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Satyanashi Sabzi Recipe: नागौर में सत्यानाशी के जंगली पौधे से बनी सब्जी अपनी खास पहचान बना रही है. काँटेदार होने के बावजूद इसके कोमल पत्तों और डंठलों को विशेष तरीके से साफ कर बनाया जाता है, जिसका स्वाद सरसों के साग जैसा लगता है. गृहणी सरला देवी ने बताया कि इसे सरसों के तेल, लहसुन और हींग के तड़के के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है. यह सब्जी औषधीय गुणों से भरपूर है और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे सेहत का खजाना माना जाता है.
Satyanashi Sabzi Recipe: आमतौर पर जब हम सब्जियों की चर्चा करते हैं, तो दिमाग में पालक, गोभी, भिंडी या मटर जैसे नाम आते हैं. लेकिन राजस्थान के नागौर जिले के ग्रामीण अंचलों में एक ऐसी सब्जी बेहद चाव से खाई जाती है, जिसे शहरी लोग अक्सर एक जंगली खरपतवार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. हम बात कर रहे हैं ‘सत्यानाशी’ के पौधे की. यह एक जंगली वनस्पति है, जो अपने औषधीय गुणों और विशिष्ट स्वाद के लिए जानी जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे पुराने समय से ही भोजन का हिस्सा बनाया जाता रहा है. इसके कोमल पत्तों, फूलों और डंठलों से तैयार यह सब्जी न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि इसका जायका काफी हद तक सरसों के साग से मिलता-जुलता होता है.
सत्यानाशी की सब्जी बनाना एक कला है, क्योंकि इस पौधे में छोटे-छोटे कांटे होते हैं. नागौर की गृहणी सरला देवी बताती हैं कि इस सब्जी को बनाने के लिए सबसे पहले पौधे के ऊपरी हिस्से से कोमल पत्ते, फूल और डंठल चुने जाते हैं. डंठलों को सावधानी से छीलकर काँटों को अलग किया जाता है और फिर इन्हें छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है. इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया इसे साफ करना है. कटी हुई सामग्री को हल्के नमक वाले गुनगुने पानी में 10 से 15 मिनट तक भिगोकर रखा जाता है. इससे न केवल काँटों का कड़ापन खत्म होता है, बल्कि पौधे की प्राकृतिक कड़वाहट भी कम हो जाती है, जिससे सब्जी का स्वाद निखर कर आता है.
पारंपरिक पाक विधि
सब्जी तैयार करने के लिए सबसे पहले एक कढ़ाही में सरसों का तेल गर्म किया जाता है. जब तेल से धुआं निकलने लगे, तब इसमें जीरा, हींग, बारीक कटा लहसुन और हरी मिर्च का तड़का लगाया जाता है. तड़का सुनहरा होने पर इसमें तैयार सत्यानाशी के पत्ते और डंठल डाले जाते हैं. मसाले के तौर पर हल्दी, धनिया पाउडर और स्वादानुसार नमक मिलाकर इसे धीमी आंच पर ढंककर पकाया जाता है. करीब 10 से 15 मिनट तक पकने के बाद जब डंठल नरम हो जाएं, तब इसमें गरम मसाला डालकर आंच बंद कर दी जाती है.
सेहत के लिए वरदान
आज के दौर में जहाँ लोग फास्ट फूड की ओर भाग रहे हैं, वहीं सत्यानाशी जैसी पारंपरिक सब्जियाँ हमें अपनी जड़ों की ओर वापस ले जाती हैं. यह सब्जी कम खर्च में तैयार होती है और शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे बाजरे की रोटी या गरम पराठे के साथ परोसा जाता है, जो सादगी और शुद्धता का अहसास कराती है.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें