बिहार के पूर्णिया जिले में सोमवार को एक बड़ा हादसा सामने आया। अमौर प्रखंड के तियरपाड़ा पंचायत स्थित आसियानी डगरा घाट पर एक पुराना और जर्जर लोहे का पुल अचानक टूट गया। जिस वक्त पुल टूटा, उस पर गिट्टी लदा ट्रक गुजर रहा था। पुल का एक हिस्सा टूटते ही ट्रक समेत नदी में जा गिरा और पानी में समा गया।

पुल के टूटते ही मची अफरा-तफरी

घटना करीब सुबह 11:30 बजे की बताई जा रही है। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, ट्रक के नदी में गिरने से पहले चालक और कंडक्टर किसी तरह वाहन से बाहर निकल गए और मौके से चले गए। हालांकि, प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि की जानी बाकी है।

पहले से जर्जर था पुल

अमौर के बीडीओ राजा राम पंडित के मुताबिक, यह पुल काफी पुराना और पहले से क्षतिग्रस्त था। इसके बावजूद गिट्टी से लदा भारी ट्रक पुल से कैसे गुजर रहा था, इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि पुल नदी के बीच हिस्से में टूट गया, जिसके कारण ट्रक नदी में समा गया।

मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़

हादसे की सूचना मिलते ही अमौर के बीडीओ, अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की भी बड़ी संख्या में भीड़ जुट गई। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव के लिए एसडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया है। मौके पर एंबुलेंस भी मौजूद है।

पुल टूटने से कई गांवों का संपर्क प्रभावित

पुल के टूट जाने से अमौर और जलालगढ़ के बीच आवागमन प्रभावित हो गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस रास्ते से एक दर्जन से अधिक गांवों के लोग आवागमन करते थे। पुल के टूटने से हजारों की आबादी के सामने आवाजाही की समस्या खड़ी हो गई है।

जर्जर पुल पर भारी वाहन कैसे पहुंचा?

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पुल पहले से ही क्षतिग्रस्त और जर्जर था, तो उस पर भारी वाहनों का परिचालन कैसे जारी था। गिट्टी से लदा ट्रक पुल पर किसकी अनुमति से पहुंचा और पुल की हालत को देखते हुए वहां भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे, इसकी जांच अब प्रशासन करेगा।

फिलहाल प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर मौजूद हैं। नदी में डूबे ट्रक को निकालने और किसी अन्य संभावित नुकसान की जानकारी जुटाने के लिए राहत-बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

इसके पहले बेतिया में टूटा था पुल

बता दें कि इसके पहले जून 2026 में पश्चिम चंपारण के बेतिया में धनौती नदी पर करीब 35 साल पुराना गोडा पुल अचानक ध्वस्त हो गया था। इससे करीब 10 गांवों और कई पंचायतों का संपर्क प्रभावित हुआ था।

जेपी मिश्रा की रिपोर्ट

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