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बीकानेर की परंपरा जानकर रह जाएंगे हैरान, साल में 2 दिन बनता है ये डिश!

 

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Special Dishes Of Bikaner: बीकानेर की तपती रेत के बीच एक ऐसी परंपरा आज भी जिंदा है, जो लोगों को अपनी जड़ों से जोड़कर रखती है. यहां एक खास तरह का खिचड़ा बनाया जाता है, लेकिन यह कोई साधारण व्यंजन नहीं है, बल्कि साल में सिर्फ दो खास मौकों पर ही तैयार होता है. अक्षय तृतीया और रामदेव जी की बीज पर हर घर में यह पारंपरिक खिचड़ा बनाकर परंपरा को निभाया जाता है. इस खिचड़े की खासियत इसकी सामग्री और बनाने की विधि में छिपी है. गेहूं, चने की दाल, बाजरा और कई बार सात तरह के अनाजों को मिलाकर इसे तैयार किया जाता है, जिसे धीमी आंच पर घंटों तक पकाया जाता है. पुराने समय की तरह आज भी महिलाएं ओखली में बाजरा कूटकर इसकी तैयारी करती हैं, जो इसे और भी खास बनाता है. इतिहास से जुड़ा यह व्यंजन न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. घी से भरपूर यह खिचड़ा ऊर्जा का अच्छा स्रोत है और मरुस्थलीय जीवनशैली के अनुरूप तैयार किया गया था. आज भी नई पीढ़ी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है, जिससे बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान जीवित बनी हुई है.



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