विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पोलैंड में कहा कि भारत के तेल नहीं खरीदने से यूक्रेन और रूस के बीच जंग नहीं रुकने वाली। उन्होंने भारत के रूस से तेल खरीदने की वजह बताते हुए कहा कि 1.4 बिलियन लोगों की जरूरतों को पूरा करना भारत सरकार की जिम्मेदारी है। मौजूदा हालातों में तेल की आपूर्ति करना बेहद चुनौती पूर्ण है। उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन की जंग पांचवें साल में पहुंच चुकी है और यह नहीं खत्म होने वाली है। इसलिए नहीं कि किसी ने तेल, एल्युमिना, फर्टिलाइज़र, या मेटल और मिनरल खरीदने या न खरीदने का फैसला किया। यह तब खत्म होगी, जब डिप्लोमेसी होगी, जब बातचीत होगी, जब नेगोशिएशन होगा। मुझे लगता है कि समस्या को ठीक से पहचानना चाहिए। मुद्दा एक झगड़ा है, यह एक जंग है, और इसका समाधान व्यापार में नहीं है। इसका समाधान बातचीत में है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “हम यूक्रेनी पक्ष और रूसी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में हैं। मैं खुद कुछ दिन पहले मॉस्को में था, और प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पुतिन 2-3 दिन पहले बिश्केक में मिले थे, और फिर मैं कीव गया था। रूसी पक्ष और कल यूक्रेनी पक्ष के साथ हमारी काफी डिटेल में बातचीत हुई। हम यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या ऐसे कोई आइडिया और सुझाव हैं, जिन्हें किसी तरह से डेवलप किया जा सके, जिससे वे लड़ाई को कम करने में, या यूं कहें कि लड़ाई को खत्म करने में मदद कर सकें।”

भारत लड़ाई खत्म कराने की कोशिश कर रहा

डिप्टी प्राइम मिनिस्टर राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ हाई-लेवल बाइलेटरल कंसल्टेशन के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, “डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और मैंने कुछ बड़े ग्लोबल और रीजनल मुद्दों पर भी बात की। उनमें से एक खास है, यूक्रेन में चल रहा युद्ध, जो अब अपने 5वें साल में है। मुझे लगता है कि आप में से ज्यादातर लोग जानते होंगे कि मैं खुद अभी कीव से यहां आया हूं। भारत का मानना ​​है कि कभी न खत्म होने वाले युद्ध का रास्ता युद्ध को खत्म करने की ओर ले जाना चाहिए। ये ऐसे युद्ध हैं, जिनमें कोई जीत नहीं पाता। हर नया दिन मतलब ज्यादा मौत, ज्यादा तबाही, सभी पक्षों को ज्यादा नुकसान और बाकी दुनिया को इसकी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है। यह चिंता हाल ही में पीएम मोदी ने सबके सामने जाहिर की थी। इसलिए हमारी कोशिशें बातचीत और डिप्लोमेसी को बढ़ावा देने पर फोकस होनी चाहिए। हममें से हर एक को वह करना चाहिए, जो हम कर सकते हैं, जिस भी तरीके से हमें लगता है कि वह सबसे असरदार होगा, और इस लड़ाई को खत्म करने के लिए दूसरों की कोशिशों का सपोर्ट करना चाहिए। यह भारत का पक्का यकीन है, और हम इस पर काम कर रहे हैं।”

पश्चिमी एशिया के हालातों पर भी चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, “हमने आज गल्फ में चल रहे झगड़े, पश्चिमी एशिया के हालात और इंडो-पैसिफिक में हो रहे डेवलपमेंट पर भी बात की। दुनिया आज न सिर्फ कई लड़ाइयों से जूझ रही है, बल्कि खाने, फ्यूल और फर्टिलाइजर की अवेलेबिलिटी की गंभीर चुनौतियों से भी जूझ रही है। सप्लाई चेन रेजिलिएंस एक अलग लेकिन एक्स्ट्रा चिंता का विषय है। पॉलिटिकल डेमोक्रेसी, मार्केट इकॉनमी और ओपन सोसाइटी के तौर पर, भारत और पोलैंड कई जरूरी ग्लोबल डिबेट्स की दिशा तय करने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। यूनाइटेड नेशंस और मल्टीलेटरल फोरम में मिलकर काम करने की हमारी परंपरा उस कन्वर्जेंस का एक जरूरी एक्सप्रेशन है। तो मैं यह कहकर अपनी बात खत्म करना चाहता हूं कि आज मेरी बातचीत इन सभी एंगल से प्रोडक्टिव रही।”

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