद तेजी से बढ़ रहा हो, लेकिन विंध्य के गांवों में परंपराओं की मिठास अब भी बरकरार है. यहां की महिलाएं अपने हाथों से सेवइयां बनाकर न सिर्फ स्वाद को जिंदा रखे हुए हैं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी सहेज रही हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें