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Bikaner Famous Namkeen: यूं तो आपने तरह-तरह की नमकीनें खाई होंगी लेकिन आपने भी ध्यान दिया होगा कि बीकानेर में बनी नमकीन का कोई तोड़ नहीं है. खासकर बीकानेर की भुजिया का. बीकानेर के आचार्य चौक में रोज करीब पांच क्विंटल भुजिया बनती है. सस्ती लागत से 240 रुपये किलो पर बिकती है. यहां कई वैरायटी है. हर किसी का सवाल यही होता है कि आखिर बीकानेर की भुजिया बनाई कैसे जाती है.
बीकानेर. बीकानेर अपनी पारंपरिक खान-पान संस्कृति के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. यहां की भुजिया की पहचान तो विश्व स्तर तक बन चुकी है. इसी पहचान को आगे बढ़ा रहा है शहर का आचार्य चौक. यह अब भुजिया निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है. इस चौक में हर दिन बड़ी मात्रा में भुजिया तैयार की जाती है, जिसकी डिमांड स्थानीय बाजार के साथ-साथ बाहर के शहरों में भी लगातार बनी हुई है.
आचार्य चौक में भुजिया बनाने वाली करीब पांच प्रमुख दुकानें संचालित हो रही हैं. यहां रोजाना कुल मिलाकर लगभग पांच क्विंटल भुजिया तैयार किया जाता है. यानी एक दुकान पर औसतन एक क्विंटल भुजिया बनता है. खास बात यह है कि यहां बनने वाला भुजिया उसी दिन बड़ी मात्रा में बिक भी जाता है, जबकि शेष भुजिया राजस्थान के अन्य शहरों और देश के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई किया जाता है.
बाकियों से अलग क्यों है ये भुजिया
बीकानेर की पहचान बन चुकी भुजिया के इस केंद्र ने न केवल स्थानीय व्यापार को मजबूती दी है, बल्कि कई परिवारों के लिए रोजगार का भी साधन बना हुआ है. स्थानीय दुकानदार लक्ष्मीनारायण व्यास बताते हैं कि पहले यह क्षेत्र केवल आचार्य चौक के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब यह ‘भुजिया बाजार’ के रूप में पहचान बना चुका है. यहां तैयार होने वाला भुजिया पूरी तरह शुद्ध मोठ मोगर और उच्च गुणवत्ता वाले मसालों से बनाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू अलग ही स्तर की होती है.
इतने कम दाम में कैसे मिल जा रहा?
उन्होंने बताया कि यहां भुजिया बनाने की लागत अन्य बाजारों की तुलना में कम रहती है. इसका कारण यह है कि अधिकांश दुकानदार अपने ही घर के सामने भुजिया तैयार करते हैं, जिससे किराया या भाड़ा नहीं देना पड़ता. साथ ही सीमित श्रमिकों के सहयोग से काम किया जाता है, जिससे उत्पादन लागत कम हो जाती है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर भुजिया उपलब्ध हो पाता है.
पतली, मोटी और तीन नंबर भुजिया क्या है
आचार्य चौक में भुजिया की कई वैरायटी तैयार की जाती हैं. इनमें पतली, मोटी, तीन नंबर भुजिया के अलावा इलायची भुजिया, डांखोली, पापड़ी भुजिया और चाबिनी जैसी खास किस्में शामिल हैं. वर्तमान में भुजिया की कीमत करीब 240 रुपये प्रति किलो के आसपास है, जो गुणवत्ता के हिसाब से काफी किफायती मानी जाती है.
भुजिया बनाने की प्रक्रिया भी तेज और कुशल होती है. एक बार में भुजिया तैयार करने में लगभग एक घंटे का समय लगता है. पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाला यह भुजिया स्वाद और कुरकुरेपन के कारण ग्राहकों की पहली पसंद बना हुआ है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें